पीसी चाको ने दिल्ली की हार के लिए शीला दीक्षित को ठहराया जिम्मेदार, पूर्व सीएम की बेटी कांग्रेस नेता पर बरसीं
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। पार्टी विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार खाता खोलने में नाकाम रही। इस हार के बाद दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा और दिल्ली प्रभारी पीसी चाको ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। दोनों नेताओं के इस्तीफे को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने स्वीकार कर लिया है। वहीं, कांग्रेस नेता पीसी चाको ने दिल्ली में हार के लिए पूर्व सीएम और दिवंगत नेता शीला दीक्षित को जिम्मेदार ठहराया, तो उनकी बेटी लतिका दीक्षित ने कांग्रेस नेता पर पलटवार किया।

पीसी चाको ने हार के लिए शीला दीक्षित को दोषी ठहराया
पीसी चाको ने दिल्ली में पार्टी की हार के लिए पूर्व सीएम शीला दीक्षित को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि किसी भी समझदार व्यक्ति ने दिल्ली में कांग्रेस की हार का अनुमान लगा लिया होगा। पीसी चाको ने कहा था, 'कांग्रेस पार्टी का पतन 2013 में शुरू हुआ था, जब शीला दीक्षित मुख्यमंत्री थीं, नई पार्टी AAP ने कांग्रेस के पूरे वोट बैंक पर कब्जा कर लिया, हम उसे कभी वापस हासिल नहीं कर सके, वह आज भी AAP के पास है।' पीसी चाको के इस बयान की महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मिलिंद देवड़ा और पवन खेड़ा ने आलोचना की। जबकि शीला दीक्षित की बेटी लतिका ने अपनी नाराजगी जाहिर की।

शीला दीक्षित की बेटी कांग्रेस नेता पर बरसीं
शीला दीक्षित ने 15 साल तक दिल्ली में सत्ता संभाली थी, और उनके नाम पर कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली में वोट मांगे थे। पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी लतिका दीक्षित ने कहा, 'पीसी चाको इस बात का जवाब देना चाहिए ... कैसे उनका विवेक इस तरह की बात करने की इजाजत देता है, जिनका निधन हो चुका है।' लतिका ने कहा, 'मुझे लगता है कि हम सब ऐसे पले-बढ़े हैं कि आप किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में टिप्पणी नहीं करते जो इस दुनिया में नहीं है। पीसी चाको के बयान पर टिप्पणी करने लायक नहीं है।' बता दें कि पिछले साल शीला दीक्षित का निधन हो गया था।

तीन बार दिल्ली की सीएम रहीं थी शीला दीक्षित
शीला दीक्षित तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। साल 2013 के चुनाव में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया और इसके बाद कांग्रेस के ही समर्थन से सरकार बनाई। हालांकि, ये सरकार ज्यादा दिनों तक नहीं चली और 49 दिनों बाद केजरीवाल के इस्तीफे के साथ सरकार गिर गई। इसके बाद 2015 में विधानसभा चुनाव हुए जिसमें कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला। 2020 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस अपना खाता खोलने में नाकाम रही।












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