यूपी में बीजेपी को हराने के लिए कांग्रेस ने यूं बिछाया है मायाजाल

नई दिल्ली- कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने चुनाव की शुरुआत में कहा था कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस फ्रंट फुट पर खेलेगी। फरवरी और मार्च तक ऐसा लगा भी कि पार्टी यूपी में आक्रामक चुनाव अभियान में उतर रही है। लेकिन, जैसे-जैसे चुनाव होने शुरू हो चुके हैं, अब लगता है कि पार्टी बहुत ही चतुराई के साथ अपने कदम आगे बढ़ा रही है। जहां उसे जीत की संभावना बिल्कुल नजर नहीं आ रही है, वहां पर वो एसपी-बीएसपी महागठबंधन को अपनी रणनीति से फायदा पहुंचाने की कोशिश में जुट चुकी है। उसका एकमात्र मकसद है, बीजेपी को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाना। राज्य के लिए पार्टी ने 80 में से 64 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं। लेकिन, अगर मोटे तौर पर देखें, तो उनमें से 26 सीटों पर उसने जीत की उम्मीद छोड़कर किसी न किसी तरह से सपा-बसपा महागठबंधन के फायदे के लिए ही जाल बिछाई। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक पार्टी के एक नेता ने माना भी है कि इसमें कुछ भी नया नहीं है और पार्टी प्रदेश की सिर्फ 22 लोकसभा सीटों पर ही अपने लिए फोकस कर रही है, बाकी सीटें महागठबंधन के लिए रणनीतिक तौर पर छोड़ने की योजना बना चुकी है। इसलिए, बुआ और बबुआ अब कांग्रेस पर निशाना साध रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के निशाने पर बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही रह गए हैं।

महागठबंधन को ऐसे फायदा पहुंचा रही है

महागठबंधन को ऐसे फायदा पहुंचा रही है

कांग्रेस यूपी में भाजपा को हराने के लिए जिस रणनीति पर काम कर रही है, उसकी झलक शनिवार को जारी की गई कांग्रेस के 9 उम्मीदवारों की लिस्ट देखने से भी मिलती है, जिसमें 5 ऐसे नाम हैं, जो सीधे-सीधे बसपा-सपा के उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के लिए उतारे गए हैं। पार्टी कम से कम प्रदेश की जिन 26 सीटों पर महागठबंधन की अघोषित मदद कर रही है, उनमें से 11 पश्चिमी यूपी में, 11 पूर्वांचल में और 4 अवध इलाके में हैं। यहां कांग्रेस उम्मीदवारों का मूल मकसद बीजेपी के वोट को बांटकर महागठबंधन के उम्मीदवारों की राह को आसान बनाना है। पार्टी ने इन सीटों में से कुछ पर आखिरी वक्त में प्रत्याशियों के नाम भी बदल दिए हैं, ताकि गठबंधन को किसी तरह का नुकसान न उठाना पड़े। उदाहरण के लिए पूर्वांचल की गाजीपुर सीट को ही ले लेते हैं। यहां यादवों की जनसंख्या के मद्देनजर आजमगढ़ के पूर्व सांसद रमाकांत यादव अपने लिए टिकट मांग रहे थे। वे हाल ही में बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में आए हैं। लेकिन, दो कारणों से कांग्रेस लीडरशिप ने उन्हें किसी और सीट चुनने के लिए कह दिया है। पार्टी किसी भी सूरत में बीएसपी उम्मीदवार और जेल में बंद माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के भाई अफजल अंसारी के लिए परेशानी खड़ी नहीं करना चाहती है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक इससे ये भी खतरा पैदा हो सकता है कि गाजीपुर में यादव उम्मीदवार को देखकर पूर्वांचल में मुस्लिम मतदाता नाराज हो जाएं।

