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Janta Curfew: मॉस्क लगे चेहरों को घूरने के बजाय उन्हें सैल्युट कीजिए, क्योंकि?

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बेंगलुरू। भारत में लगातार सामने आ रहे कोरोनावायरस संक्रमित मरीजों के मामले संकेत हैं कि अभी भी अधिकांश लोग महामारी बन चुकी कोरोनावायरस को लेकर अधिक संजीदा नहीं दिख रहे हैं। यही कारण है कि अभी भी ऐसे सभी लोग संक्रमण से बचाव और सुरक्षा के मापदंडों का गंभीरता से पालन अपनी निजी जिंदगी में नहीं कर रहे हैं।

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यह बात सही है कि बढ़ती मांगों के चलते मॉस्क और सेनीटाइजर समेत अन्य सामग्रियों के स्टॉक बाजार में खत्म हो गए हैं और उनकी कालाबाजारी शुरू हो गई है, लेकिन यह बात भी सही है कि कोरोनावायरस संक्रमण से सुरक्षा को लेकर सतर्क और मॉस्क पहनकर चलने वाले लोगों को लेकर भी हमारा समाज अभी उतना सजग और जागरूक नहीं हुआ है।

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यही कारण है कि बाजार में मॉस्क लगाकर चलने वाले लोगों के साथ लोग संक्रमित मरीज की तरह व्यवहार करते नज़र आते हैं और उन्हें घूरने और उनसे डरने लगते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि चेहरे पर मॉस्क लगाकर चलने वाला व्यक्ति कोरोनावायरस के संक्रमण से निजी सुरक्षा के लिए उसे लगाकर घूम रहा है। चेहरे पर मॉस्क लगाने के फ्लिप साइड देखेंगे तो अधिकांशों और भी चौंकना लाजिमी है।

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फर्ज कीजिए, अगर आपके सामने से गुजरने वाला अथवा आपके आसपास खड़ा व्यक्ति कोरोनावायरस संक्रमित हैं, और आपने उसके निकट खड़े होकर बात करने लगे और उससे हाथ मिला लिया तो आपका ही नहीं, आपके पूरे परिवार का कोरोनावायरस की चपेट में 100 फीसदी तय है, क्योंकि आपकी रूढ़वादी मानसिकता मॉस्क चेहरे वाले व्यक्ति को कोरोना संक्रमित मानकर बैठी है जबकि मॉस्क लगाकर नहीं चल रहे व्यक्ति से संक्रमण का अधिक खतरा हैं।

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मालूम हो, भारत में अब तक कुल 223 कोरोनावायरस संक्रमित मरीजों की पुष्टि हो चुकी है और संक्रमित कुल 5 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। भारत में तेजी से कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जिसके लिए संक्रमण से सुरक्षा के चिन्हित और निर्देशित उपायों पर अमल में लाना जरूरी है। वरना स्थिति को भयावह बनने में समय नही लगेगा। यह सबक यूरोपीय देश खासकर इटली और मध्यपूर्व देश ईरान से लिया जा सकता है।

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मॉस्क लगाकर चलने वाले लोग कोरोनावायरस संक्रमित नहीं होते

मॉस्क लगाकर चलने वाले लोग कोरोनावायरस संक्रमित नहीं होते

सच्चाई यह है कि अधिकांश मॉस्क लगाकर चलने वाले लोग कोरोनावायरस संक्रमित नहीं होते, बल्कि वो कोरोना के संक्रमण से खुद को सुरक्षित रखने के लिए मॉस्क पहनकर चल रहे हैं, ताकि बिना मॉस्क लगाए हुए कोरोनावायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आकर खुद संक्रमित न हो जाए। मॉस्क पहनने, खाने से पहले साबून से हाथ धोने और बातचीत के लिए तीन फिट की दूरी से बरतने और अभिवादन के लिए हैंडशेक के बजाय नमस्ते करने/कहने की आदत निजी सुरक्षा का द्योतक है ताकि संक्रमण से बचा जा सके।

