कांग्रेस के स्पेशल-16: क्षत्रपों के जरिए भाजपा को घेरने के तैयारी में मल्लिकार्जुन खड़गे, पढ़िए Inside Story
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने घोषणा की कि पुनर्गठित कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की पहली बैठक इस महीने के अंत में हैदराबाद में होगी। बता दें कि तेलंगाना में इस साल के अंत तक चुनाव होने हैं। ऐसे में इस बैठक को हैदराबाद रखा जाने एक रणनीति की हिस्सा माना जा रहा है।
हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) में फेरबदल करते हुए इसमें राज्य स्तर के कई नेताओं को शामिल किया। समिति में 90 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा एके एंटनी, जनार्दन द्विवेदी और एम वीरप्पा मोइली जैसे दिग्गजों को हटा दिया है।

सीईसी का नेतृत्व कांग्रेस अध्यक्ष करते हैं। जो लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के उम्मीदवारों का चयन करता है। नई गठित कांग्रेस कार्य समिति को लेकर ऐसा माना जा रहा है कि, वह क्षत्रपों के जरिए मोदी को टक्कर देने के मूड में है। इसलिए दिग्गजों की जगह कई राज्य स्तर के नेताओं को शामिल किया है।
पिछली सीईसी के सदस्यों में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह, राहुल गांधी, एंटनी, अंबिका सोनी, गिरिजा व्यास, द्विवेदी, मोइली, मुकुल वासनिक और मोहसिना किदवई के अलावा महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल थे। गांधी, सोनी और वेणुगोपाल को छोड़कर सभी को नव गठित सीईसी से हटा दिया गया है।
16 सदस्यीय सीईसी के नए सदस्यों में लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, सलमान खुर्शीद, मधुसूदन मिस्त्री, एन उत्तम कुमार रेड्डी, छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव, कर्नाटक के मंत्री केजे जॉर्ज, उत्तराखंड के पूर्व कांग्रेस प्रमुख प्रीतम सिंह शामिल हैं। किशनगंज सांसद मोहम्मद जावेद, राज्यसभा सांसद अमी याजनिक, पीएल पुनिया और मध्य प्रदेश के विधायक ओमकार मरकाम को शामिल किया गया है।
सीईसी में शामिल होना रेड्डी, देव, जॉर्ज, सिंह, जावेद, याज्ञनिक और मरकाम जैसे कांग्रेस नेताओं के लिए एक बड़ी पदोन्नति है। जो अब हाई पावर वाले पैनल के सदस्यों के रूप में पार्टी के शीर्ष पटल पर होंगे। मिस्त्री कांग्रेस केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के प्रमुख थे। जिसने पिछले साल पार्टी के प्रेसीडेंट का चुनाव कराए था। पुनिया हाल तक छत्तीसगढ़ के एआईसीसी प्रभारी थे।
इससे पहले सोमवार को कांग्रेस नेतृत्व ने संकेत दिया कि वह तेलंगाना विधानसभा चुनावों के लिए एक आक्रामक प्रचार अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहा है। जिसकी पुष्टि इस बात होती है कि 16-17 सितंबर को पुनर्गठित सीडब्ल्यूसी की पहली बैठक हैदराबाद होगी। इसके बाद एक रैली होगी, जहां पार्टी पांच बड़े चुनावी वादों की घोषणा करते हुए अभियान की शुरुआत करेगी। जिसे वह "गारंटी" कहती है।
कांग्रेस का मानना है कि दो दिवसीय सीडब्ल्यूसी सत्र के बाद एक रैली और तेलंगाना की सभी 119 विधानसभा क्षेत्रों में एक "अभिनव यात्रा" होगी। चुनावों के लिए पार्टी के अभियान गति देगी। कांग्रेस के तीन दिन के कार्यक्रम की रणनीति इस बात अहम बनाती है कि, पार्टी तेलंगाना चुनावों को गंभीरता से ले रही है और के चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली बीआरएस सरकार को हटाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।












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