कर्नाटक में कांग्रेंस का नया बेंचमार्क सेट, 2024 में इन क्षेत्रों में दिखेगा बड़ा उलटफेर
कर्नाटक में कांग्रेस की सत्ता पर काबिज होने रणनीति भविष्य के चुनावों के लिए एक बड़े बदलाव की आहट है। कांग्रेस ने कर्नाटक में बड़ी सोची समझी रणनीति की परिचय दिया, जिसे अब भविष्य के चुनावों में पार्टी अपनी सकती है।

कर्नाटक में अगर कांग्रेस की जीत का विश्लेषण करें तो इसमें कई अहम क्षेत्रीय फैक्टर हावी रहे। राज्य के अलग- अलग रीजन में अपने अलग सियासी समीकरण हैं, जिसे कांग्रेस इस बार साधने में सफल रही। चुनाव आयोग की ओर जारी डेटा का पर गौर करें तो कांग्रेस पार्टी भाजपा से कित्तूर कर्नाटक या मुंबई-कर्नाटक क्षेत्र पर कब्जा करने में सक्षम रही है। यही नहीं कांग्रेस ने कल्याण कर्नाटक या हैदराबाद-कर्नाटक रीजन के अपने पुराने गढ़ को भी बनाए रखने में कामायबी हासिल की।
कांग्रेस ने कित्तूर कर्नाटक में 50 में से 33 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं 41 सीटों वाले मजबूत कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में से 26 पर कब्जा जमाया। कांग्रेस के इस प्रदर्शन के चलते वर्ष 2024 में होने वाले आम चुनाव लिए एक नया ट्रेंड सेट हुआ।
कित्तूर कर्नाटक
ये रीजन लिंगायत गढ़ माना जाता है। इस क्षेत्र में सात जिले शामिल हैं। जिनमें बेलगावी, धारवाड़, गडग, हावेरी, विजयपुरा, उत्तर कन्नड़ और बागलकोट जिले आते हैं। वर्ष 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां बीजेपी ने 30 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को 17 सीटें मिली थीं। लेकिन इस बार भाजपा से बगावत कर कांग्रेस में शामिल हुए जगदीश शेट्टार यहां की हुबली-धारवाड़ सीट खो बैठे। वे भाजपा के महेश तेंगिनाकाई से 34,289 मतों से हार गए। हालांकि कांग्रेस ने भाजपा से ये सीट छीनने के लिए पूरा दम लगा दिया था।
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वहीं अथानी सीट से पूर्व सीएम लक्ष्मण सावदी ने बीजेपी के महेश कुमथल्ली को 76,122 वोटों से हराया। शेट्टार और सावदी दोनों ने अप्रैल में ही कांग्रेस का दामन थामा था। इन दोनों नेताओं ने भाजपा से तब बगावत की जब उन्हें टिकट नहीं मिला।
कित्तूर कर्नाटक में बजरंग बली फैक्टर
कल्याण कर्नाटक में सात जिले शामिल हैं। ये जिले हैं- बीदर, कालाबुरागी, रायचूर, यादगीर, कोप्पल, बल्लारी और विजयनगर। पिछले चुनाव में इस क्षेत्र में कांग्रेस को 21 जबकि भाजपा को 15 सीटें मिली थीं। रायचूर, बल्लारी और कोप्पल जिलों में 15 आरक्षित सीटें हैं। यहां वाल्मीकि समुदाय के लोग अधिक हैं, जो अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी में आते हैं। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में युवा वीएचपी और बजरंग दल के सदस्य हैं। हालांकि ये क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ रहा है।
उम्मीद थी की बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की कांग्रेस की चुनावी घोषणा का असर यहां दिखेगा। कांग्रेस को बड़े नुकसान की अटकलें थीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पीएम मोदी ने अपनी चुनाव सभा बजरंग दल पर प्रतिबंध को बजरंगबली पर प्रतिबंध से जोड़नेकी कोशिश की लेकिन इसका भी असर नहीं दिखा।
कांग्रेस की कार्नाटक में मुस्लिम आरक्षण की बहाली भी एक बड़ा फैक्टर रही। यहां सभी कांग्रेस के 9 उम्मीदवार अपनी सीटें जीतने में कामयाब रहे। ऐसे में कर्नाटक चुनाव आगामी आम चुनाव में कांग्रेस के लिए नए बेंचमार्क साबित हो सकता है।
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