समाज आज भी मॉस्क पहने हुए व्यक्ति को बीमार की तरह देखता है

समाज आज भी मॉस्क पहने हुए व्यक्ति को बीमार की तरह देखता है

भारतीय समाज में आज भी मॉस्क पहने हुए व्यक्ति को बीमार, रोगी, संक्रमित के रूप में देखा जाता है। यही वजह है कि संक्रमित लोग समाज में निकलने से पहले घर से मॉस्क निकालकर बाहर निकलते हैं और ऐसी सामाजिक मान्यताओं के शिकार हुए लोग कोरोनावायरस के संक्रमण फैलाने में सबसे आगे हैं। समाज में एक और मानसिकता के लोग भी मौजूद हैं, जो संक्रमण से सुरक्षा को लेकर गंभीर लोगों को मजाक उड़ाते हैं। यानी खुद वायरस संक्रमण के आसान वाहक होकर भी मॉस्क लगाने वालों का मजाक उड़ाने से नहीं चूकते हैं।

चीन के बाद कोरोनावायरस के दूसरे बड़े केंद्र के रूप में उभरे यूरोपीय देश

चीन के बाद कोरोनावायरस के दूसरे बड़े केंद्र के रूप में उभरे यूरोपीय देश

चीन के बाद कोरोनावायरस के दूसरे बड़े केंद्र के रूप में उभरे यूरोपीय देश इटली में भी एक पखवारा पूर्व ऐसे ही लोगों की बहुतायत थी, जो मॉस्क लगाए लोगों का मजाक बनाते थे और आज हालत यह है कि इटली में कोरोनावायरस संक्रमण से मरने वालों की संख्या ने चीन को पीछे छोड़ दिया है। इसे मानसिकता या लापरवाही, जो भी नाम दें, लेकिन वर्तमान में इटली सर्वाधिक कोरोनावायरस संक्रमित देश में शुमार हो चुका है। चौंकाने वाला आंकड़ा है यह है कि चीन और इटली में संक्रमित मरीजों और उनकी मृत्युदर के आंकड़ों मे घोर विषमता देखी गई है।

चीन 88 फीसदी मरीजों को न्यूट्रलाइज करने में सफल रही

चीन 88 फीसदी मरीजों को न्यूट्रलाइज करने में सफल रही

चीन में अब तक कोरोना संक्रमित कुल 80967 मरीज पाए गए हैं, जिनमें से कुल 71150 मरीजों यानी करीब 88 फीसदी को न्यूट्रलाइज करने में सफल रही और महज 4 फीसदी यानी 3248 संक्रमित मरीजों की घातक वायरस से शिकार होने से मौत हुई है, जिनमें से 6569 एक्टिव केस हैं जबकि 2136 केस गंभीर हैं। जबकि इस मामले में इटली का औसत बेहद खतरनाक हैं। इस मामले में इटली ही नहीं, बल्कि ईरान की की दशा बेहद खराब और डरावनी हैं।

इटली में कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत का औसत चीन से दोगुना है

इटली में कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत का औसत चीन से दोगुना है

इटली में अब तक कुल 41035 मरीज कोरोनावायरस से संक्रमित पाए गए हैं, जिनमें से महज 4440 मरीजों यानी करीब 10.75 फीसदी मरीजों को अभी तक न्यूट्राइलाइज करने में सफल हुई है जबकि 33190 केस अभी भी एक्टिव हैं और 2498 केस बेहद गंभीर हैं। वहीं, इटली में संक्रमित मरीजों की मौत का औसत चीन से दुगनी यानी 8.3 फीसदी रिपोर्ट की मौत हुई है। यही हाल ईरान का भी है, जहां अब तक कुल 18407 मरीज संक्रमित पाए गए है और उनमें से 1284 लोगों की मौत हो चुकी है।

ईरान में भी संक्रमित मरीजों की मौत का औसत भी चीन में अधिक

ईरान में भी संक्रमित मरीजों की मौत का औसत भी चीन में अधिक

ईरान में भी संक्रमित मरीजों की मौत का औसत चीन की तुलना में अधिक है। ईरान में संक्रमित मरीजों में से करीब 7 फीसदी मरीजों की मौत हो चुकी है, जिसका औसत चीन में हुई मौत की तुलना में 3 फीसदी ज्यादा है। ईरान में अब तक न्यूट्रलाइज किए गए मरीजों का औसत भी इटली की तुलना में बेहतर हैं। अब तक ईरान में 32.5 फीसदी मरीज न्यूट्रलाइज किए जा चुके हैं, जो चीन की तुलना में 55.5 फीसदी भले ही कम हो, लेकिन इटली की तुलना में करीब 22 फीसदी अधिक है।