कुशवाहा वोट बैंक में सेंध लगाने की चाल

कुशवाहा वोट बैंक में सेंध लगाने की चाल

गाजीपुर में कांग्रेस ने रमाकांत यादव को निराश कर अजीत कुशवाहा को टिकट दिया है, जो स्थानीय जातीय समीकरण में अफजल अंसारी को फायदा पहुंचा सकते हैं। स्थानीय कांग्रेस नेता का कहना है कि कुशवाहा को जो भी वोट मिलेंगे, उससे बीजेपी को ही नुकसान होगा। क्योंकि, गाजीपुर में कुशवाहा मतदाता बीजेपी के साथ बताए जाते हैं। इसी तरह कांग्रेस ने झांसी से शिव सरन कुशवाहा और चंदौली से शिव कन्या कुशवाहा को टिकट दिया है। ये दोनों उम्मीदवार जितना भी कुशवाहा वोट काटेंगे, उससे महागठबंधन के उम्मीदवारों को ही फायदा मिलेगा। ऐसे ही अंबेडकर नगर में कांग्रेस ने पूर्व दस्यु फूलन देवी के पति उम्मेद सिंह निषाद को टिकट देकर सपा-बसपा के प्रत्याशी की परोक्ष रूप से मदद करने की कोशिश की है। कांग्रेस के स्थानीय सूत्रों की मानें तो निषाद या तो बीजेपी को वोट देते हैं या अपनी जाति को ही वोट देते हैं। ऐसे में बीजेपी के उम्मीदवार का खेल बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है।

ब्राह्मण वोट बांटने की रणनीति

ब्राह्मण वोट बांटने की रणनीति

सलेमपुर, जौनपुर और मथुरा लोकसभा सीटों पर कांग्रेस ने ब्राह्मण उम्मीदवारों पर दांव लगाया है। पार्टी को लगता है कि उसके उम्मीदवार भले ही न जीतें, लेकिन वे न केवल उसका वोट बैंक बढ़ाएंगे, बल्कि बीजेपी उम्मीदवारों के वोट बैंक में सेंध लगाकर महागठबंधन के उम्मीदवारों की मदद भी करेंगे। कांग्रेस ने पूर्व सांसद राजेश मिश्रा को सलेमपुर, देव्रत मिश्रा को जौनपुर और महेश पाठक को मथुरा से अपना उम्मीदवार बनाया है। चर्चा है कि कांग्रेस गोरखपुर सीट पर भी ब्राह्मण प्रत्याशी उतारने की योजना बना रही है। ऐसे ही लालगंज सुरक्षित सीट पर कांग्रेस ने मौजूदा भाजपा सांसद नीलम सोनकर के खिलाफ पंकज मोहन सोनकर को उम्मीदवार बनाया है। सोनकर पासी जाति की एक उपजाति है और इस क्षेत्र में उनकी अच्छी-खासी आबादी है। जाहिर है कि दो सोनकर उम्मीदवार होने से यहां भी फायदा महागठबंधन के उम्मीदवार को ही मिलने की संभावना है।

पहले चरण में भी कांग्रेस ने गाजियाबाद सीट पर भी स्थानीय ब्राह्मण डॉली शर्मा को उम्मीदवार बनाया था, जिसके चलते समय रहते ही सपा ने अपना उम्मीदवार बदल लिया। सूत्रों के मुताबिक पहले फेज में पार्टी ने मेरठ से हरेंद्र अग्रवाल, कैराना से हरेंद्र मलिक और गौतम बुद्ध नगर से अरविंद सिंह को भी इसी मकसद से मैदान में उतारा था, ताकि बीजेपी का वोट बंट जाय और एसपी-बीएसपी को फायदा मिल जाए।

कांग्रेस की उम्मीद वाली सीटों पर प्रियंका का फोकस

कांग्रेस की उम्मीद वाली सीटों पर प्रियंका का फोकस

कांग्रेस के अंदर से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक अब पूर्वी यूपी की प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के चुनाव प्रचार का फोकस मुख्य रूप से उन्हीं सीटों पर रहेगा, जहां पार्टी खुद को मैदान में मानती है या जहां से उसे जीत की संभावना नजर आ रही है। इनमे मोटे तौर पर पश्चिमी यूपी की 8, अवध की 11 और पूर्वांचल की 5 सीटों पर पार्टी अपने लिए बेहतर चांस देखती है। इनमें से अधिकतर सीटें वे हैं, जहां या तो कांग्रेस पहले जीत चुकी है या उसने वहां ऐसे लोगों को टिकट दिए हैं, जो पहले वहां से कामयाब हो चुके हैं। प्रियंका का मेन फोकस ऐसी ही सीटों पर रहेगा, जहां से वो पार्टी के लिए हवा बना सकती हैं।

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