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महाराष्ट्र में 50-50 फार्मूले पर बनेगी कांग्रेस, एनसीपी और शिवेसना गठबंधन सरकार!

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बेंगलुरू। देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री पद के इस्तीफे के साथ महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन सरकार गठन का रास्ता साफ हो गया है। तीनों दलों ने महाराष्ट्र में सरकार गठन की तैयारियां भी शुरू कर दी है। महाराष्ट्र में दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले देवेंद्र फडणवीस सरकार की उल्टी गिनती तभी शुरू हो गई थी जब सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी-एनसीपी (अजित पवार) गठबंधन सरकार को सदन में बहुमत साबित करने के लिए 27 नवंबर शाम 5 बजे का आदेश दिया।

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बीजेपी-एनसीपी (अजीत पवार) गठबंधन सरकार को दूसरा झटका तब लगा जब डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने वाले अजित पवार ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद पूरी तरह से स्पष्ट हो गया कि 4 दिन पुरानी महाराष्ट्र सरकार का गिरना अब तय हो चुका है, लेकिन नई सरकार में अजित पवार की क्या भूमिका होगीं, इस पर तय होगा कि एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना सरकार गठन में कितना वक्त लगेगा।

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क्योंकि अजित पवार को बीजेपी से गठबंधन तोड़ने के लिए एनसीपी चीफ शरद पवार ने 50-50 फार्मूले का दांव खेला था और ऐसा माना जा रहा है कि अजित पवार की एनसीपी में दोबारा वापसी की पटकथा गठबंधन सरकार में रोटेशनल मुख्यमंत्री की शर्त पर हुई है। अगर यह सच है तो तीन दलों वाले गठबंधन सरकार में एक बार फिर रार तय है। शायद यही कारण है कि देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे के बाद शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने फिर दोहराया है कि महाराष्ट्र में पांच साल तक शिवसेना का ही सीएम होगा।

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गौरतलब है 23 नवंबर की सुबह 7 बजे देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर भारतीय राजनीति में भूचाल ला दिया था। अप्रत्याशित सी दिखने वाली बीजेपी-एनसीपी (अजित पवार) गठबंधन सरकार में अजित पवार ने डिप्टी सीएम की शपथ ली थी। महाराष्ट्र में तेजी से बदले घटनाक्रम से महाराष्ट्र में सरकार बनाने की जुगत में जुटी कांग्रेस और शिवसेना की चूलें हिल गईं।

कांग्रेस और शिवसेना ने खुद को ठगा हुआ महसूस किया। उन्हें लगा कि एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार का चक्रव्यूह था, लेकिन कुहांसा छंटा तो साफ हुआ कि महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार को सहयोग शरद पवार नहीं, बल्कि उनके भतीजे अजित पवार ने दिया है।

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मीडिया के सामने आए एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने साफ किया कि बीजेपी के साथ गठबंधन करके सरकार में शामिल हुए अजित पवार से एनसीपी को कोई लेना-देना नहीं है। एनसीपी चीफ और शिवसेना चीफ ने करीब 10 बजे प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर पार्टी की स्थिति साफ की और एनसीपी के टिकट पर जीत कर आए सभी विधायकों की मीडिया के सामने परेड करवाए।

हालांकि तब प्रेस कांफ्रेंस में एनसीपी के 4-5 विधायक गायब थे, जिन्हें वापस लाने के लिए एनसीपी चीफ ने दिग्गज एनसीपी नेताओं को लगा दिया। एनसीपी चीफ ने साथ ही अजित पवार को भी मनाने के लिए बड़े नेताओं को भेज दिया गया।

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महाराष्ट्र के सियासत के सूरमा कहे जाने वाले एनसीपी चीफ शरद पवार ने एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना के विधायकों की खरीद-फरोख्त से बचाने के लिए होटलों कैद करवा दिया। यहां तक कि विधायकों को घर फोन करने तक इजाजत नहीं दी गई। महाराष्ट्र में असंवैधानिक सरकार गठन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एनसीपी और शिवसेना की ओर वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनुसिंघवी द्वारा याचिका दायर की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को छुट्टी के दिन शिवसेना और कांग्रेस द्वारा याचिका की सुनवाई शुरू की और सोमवार को सभी पक्षों की तीखे दलीलों के सुनने के बाद मंगलवार तक के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया। शिवसेना और कांग्रेस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने बिना राष्ट्रपति शासन हटाए ही महाराष्ट्र में नए सरकार का शपथ ग्रहण करवा दिया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में दोनों दलों की आरोप गलत साबित हुए।

