Caste census का समर्थन कर फंस गई कांग्रेस? कर्नाटक सरकार पर रिपोर्ट सार्वजनिक करने का बढ़ा दबाव

कांग्रेस बिहार में जातीय जनगणना की रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर तो गदगद है, लेकिन कर्नाटक में ऐसी ही एक रिपोर्ट अब उसपर भारी पड़ रही है। कर्नाटक सरकार पर भी अब राज्य के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक जनगणना की रिपोर्ट सार्वजनिक करने का दबाव बढ़ने लगा है,जो 'जातीय जनगणना' के रूप में चर्चित रही है।

कांग्रेस की सिद्दारमैया सरकार के लिए मुश्किल ये है कि ये रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग पार्टी के अंदर से ही उठने लगी है। दिलचस्प बात ये है कि यह सर्वे भी 2015 में तत्कालीन सिद्दारमैया सरकार ने ही 170 करोड़ रुपए खर्च करके करवाई थी, लेकिन वह रिपोर्ट अबतक लटका कर रखी गई है।

caste census in karnataka

रिपोर्ट जारी करने से परहेज क्यों?
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि कर्नाटक की विभिन्न सरकारों ने इसे हाथ लगाने से इसलिए परहेज किया है, क्योंकि इसके नतीजे राज्य की सियासी गणित को बिगाड़ सकते हैं। मसलन, कहा जाता है कि इस रिपोर्ट के जारी होने के बाद कुछ समुदायों की आबादी को लेकर जो एक घारणा बनी हुई, वह टूट सकती है। इसमें राजनीतिक रूप से सबसे प्रभावी लिंगायतों और वोक्कालिगा समुदायों का भी नाम लिया जाता है।

कांग्रेस नेता ने ही की रिपोर्ट जल्द सार्वजनिक करने की मांग
अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमो लालू यादव की तारीफ करते हुए अपनी ही सरकार से जातिगत जनगणना के आंकडे़ जल्द से जल्द जारी करने की मांग कर दी है।

राहुल गांधी की इच्छा का दिया हवाला
उन्होंने कहा है, 'जातिगत जनणना काफी समय से लंबित मांग है, जिससे विभिन्न समुदायों को वह अधिकार पाने में मदद मिलेगी, जिसके वे हकदार हैं। ' यही नहीं उन्होंने ये भी कहा है कि 'हमारे शीर्ष नेता राहुल गांधी की यह लंबे समय से इच्छा रही है कि राज्य और देश दोनों जगहों पर जातिगत जनगणना हो और उसके आधार पर जनगणना कार्यक्रम बनाए जाएं। इसे अमलीजामा पहनाने के लिए कंठराज आयोग की जो रिपोर्ट है, उसे सार्वजनिक करना होगा....' इस जातीय जनगणना की जिम्मेदारी राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष एच कंठराज की अगुवाई वाली टीम को दी गई थी।

उन्होंने कहा है कि अगर रिपोर्ट में किसी तरह की कुछ खामियां हैं तो उसे ठीक करके लागू करने की जरूरत है। उन्होंने कहा है कि इसपर 170 करोड़ रपए खर्च हुए हैं। अगर पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार ने लागू नहीं किया तो अब हमारी अपनी सरकार है, इसलिए इसे सार्वजनिक किया जाए और फिर दोनों सदनों में चर्चा करके सरकार इसे लागू करने का फैसला करे।

'तकनीकी दिक्कत' बताकर रोकी गई थी रिपोर्ट
इससे पहले बीजेपी सरकार में सामाजिक कल्याण और पिछड़ा कल्याण मंत्री रहे कोटा श्रीनिवास पुजारी ने कहा था कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य-सचिव ने फाइल रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं किए थे और इसी को रिपोर्ट नहीं जारी हो पाने की 'तकनीकी दिक्कत' बताई थी।

अगले महीने तक सौंपी जा सकती है रिपोर्ट
वैसे कर्नाटक के मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष जे जयप्रकाश हेगड़े ने मंगलवार को कहा है कि यह रिपोर्ट अगले महीने तक सरकार को सौंपी जा सकती है। उन्होंने कहा, 'एक तकनीकी दिक्कत थी, जो रिपोर्ट पहले तैयार की गई थी, वह बिना सदस्य-सचिव के हस्ताक्षर के थी......अब ये हमारे पास है, हम इसे आखिरी रूप दे रहे हैं। हम इसके सरकार को सौंपेंगे....अगले महीने तक। '

सिद्दारमैया ने कुमारस्वामी पर फोड़ा ठीकरा
इस बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने कहा है कि जब एक बार रिपोर्ट उन्हें मिल जाएगी तो सरकार इसपर फैसला करेगी। उन्होंने कहा, 'जनगणना का आदेश देने के बाद मैंने कंठराज की अगुवाई वाले पिछड़ा वर्ग आयोग को एक रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी। हमारी सरकार का कार्यकाल पूरा होने तक यह रिपोर्ट तैयार नहीं हुई थी......उसके बाद एचडी कुमारस्वामी की अगुवाई वाली गठबंधन (कांग्रेस-जेडीएस) सरकार सत्ता में आई, उन्होंने रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया, बाद में कंठराज का कार्यकाल भी खत्म हो गया।'

अभी के पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष जयप्रकाश हेगड़े की नियुक्ति बीजेपी सरकार के कार्यकाल में हुई थी। उनके बारे में सीएम ने कहा, 'अगर वे रिपोर्ट सौंपते हैं, तब देखिए.....मैंने एकबार उनसे (हेगड़े से) पूछा था, उन्होंने कहा था कि सौप देंगे, लेकिन यह अभी तक हमारे पास नहीं आई है।' (इनपुट-पीटीआई)

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