दुनिया के सबसे मशहूर रिफ्यूजी दलाई लामा और फ्रांस के नए राष्ट्रपति का क्या है कनेक्शन?

इमैनुएल मैक्रों फ्रांस के नए राष्ट्रपति हैं और उनके चुनाव जीतने के बाद भारत में शरणार्थी के तौर पर रह रहे तिब्बती गुरु दलाई लामा बहुत खुश हुए। जानिए वजह?

शिमला। तिब्बतियों के अध्यात्मिक नेता दलाई लामा फ्रांस के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को चुनाव जीतने पर बधाई दी है। लेकिन इस बधाई के पीछे भी एक बड़ी वजह है जो दलाई लामा को नए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को जोड़ता है। इमैनुएल मैक्रों के राष्ट्रपति बनने के बाद दलाई लामा को बहुत खुशी हुई और इस खुशी में उन्होंने चिट्ठी लिखकर मैक्रों को हर्ष संदेश भेजा। अगली स्लाइड में जानिए इसकी वजह।

दलाई लामा- मैक्रों का कनेक्शन?

दलाई लामा- मैक्रों का कनेक्शन?

दक्षिणपंथी मरीन ली पेन को उदार मध्यमार्गी इमैनुएल मैक्रों ने लगभग 65.1 प्रतिशत के भारी मतों से पराजित किया। इमैनुएल मैक्रों शरणार्थियों के प्रति उदार नीतियों के समर्थक हैं। उन्होंने चुनाव अभियान के दौरान जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल की ओपन डोर रिफ्यूजी पॉलिसी का समर्थन किया। इमैनुएल ने चुनाव के दौरान वादा किया था कि शरणार्थियों को आश्रय देने के लिए किए गए आवेदन को प्राथमिकता देते हुए छह महीने के अंदर निपटाया जाएगा। जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी मरीन ली पेन शरणार्थियों को लेकर कड़ी नीतियों की समर्थक थीं।

इमैनुएल मैक्रों का कहना है कि फ्रांस ऐसे शरणार्थियों का स्वागत करेगा जिनको सुरक्षा की जरूरत होगी लेकिन अन्य प्रकार के शरणार्थियों को तुरंत उनके देश भेज दिया जाएगा। दलाई लामा भी भारत में राजनीतिक शरण लेकर शरणार्थी का जीवन जी रहे हैं। वे इमैनुएल मैक्रों के शरणार्थियों के प्रति उदार नीतियों की वजह से उनसे प्रभावित हैं। यही वजह है कि मैक्रों के फ्रांस का राष्ट्रपति बनते ही उनको खुशी हुई और उनको बधाई संदेश भेजा।

बधाई संदेश में दलाई लामा ने क्या कहा?

बधाई संदेश में दलाई लामा ने क्या कहा?

दलाई लामा कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि दलाई लामा ने चुनाव जीतने पर इमैुनएल मैंक्रों को पत्र भेजते हुये 2016 के दौरान अपनी फ्रांस यात्रा के दौरान उनसे हुई मुलाकात को याद करते हुये लिखा है कि सितंबर 2016 के दौरान मैं अपनी फ्रांस यात्रा के दौरान आपसे मिला था। पेरिस में हुई हमारी मुलाकात ऐतिहासिक थी। इस दौरान आपने जो विचार रखे थे, वह आज भी मुझे याद आ रहे हैं।

'आपकी तरह मैं भी यूरोपियन यूनियन का कट्टर समर्थक हूं

'आपकी तरह मैं भी यूरोपियन यूनियन का कट्टर समर्थक हूं"

दलाई लामा ने लिखा कि तिब्बतियों के प्रति फ्रांस के नागरिकों का हमेशा ही सकारात्मक दृष्टिकोण रहा है जिसका अहसास मुझे भी होता आया है। लिहाजा आप भी जानते हैं कि मैं आपकी विचारधारा की तरह यूरोपियन यूनियन का कट्टर सर्मथक हूं। हमें लोगों को भेदभाव की दीवारों में नहीं बांटना चाहिये। लिहाजा मेरा विशवास है कि आपके कुशल मार्गदर्शन में यूरोपियन यूनियन को नई मजबूती मिलेगी। यह मॉडल दुनिया के दूसरे देशों के लिये प्रेरक बनेगा।

'आपका चुनाव जीतना ऐतिहासिक घटना है'

'आपका चुनाव जीतना ऐतिहासिक घटना है'

दलाई लामा ने कहा कि फ्रांस यूरोपियन यूनियन का मजबूत स्तंभ है। आपके चुनाव जीतने पर बधाई व मेरा विश्वास है कि आने वाले दिनों में आप यूरोपियन यूनियन को मजबूत करने के साथ साथ फ्रांस को भी नई दिशा देंगे। मेरी ईश्वर से कामना है कि आपके देश में सुख-समृद्धि का महौल बने। इस बीच तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री लोबसंग सांगये ने भी इमैनुएल मैक्रों को निवार्सित सरकार व तिब्बतियों की ओर से बधाई संदेश भेजा है। कहा कि एन मार्श अदोलन को फ्रांस की जनता का सर्मथन व आपका चुनाव जीतना एक ऐतिहासिक घटना है।

मैक्रों ने राष्ट्रपति बनकर रचा इतिहास

मैक्रों ने राष्ट्रपति बनकर रचा इतिहास

39 वर्ष के इमैनुएल मैक्रों अब फ्रांस के नए राष्ट्रपति हैं और सबसे कम उम्र में फ्रांस के राष्ट्रपति बनकर उन्होंने एक नया इतिहास रच दिया है। मैक्रों ने इन चुनावों में एक राइटविंगर मैरीन ले पेन को शिकस्त दी है। मैक्रों को यूरोप और यूरोपियन यूनियन का बड़ा समर्थक माना जाता है। पिछले वर्ष मैक्रों ने अपना एक राजनीतिक आंदोलन शुरू किया। इसका नाम था एन मार्श या फिर इन मोशन कहा गया। इस आंदोलन के साथ ही उन्होंने होलांद की समाजवादी सरकार को बाय-बाय कर दिया था।

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