सभी यूरोपीय देशों में संक्रमित मरीजों की मौत का औसत चीन से अधिक है

सभी यूरोपीय देशों में संक्रमित मरीजों की मौत का औसत चीन से अधिक है

कमोबेश यही हाल यूरोपीय देश स्पेन, जर्मनी, फ्रांस, स्वीटजरलैंड, नीदरलैंड, बेल्जियम, आस्ट्रिया, नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, पुर्तगाल, अमेरिका और कनाडा में भी देखा जा रहा है, जहां न्यूट्राइलज केस का औसत बेहद कम है। इसके पीछे लापरवाही और बेपरवाही सीधे-सीधे जिम्मेदार कहे जा सकते हैं, क्योंकि जिस तरह से कोरोनावायरस ने पूरे यूरोपीय देशों को अपने पकड़ में लिया है, उसको देखते हुए कहा जा सकता है कि वहां हद से अधिक लापरवाही बरती गईं।

भारत में कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए जनता कर्फ्यु

भारत में कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए जनता कर्फ्यु

शायद यही कारण है कि भारत में कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरूवार रात 8 बजे पूरे देश से कोरोनावायरस से निपटने के लिए साथ आने का आह्वान किया और जनता कर्फ्यु का जिक्र किया। जनता कर्फ्यु का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ब्लैक आउट का जिक्र किया था। जो पुराने जमाने में युद्ध के बाद की स्थितियों अथवा महामारी से निपटने के लिए एक लॉकडाउन की स्थिति का द्योतक है।

रविवार, 22 फरवरी सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक घर में रहने की गुजारिश

रविवार, 22 फरवरी सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक घर में रहने की गुजारिश

प्रधानमंत्री मोदी ने आगामी रविवार, 22 फरवरी को देशवासियों को सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक घर में रहने की गुजारिश की है, जिसका नाम उन्होंने जनता कर्फ्यु दिया है। इस दौरान सभी देशवासियों को घर में रहने के सलाह दी गई है और करीब 14 घंटे घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है। ऐसा ही प्रयासों से चीन ने कोरोनावायरस के संक्रमण के प्रसार को रोकने में सफलता पाई और अब ऐसा ही कुछ प्रयास इटली में हो रहा है और अभी अमेरिका के कैलीफोर्निया में राज्यव्यापी लॉक डाउन की घोषणा की है और वहां के निवासियों को बेहद जरूरी होने पर ही घर छोड़ने का निर्देश दिया है।

अपनी सुरक्षा और बचाव के लिए जरूरी गैजेट का इस्तेमाल करें

अपनी सुरक्षा और बचाव के लिए जरूरी गैजेट का इस्तेमाल करें

इसलिए जरूरी है कि कोरोनावायरस से न केवल अपनी सुरक्षा और बचाव के लिए बताए गए जरूरी गैजेट का इस्तेमाल करें और ज्यादा जरूरी न हों, तो घर से बाहर न निकले और संक्रमण की स्थिति में तुरंत डाक्टर से संपर्क करें ताकि दूसरों आपके जरिए इसका संक्रमण न फैले। ऐसा करके ही कोरोनावायरस महामारी को हिंदुस्तान से बाहर निकाला जा सकता है। 22 फरवरी को घोषित जनता कर्फ्यु में योगदान के लिए जरूरी है कि लोग उस दिन घर में रहने के लिए जरूरी चीजों का सावधानी से भंडारण कर लें वरना बाहर निकलने का कोई न कोई बहाना निकलने में देर नहीं लगेगा।

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English summary
Suppose, if the person passing in front of you or standing near you is infected with coronavirus, and you stand near him and start talking and join hands with him, then not only you, your whole family is 100% vulnerable to coronavirus, Because your conservative mindset is treating a person with a mask face as corona infected, whereas a person who is not wearing a mask is more susceptible to infection Received are.
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