National Herald Case: कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार की ED ने खारिज की मांग, 7 अक्टूबर को ही होगी पूछताछ
नई दिल्ली, 06 अक्टूबर। प्रवर्तन निदेशालय ने कर्नाटक कांग्रेस के चीफ डीके शिवकुमार और उनके भाई को पूछताछ के लिए 7 अक्टूबर को दिल्ली बुलाया है। इससे पहले उन्होंने ईडी के सामने समय देने की मांग रखी, जिसे निदेशालय ने खारिज कर दिया। ईडी के इस निर्णय के बाद कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने कहा है कि अब वे इसको लेकर अपनी पार्टी के नेताओं से चर्चा करेंगे।

प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने ये समन कर्नाटक कांग्रेस नेताओं के यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े धन के संदिग्ध योगदान मामले में जारी किया है। जिसमें कांग्रेस कर्नाटक चीफ डीके शिवकुमार और उनके भाई व सांसद डीके सुरेश का नाम भी शामिल है। कर्नाटक के इन दोनों कांग्रेस नेताओं को ईडी ने 7 अक्टूबर यानी शुक्रवार को पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया है।
ईडी के इस समन को लेकर डीके शिवकुमार ने कहा, 'मैंने ईडी के सामने पेश होने के लिए समय मांगा था जिसे अस्वीकार कर दिया गया। मैं अपने नेताओं के साथ चर्चा करूंगा और फोन करूंगा।'
क्या है नेशनल हेलाल्ड केस?
देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने 20 नवंबर 1937 को एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी AJL का गठन किया था। जिसका उद्देश्य अलग-अलग भाषाओं में समाचार पत्रों को प्रकाशित करना था। अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज समाचार पत्र तब AJL के अंतर्गत प्रकाशित किए गए। इसके गठन में पूर्व पीएम की भूमिका थी लेकिन इसका मालिकाना हक उनके पास नहीं था। शुरुआत में एजेएल 5000 स्वतंत्रता सेनानी शेयर होल्डर थे। धीरे- धीरे इस कंपनी की घाटा बढ़ता गया। साल 2008 तक AJL पर 90 करोड़ रुपये से अधिका का लोन हो गया। जिसके बाद एजेएन ने अखबारों को प्रकाशन बंद कर प्रॉपर्टी बिजनेस के तरफ कदम बढ़ा दिए। एजेएल के शेयर ट्रांसफर होते ही कई शेयरधारकों ने आरोप लगाया कि यंग इंडिया लिमिटेड ने जब AJL का अधिग्रहण करने पूर्व उन्हें ना तो कोई नोटिस दी गई और ना ही शेयर ट्रांसफर करते वक्त उनसे सहमति ली गई।












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