हिंदी भाषा पर शाह के बयान को अधीर रंजन ने बताया कल्चरल टेररिज्म, बोले-इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे
नई दिल्ली, 9 मार्च: गृहमंत्री अमित शाह के देश में हिंदी को अंग्रेजी के विकल्प मानने के लेकर दिए बयान का लगातार विरोध हो रहा है। पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने इसे कल्चरल टेररिज्म (सांस्कृतिक आतंकवाद) करार दिया है। शनिवार को शाह के बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषाओं पर हिंदी का थोपा जाना ठीक नहीं है। हम इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।
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अमित शाह के बयान पर गैरहिंदी भाषी राज्यों से काफी कड़ा एतराज आया है। तमिलनाडु में भाजपा की सहयोगी अन्नाद्रमुक ने भी इसका विरोध किया है। पार्टी ने कह है कि इस तरह कोई भाषा थोपना अस्वीकार्य है। अन्नाद्रमु नेता ओ पनीरसेल्वम ने कहा कि उनकी पार्टी तमिल और अंग्रेजी की दो भाषा नीति को लेकर दृढ़ है। वहीं तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके ने भी अमित शाह के बयान का सख्त विरोध किया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा कि शाह का हिंदी पर जोर भारत की अखंडता और बहुलवाद के खिलाफ है और यह अभियान सफल नहीं होगा।
दक्षिण भारत से कड़ा एतराज
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस नेता सिद्धरमैया ने कहा कि हिंदी भारत की राष्ट्र भाषा नहीं है। उन्होंने कहा कि बीजेपी गैर-हिंदी भाषी राज्यों के खिलाफ सांस्कृतिक आतंकवाद के अपने एजेंडे पर बढ़ रही है, जो बर्दाश्त नहीं होगा।
पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज तृणमूल कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि गैर हिंदी भाषी राज्यों पर हिंदी थोपने के किसी भी प्रयास का हम विरोध करते हैं। अमित शाह के 'एक राष्ट्र, एक भाषा, एक धर्म' का एजेंडे को कभी पूरा नहीं होने दिया जाएगा।
क्या कहा है शाह ने
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि हिंदी की स्वीकार्यता स्थानीय भाषाओं की नहीं बल्कि अंग्रेजी के विकल्प के रूप में होनी चाहिए। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्णय किया है कि सरकार चलाने का माध्यम राजभाषा है और यह निश्चित तौर पर हिंदी के महत्व को बढ़ाएगा। मंत्रिमंडल का 70 फीसदी एजेंडा हिंदी में तैयार किया जाता है। अब हिंदी को देश की एकता का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने का समय आ गया है।
भाजपा नेता सीटी रवि ने कहा है कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने अंग्रेजी के बजाय हिंदी का उपयोग करने का सुझाव दिया। है, जिसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने क्षेत्रीय भाषाओं के खिलाफ कुछ नहीं कहा है। पीएम मोदी ने क्षेत्रीय भाषा में गर्व से बोलने की बात कही है।












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