गोवा मेडिकल कालेज में स्‍टोर रूम और जमीन पर पड़े हैं कोरोना मरीज, ऑक्सीजन न मिलने से 15 लोगों की हुई मौत

गोवा, 14 मई। भारत के पसंदीदा हॉलिडे डेस्टिनेशन में से एक गोवा में अब कोरोना बेकाबू हो चुका है। अस्पतालों में बिस्तर खत्म हो चुके हैं, लोग ऑक्सीजन के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं और हर दिन कई लोगों की मौत हो रही है। गोवा मेडिकल कॉलेज के अस्‍पताल में गुरुवार की रात ऑक्‍सीजन न मिल पाने के कारण महज 5 घंटे के अंदर 15 मरीजों की मौत हो गई। यहां मरीज फर्श पर और स्टोररूम के अंदर पड़े देखे गए।

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अस्‍पताल के स्‍टोर और वार्ड में फर्श पर पड़े हुए मरीज

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    बता दें कोरोना का प्रकोप बढ़ने के कारण गोवा के अस्पताल मरीजों से फुल हो चुके हैं। यहां तक की कई मरीज ऑक्सीजन की कमी के कारण दम तोड़ दे रहे है। गोवा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के अंदर भयावह दृश्‍य नजर आ रहा है यहां मरीज अस्‍पताल के स्‍टोर और वार्ड में फर्श पर पड़े हुए, लावारिस और मदद के लिए रोते हुए दिखाई दे रहे हैं। गोवा की कोविड सकारात्मकता दर 51% है, जबकि वसूली दर सिर्फ 71% है।

    ऑक्‍सीजन की सप्‍लाई न होने से मरीज घुट-घुट मर रहे

    गोवा मेडिकल कॉलेज के एक वीडियो सामने आया है जिसमें कोविड -19 वार्ड के अंदर मरीजों को लेटा हुआ दिखाया गया है और अस्पताल का कोई भी कर्मचारी वहां मरीजों को देखने के लिए नहीं नजर आ रहा हैं मरीजों के परिजन ही देखभाल कर रहे हैं। तबियत खराब होने पर बुलाने पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही। गोवा मेडिकल कॉलेज अस्पताल और उसका स्‍टोर भी कोविड -19 रोगियों से भरा हुआ था। मरीजों का आरोप लगाया कि जिन मरीजों की मौत हुई उनमें से अधिकांश की मौत ऑक्‍सीजन न मिलने के कारण हुई, वहीं कई ऐसे मरीज थे जिनको ऑक्‍सीजन सही मात्रा में सप्‍लाई नहीं हुई जिसके चलते उनकी जान गई।

    घर वालों को अपने मरीजों की करनी पड़ रही है देखभाल

    हेमंत कांबली, जिनके बहनोई का निधन हो गया ने मीडिया को बताया कि, "पहले मुझे बिस्तर नहीं मिला। कोई स्टाफ उपलब्ध नहीं है। हमें खुद अस्पताल के अंदर मरीजों को ले जाना है। जब हमें बिस्तर मिला, उसक पर एक गद्दा भी नहीं था, मैं अपने घर से एक गद्दा लाया। ""कोई ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं है और मैंने ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदने के लिए एक बड़ी राशि का भुगतान किया। कोई दवा नहीं है, कोई स्टाफ नहीं है। सब कुछ मरीज के रिश्तेदार पर निर्भर है। कांबली ने कहा कि पहली लहर से सरकार ने कुछ भी नहीं सीखा ना ही कोई इंतजाम किए।

    अपनी जान जोखिम में डालने के बाद भी अपने मरीज को खो दे रहे तिमारदार

    कांबली ने बताया कि "इतने भयानक हालात हैं कि मैंने अपनी आंखों के सामने अपने साले को खो दिया और मैं कुछ नहीं कर सका। मुझे और परिवार के अन्य सदस्यों ने हमारी जान जोखिम में डालकर कोविड वार्ड के अंदर रहे। अब मुझे पता नहीं कि कहीं मैं भी पॉजिटिव न हो गया हूं। उन्‍होंने कहा "जल्द से जल्द कुछ किया जाना चाहिए। अस्पताल के स्टोररूम के अंदर मरीज हैं, ऐसी हालत है।"

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