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Chunavi Kissa: अमेठी से जब संजय गांधी हारे थे अपना पहला चुनाव, करारी शिकस्त की यह बनी थी वजह?

Lok Sabha Election Chunavi Kissa: देश में होने वाले लोकसभा चुनाव 2024 के बीच आज एक और चुनावी किस्से में बात होगी इंदिरा गांधी के राजनीतिक उत्तराधिकारी संजय गांधी की। वो ही संजय गांधी, जिनके पास इमरजेंसी के वक्त पूरी पावर थी, लेकिन आखिस ऐसा क्या हुआ, जो वो 1977 में अपना पहला चुनाव हार गए।

दरअसल, 1975 में जब अदालत ने इंदिरा गांधी को अयोग्य सांसद घोषित किया गया, तो देश में इमरजेंसी लागू कर दी गई। करीब दो साल तक देश में आपातकाल रहा। इस दौरान नेताओं को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया।

Congress Sanjay Gandhi

कांग्रेस के खिलाफ था देश का माहौल

उस वक्त को लेकर कहा जाता है कि इमरजेंसी के वक्त पूरी पावर संजय गांधी के पास थी। ऐसे में देश में नसबंदी को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया, जिसके बाद देशभर में गांधी परिवार और कांग्रेस के खिलाफ माहौल बिगाड़ गया था।

कांग्रेस के सभी बड़े नेता हारे थे चुनाव

जिसका खामियाजा यह रहा कि इसी माहौल की बदौलत कांग्रेस के सबसे ताकतवर नेता संजय गांधी को अपने पहले ही चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा। यहां तक की उनरी मां इंदिरा गांधी सहित कांग्रेस के हर बड़े चेहरे को हार झेलनी पड़ी थी।

महिलाओं ने किया था विरोध

1977 के लोकसभा चुनाव के वक्त इंदिरा गांधी को संजय बताना चाह रहे थे कि वो अपनी मां की बगल की सीट अमेठी से चुनाव लड़ना चाहते हैं, लेकिन बार-बार फोन करने के बाद भी इंदिरा गांधी ने उनका फोन नहीं उठाया। इस दौरान जब संजय गांधी पहली दफा अमेठी में चुनाव प्रचार करने पहुंचे तो महिलाओं के एक समूह ने उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विरोध करने वाले ये वो महिलाएं थीं, जिनके पति नसबंदी की मुहिम के शिकार हुए थे।

75 हजार वोटों से हारे थे चुनाव

इमरजेंसी के साथ-साथ देश में जनता पार्टी की लहर के बीच 1977 का चुनाव कांग्रेस बुरी तरह से हारी। संजय गांधी भी अपना पहला चुनाव हार गए थे। हालांकि अमेठी के साथ ये गांधी परिवार का पहला रिश्ता था, जो हार से शुरू हुआ था। संजय गांधी को रवींद्र प्रताप सिंह ने करीब 75 हजार वोटों से हराया था।

1977 में हारे लेकिन 1980 में जीत की दर्ज

हालांकि 1977 से जो अमेठी से गांधी परिवार का रिश्ता चला वो लगातार जारी रहा और 1980 में फिर से चुनाव हुए, अबकी बार संजय गांधी जीत गए और सांसद भी बन गए, लेकिन कुछ ही समय बाद संजय की मौत हो गई और 1981 में उपचुनाव हुए, जिसमें राजीव गांधी अपने भाई की सीट से सांसद चुने गए।

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