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क्योंकि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन भारत सरकार कार्य संचालन नियम 12 के तहत हटाया गया था, जो प्रधानमंत्री को आपातकाल स्थिति में ( इनमें सत्ता हस्तांतरण शामिल है) विशेषाधिकार प्रदान करता है। इस विशेषाधिकार की मदद से प्रधानमंत्री महज एक नोट के जरिए राष्ट्रपति को किसी भी प्रदेश में लागू राष्ट्रपति शासन को हटाने की सिफारिश कर सकता है।

महाराष्ट्र में असंवैधानिक तरीके से सरकार नहीं बनी थी। यह बात पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट में हुए जिरह से स्पष्ट हो चुका था। फिर क्या था कांग्रेस के वकील अभिषेक मनुसिंघवी और शिवसेना के वकील कपिल सिब्बल ने महाराष्ट्र सदन में तुरंत फ्लोर टेस्ट कराने की मांग उठा दी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुरक्षित रख लिया।

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एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस सरकार बनने से बेहद चिंतित थे। उनकी चिंता की वजह विधायकों की खऱीद-फरोख्त थी। यही कारण था कि तीनों दलों ने मिलकर मुंबई के हयात होटल में मिनी असेंबली सजाई और सामूहिक रूप से 162 विधायकों की एकजुटता का प्रदर्शन किया।

मंगलवार सुबह से ही राजनीतिक रूप से माहौल दिल्ली से लेकर मुंबई तक गर्म रहा। सुबह 11 बजे सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी-एनसीपी (अजीत पवार) गठबंधन सरकार को झटका देते हुए उन्हें 27 नवंबर शाम 5 बजे से पहले सदन में फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित करने का आदेश दिया।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से यह स्पष्ट हो गया कि बीजेपी और एनसीपी गठबंधन की सरकार के दिन पूरे हो चुके हैं, क्योंकि बीजेपी के पास 105 विधायक थे और 11 निर्दलीय विधायकों के समर्थन पत्र के अलावा कुछ नहीं था। एनसीपी के नाम पर उनके पास सिर्फ अजित पवार थे, जो कुल मिलाकर 117 थी, जो बहुमत से करीब 28 सीट दूर थी।

एनसीपी नेता अजित पवार के डिप्टी सीएम पद से इस्तीफे की खबर ने इसकी पुष्टि कर दी। अजित पवार के इस्तीफे के साथ ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे की खबरें भी तैरने लगी। वह वक्त भी आया और दोपहर करीब 3:30 बजे बुलाए प्रेस कांफ्रेंस में सामने आए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बहुमत नहीं होने का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी।

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थोड़ी ही देर में प्रेस कांफ्रेस से निकलकर देवेंद्र फडणवीस राजभवन पहुंचे और महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को अपना इस्तीफा सौंप दिया और करीब 4 दिन यानी 80 घंटे तक चले राजनीतिक घटनाक्रम का पटाक्षेप हो गया। हालांकि अभी महाराष्ट्र में राजनीतिक घटनाक्रम का ऊंट किस करवट बैठगा इस पर कुछ कहा नहीं जा सकता है, क्योंकि अजित पवार के एनसीपी में वापस लौटने की वास्तविक कहानी अभी पर्दे के अंदर ही है।

महाराष्ट्र: देवेंद्र फडणवीस ने 3 हफ्ते में दो-दो बार दिया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा

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English summary
NCP Chief Sharad Pawar played a 50-50 formula to break Ajit Pawar's alliance with BJP and it is believed that Ajit Pawar's return to NCP is scripted on the condition of rotational chief minister in the coalition government. If this is true, then in a coalition government consisting of three parties, the rar is set again. Perhaps this is why after the resignation of Devendra Fadnavis, Shiv Sena spokesperson Sanjay Raut has again reiterated that Shiv Sena will be the CM of Maharashtra for five years.
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