मुंबई में प्रेसिडेंट मेडल विजेता पुलिस अफसर की हत्या, दिल्ली में हमले
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) विलास जोशी कल यानी रविवार तक मुंबई पुलिस में सीनियर इंस्पेक्टर थे। बदमाश उनसे कांपते थे। बेहद ईमानदार शख्स। उन्हें बेहतरीन सेवा के लिए प्रेसिडेंट मेडल मिला था।

पर रविवार को उनकी उनके ही साथी अस्सिटेंट इंस्पेक्टर ने हत्या कर दी। जोशी मुंबई के पत्रकारों के बीच खासे लोकप्रिय़ थे। इस बीच, दिल्ली में भी पुलिस वालों पर बदमाश लगातार हमले कर रहे हैं।
मुलाकात हुई थी
मुंबई की वरिष्ठ पत्रकार पूनम शुक्ला से उनकी सिर्फ 4 दिन पहले ही मुलाकात हुई थी। तब जोशी ने अपने प्रेसिडेन्ट मेडल की बात कही और गर्व से उस फोटोग्राफ की तरफ इशारा किया जो केबिन में लगी हुई थी।
पत्रकार बिरादरी सन्न
ये घटना मुंबई के वकोला पुलिस स्टेशन की है। इस घटना ने मुंबई के पत्रकारों को झकझोर कर रख दिया। पूनम शुक्ला कहती हैं कि ये एक साधारण घटना नहीं है बल्कि प्रशासन के लिए चेतावनी है। हम सबके लिए सोचने की बात है क्योंकि खाकी में छिपे इंसान को भी हमारी जरूरत है। हमारी संवेदना की।
मौत के शिकार
सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए वे बताती हैं कि हर साल करीब पौने तीन हजार से अधिक सिपाही पुलिस कर्मी सर्विस के दौरान प्राकृतिक मौत के शिकार होते हैं। आप चौंकिए नहीं यह जान कर की हर साल तनाव से 235 पुलिसवाले आत्महत्या कर लेते हैं ? सिर्फ महाराष्ट्र में बीते साल 40 पुलिसवालों ने ख़ुदकुशी की।
ठुल्ला या मामू
आप ठुल्ला और मामू का मजाक करने के पहले यह भी जान लें की हर साल सैकड़ों से अधिक मामू और ठुल्ले आपकी जान बचाने के लिए अपने आप को शहीद कर देते हैं और हजारों से अधिक घायल हो जाते हैं।
सिर्फ पिछले पांच साल में सरकार कितनी बदली वह तो नहीं जानते पर यह जान लें की 4000 पुलिस वाले अपनी जान पर खेल गए थे। पिछले पांच साल में 10000 सिपाही आपके पत्थरों , हिंसक भीड़ और जनांदोलन में घायल हुए और 80 से ज्यादा लोगों ने उग्र भीड़ के सामने अपनी जान गँवा दी।
बता दें कि दिल्ली में भी लगातार पुलिस वालों पर हमले हो रहे हैं। क्या कोई इस तरफ सोचेगा। विलास जोशी की मौत के कारणों को जानने की जरूरत है। ये सामान्य मौत नहीं है।












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