दर्शन पत्रिका में छपी सावरकर की तस्वीर, बताया बापू के बराबर, मचा बवाल

नई दिल्ली, 17 जुलाई। हिंदी पत्रिका गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति अंतिम जन में सावरकर की तस्वीर को पत्रिका की मुख्त तस्वीर बनाया गया है। महात्मा गांधी की स्मृति में बनी राष्ट्रीय स्मारक एवं म्यूजियम ने इस पत्रिका के खास अंक को इस महीने छापा है जिसे हिंदू नेता विनायक दामोदर सावरकर को समर्पित किया गया है। पत्रिका में गांधी जी की धार्मिक सहिष्णुता, सावरकार का हिंदुत्व, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सावरकर को लेकर विचार को पत्रिका के इस अंक में शामिल किया गया है। पत्रिका ने जिस तरह से सावरकार की तस्वीर को मुखपत्र में छापा है उसको लेकर विपक्ष निशाना साध रहा है।

savarkar

पत्रिकार के वाइस चेयरमैन विजय गोयल ने बताया कि मैग्जीन की थीम सावरकर जी को समर्पित है, 29 मई को वीर सावरकर का जन्म वर्ष है, वह एक महान व्यक्ति थे। गांधी जी और पटेल भी महान व्यक्ति थे। हमे उनके बलिदान से सीखने की जरूरत है। किसी ने भी जेल में उतना समय नहीं बिताया है जितना सावरकर ने ब्रिटिश काल में बिताया था। वहीं सावरकर को लेकर जुड़े विवाद पर गोयल ने कहा कि यह मामला हमेशा उठाया जाता है कि सावरकर ने अंग्रेजों से माफी मांगी थी, ये सवाल वो लोग उठाते हैं जिन्होंने कोई बलिदान नहीं किया है।

गोयल ने कहा कि पत्रिकार विशेष अंक छापती रहेगी, उन महान स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित करती रहेगी। अगस्त महीने में पत्रिका की थीम आजादी का अमृत महोत्सव पर होगा, जब देश की आजादी के 75 साल पूरे हो रहे हैं। बता दें कि पत्रिका के अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। गौर करने वाली बात है कि गांधी दर्शन मेमोरियल राजघाट पर स्थित है। मैग्जीन की थीम पर गांधी जी के पड़पोते तुषार गांधी ने कहा कि यह हास्यास्पद है। यह दर्शाता है कि ये लोग गांधी जी की तुलना सावरकर से करना चाहते हैं और उनके समतुल्य खड़ा करना चाहते हैँ। यह सुनियोजित रणनीति है, गांधी जी की विचारधारा पर नियंत्रण करने की, एक नई विचारधारा को आगे बढ़ाने की।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार अन्य संस्थानों की तरह गांधी स्मृति को भी पलट देना चाहती है। सावरकर को शेर की तरह दिखाया जा रहा है। यह आरएसएस का एजेंडा है। लेकिन इतिहास इस बात को दर्शाता है कि ब्रिटिश साम्राज्यवाद की ओर सावरकर का क्या रुख था। मौजूदा सरकार को खुश करने के लिए देश के इतिहास से छेड़छाड़ की जा रही है ,जोकि दुर्भाग्यपूर्ण है।

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