महाराष्ट्र में कांग्रेस उम्मीदवारों के नाम तय करने में भाजपा-शिवसेना है अड़चन ? जानिए क्यों
नई दिल्ली- महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना के बीच गठबंधन का पेंच अभी भी फंसा हुआ है। इसमें दिक्कत इसलिए आ रही है कि शिवसेना ज्यादा से ज्यादा सीटें लेने के दबाव बनाए हुए है, जबकि बीजेपी उसे उतनी ढील देने के लिए तैयार नहीं हो रही है। लेकिन, सत्ताधारी गठबंधन के बीच तालमेल में हो रही देरी ने कांग्रेस को बेचैनी भी बढ़ा रखी है। दरअसल, जानकारी ये मिल रही है कि उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करने से पहले पार्टी बीजेपी-शिवसेना के उम्मीदवारों की लिस्ट देख लेना चाहती है। जानकारी मिल रही है कि उसकी नजरें बीजेपी-शिवसेना के उन बागियों पर टिकी हैं, जो सत्ताधारी गठबंधन से टिकट हासिल करने में नाकाम रह जाएंगे। कांग्रेस के मैनेजरों को लगता है कि भाजपा-शिवसेना के ऐसे बागी उसके लिए ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं।

भाजपा के बागियों पर दांव लगाना चाहती है कांग्रेस!
कांग्रेस की महाराष्ट्र स्क्रीनिंग कमिटी इन दिनों दिल्ली में पार्टी उम्मीदवारें की लिस्ट फाइनल करने में जुटी हुई है। उसने लगभग 50 नामों की सूची तैयार भी कर ली है और 70 सीटों पर फैसला करने के लिए बैठकें हो रही हैं। लेकिन, माना जा रहा है कि वे लिस्ट तबतक जारी नहीं करना चाहती है जब तक भारतीय जनता पार्टी कोई फैसला नहीं ले लेती। माना जा रहा है कि कांग्रेस अपनी पहली लिस्ट विरोधी बीजेपी को चुनौती देने के लिए रोके रखना चाहती है। इसलिए पार्टी ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन को लेकर किसी अंतिम निर्णय होने तक इंतजार करने के मूड में दिख रही है। पार्टी के रणनीतिकारों को लगता है कि जैसे ही बीजेपी-शिवसेना गठबंधन का ऐलान होगा, कई उम्मीदवारों को पत्ता कट जाएगा और वे बगावत करने में देर नहीं लगाएंगे। कहा जा रहा है कि कांग्रेस इस बार ऐसे बागियों पर है दांव लगाना चाहती है।

इन वजहों से भी घोषणा में देरी!
इसके अलावा भी कई वजहें हैं, जिनके चलते नाम तय हो जाने के बाद भी कांग्रेस पार्टी उम्मीदवारों की लिस्ट जारी नहीं करना चाहती। इसकी एक बड़ी वजह तो ये है कि वह अपने सहयोगी एनसीपी को थोड़ा भी नाराज नहीं करना चाहती। क्योंकि, शरद पवार की पार्टी एनसीपी हर जिले से कम से कम दो सीटें दिए जाने की मांग पर अड़ी हुई है। एक जानकारी ये भी है कि पितृपक्ष (या श्राद्ध) की वजह से भी पार्टी कोई बड़ा ऐलान नहीं करना चाहती। खासकर जो लिस्ट तैयार हो गई है, उसमें तो इसी वजह से देरी होने की बात की जा रही है। सूत्रों की मानें तो जो जीतने लायक उम्मीदवार पार्टी की पहली पसंद हैं, उन्हें टिकट दिए जाने की जानकारी पहले ही दी जा चुकी है सिर्फ औपचारिक घोषणा को टाला जा रहा है।

भाजपा-शिवसेना में सीटों को लेकर फंसी है पेंच
वैसे अगर कांग्रेस बीजेपी-शिवसेना के बीच सीट बंटवारे का इंतजार कर रही है तो यह मामला फिलहाल तो लंबा ही खिंचता दिख रहा है। क्योंकि, बताया जा रहा है कि दोनों पार्टियों के बीच सहमति नहीं बन पाने के चलते भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का गुरुवार को होने वाला मुंबई दौरा भी कैंसिल कर दिया गया है। पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि शाह ही सीट बंटवारे के फॉर्मूले को अंतिम शक्ल देंगे और वही इसका ऐलान करेंगे। इस मसले पर दोनों दलों के बीच गतिरोध का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शिवसेना नेता संजय राउत ने राज्य के 288 सीटों के बंटवारे को भारत-पाकिस्तान के बंटवारे से भी भयंकर बता दिया था।

पिछले चुनावों में क्या हुआ?
288 विधानसभा वाले महाराष्ट्र में 2014 के चुनाव में बीजेपी ने 122 और शिवसेना ने अलग चुनाव लड़कर 63 सीटें जीती थीं। वहीं कांग्रेस को 42 और एनसीपी को 41 सीटें मिली थीं। वहीं इस साल के लोकसभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना साथ मिलकर चुनाव लड़ीं और राज्य की 48 सीटों में से 23 पर बीजेपी और 18 पर शिवसेना जीती थी। वहीं कांग्रेस के सिर्फ 1 और एनसीपी के 4 उम्मीदवार चुनाव जीते थे।












Click it and Unblock the Notifications