BJP से एफिडेविट क्यों नहीं मांगा? चुनाव आयोग के 'सब समकक्ष' वाले बयान पर कांग्रेस का कड़ा पलटवार, लगाए आरोप
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'वोट चोरी' वाले आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई दी। आयोग ने स्पष्ट किया कि उसके लिए सभी राजनीतिक दल समान हैं और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जा रही है। लेकिन आयोग कि ये दलील कांग्रेस के गले नहीं उतरी। पार्टी ने एक बार फिर से गंभीर आरोप लगा दिए।
कांग्रेस ने राहुल गांधी का एक वीडियो शेयर करते हुए हमला बोला, जिसमें वह सवाल उठाते नजर आ रहे हैं कि जब बीजेपी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वही आंकड़े और डेटा पेश किया तो उनसे किसी तरह का एफिडेविट क्यों नहीं मांगा गया। राहुल ने कहा कि उन्हीं आंकड़ों को आधार बनाकर जब उन्होंने मुद्दा उठाया तो आयोग उनसे हलफनामा मांगा जा रहा है। पार्टी ने इसे दोहरे मानदंड बताते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए।

अखिलेश यादव ने भी वीडियो शेयर कर मांगा जवाब
इसके अलावा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी एक वीडियो शेयर कर आयोग पर सवाल उठाए हैं। यूपी के पूर्व सीएम ने एक्स पर लिखा, 'चुनाव आयोग को चुनौती देता एक भाजपाई का ये वीडियो चुनावी धांधली करनेवालों द्वारा दिया गया, एक जीता जागता एफिडेविट है, CEC इसका जवाब तो दे।
अखिलेश यादव ने भी वीडियो शेयर कर मांगा जवाब
'वोट चोरी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल संविधान का अपमान
कांग्रेस के सीनियर नेता राहुल गांधी के 'मतदान धोखाधड़ी' के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए, भारत के चुनाव आयोग ने कहा है कि 'वोट चोरी' जैसे 'अनुचित शब्दों' का इस्तेमाल संविधान का अपमान है। नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए भारत के मतदाताओं को निशाना बनाने के लिए एक लॉन्चपैड के रूप में किया जा रहा है। कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग मतदाताओं के साथ पूरी तरह खड़ा है।
'आयोग के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष में कोई अंतर नहीं'
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष में कोई अंतर नहीं है। उन्होंने कहा कि, 'हमारे लिए हर पार्टी एक समान है,' और कहा कि चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेगा।
कांग्रेस की 'मतदाता अधिकार यात्रा' के दिन आई आयोग की प्रतिक्रिया
चुनाव आयोग की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब राहुल गांधी ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर आयोग पर निशाना साधने के लिए 'मतदाता अधिकार यात्रा' शुरू की है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण, डेटाबेस में सुधार की राजनीतिक दलों की मांगों को पूरा करने के लिए शुरू किया गया है।
'आयोग के दरवाजे सभी के लिए समान रूप से खुले हैं'
कुमार ने कहा कि मसौदा मतदाता सूची पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए एक महीने का समय दिया गया है और उन्होंने राजनीतिक दलों से किसी भी त्रुटि को चिह्नित करने की अपील की। उन्होंने कहा, 'चुनाव आयोग के दरवाजे सभी के लिए समान रूप से खुले हैं।'
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि सभी मतदाता, राजनीतिक दल और बूथ स्तर के अधिकारी ज़मीनी स्तर पर पारदर्शिता से काम कर रहे हैं। 'यह चिंता का विषय है कि राजनीतिक दलों के इन प्रतिनिधियों की आवाज या तो उनके दलों के नेतृत्व तक नहीं पहुंच रही है, या गलत सूचना फैलाने के प्रयास में जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया जा रहा है।'
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, 'एक करोड़ से ज़्यादा अधिकारी, 10 लाख से ज़्यादा बूथ-स्तरीय एजेंट और 20 लाख से ज़्यादा मतदान एजेंट लोकसभा चुनाव में काम करते हैं। क्या कोई इतने सारे लोगों के सामने और इतनी पारदर्शी प्रक्रिया के बावजूद वोट चुरा सकता है? दोहरे मतदान के कुछ आरोप लगाए गए थे, लेकिन जब हमने सबूत मांगे, तो हमें कुछ नहीं मिला। ऐसे आरोपों से न तो चुनाव आयोग और न ही कोई मतदाता डरता है।'
राहुल गांधी ने भाजपा के साथ मिलीभगत का लगाया था आरोप
चुनाव आयोग का यह जवाब राहुल गांधी के उस तीखे हमले के बीच आया है जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग पर भाजपा के साथ मिलीभगत और चुनावी अनियमितताओं को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। इस महीने की शुरुआत में एक प्रेस वार्ता में गांधी ने पिछले साल लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में मतदान में धोखाधड़ी का आरोप लगाया था।












Click it and Unblock the Notifications