कर्नाटक उपचुनाव: भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए क्या फिर साथ आएगी कांग्रेस-जेडीएस ?
बेंगलुरु। महाराष्ट्र के बाद कांग्रेस की निगाह अब कर्नाटक पर हैं। भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए वह एक बार फिर पुरानी चाल चलने की तैयारी कर रही हैं। उपचुनाव में भाजपा को बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में कर्नाटक में कांग्रेस एक बार फिर सरकार बनाने के लिए जेडीएस हा हाथ थाम सकती हैं। कांग्रेस ने रविवार को संकेत दिए हैं कि उपचुनाव में भाजपा को अगर बहुमत नहीं मिलता है तो एक बार फिर वह जेडीएस से हाथ मिला सकती है।

बता दें कर्नाटक में पांच दिसंबर को 15 सीटों पर उपचुनाव हैं। इन 15 निर्वाचन क्षेत्रों के वोटर के वोट ही भाजपा का भविष्य निर्धारित करने वाले हैं। येदियुरप्पा के पास 105 विधायक हैं। मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ भाजपा को राज्य की 224 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत में बने रहने के लिए 15 निर्वाचन क्षेत्रों में हो रहे उपचुनाव में कम से कम छह सीटें जीतना जरूरी है। गौरतलतब हैं कि कर्नाटक उपचुनाव के लिए भाजपा ने कांग्रेस-जेडीएस के 13 बागी विधायकों को उम्मीदवार बनाया है। जिन 15 निर्वाचन क्षेत्रों में उपचुनाव हो रहा है उसमें पूर्व में 12 पर कांग्रेस का कब्जा था और तीन सीटें जद (एस) के पास थीं। इस उपचुनाव में कांग्रेस और जेडीएस दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं।

कांग्रेस ने यह साफ कर दिया है कि वह कर्नाटक में जेडीएस के साथ सरकार बनाने के लिए हाथ मिलाने के विरुद्ध नही है। हालांकि जेडीएस संस्थापक एच डी देवगौड़ा ने विरोधाभासी बयान दिया हैं। जिससे साफ है कि इस मुद्दे पर क्षेत्रीय दलों के अंदर स्पष्ट रूख नहीं है। देवगौड़ा ने रविवार को यह कहा कि येदियुरप्पा के पास 105 विधायक हैं उनकी सरकार सरकार क्यों गिरेगी? उन्होंने कहा,कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस-जेडीएस साथ आएंगे यह एक सवाल है, लेकिन हमारे साथ जुड़ने के बारे मीडिया में पूर्व में आयी खबरें गलत हुई थीं। हमें उससे ज्ञान प्राप्त हुआ है, इसलिए हम ऐसा दोबारा नहीं करेंगे।

वहीं देवगौड़ा के बेटे और कर्नाटक के पूर्व सीएम कुमारस्वामी ने उपचुनाव के बाद राज्य में राजनीतिक बदलाव के बारे में अपना दावा दोहराते हुए कुमारस्वामी ने रविवार को कहा कि यह कोई अतिशयोक्ति वाला बयान नहीं है और इस बारे में कोई संदेह नहीं होना चाहिए। क्या उपचुनाव के बाद वह किंगमेकर होंगे इस प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा, इन 15 निर्वाचन क्षेत्रों के वोटर किंगमेकर हैं, मैं नहीं। जिन 15 निर्वाचन क्षेत्रों में उपचुनाव हो रहा है उसमें 12 पर कांग्रेस का कब्जा था और तीन सीटें जद (एस) के पास थीं।

कुछ दिनों पूर्व कुमारस्वामी यह भी कह चुके हैं, उपचुनाव के बाद राज्य में स्थिर सरकार होगी, हालांकि जरूरी नहीं है कि यह भाजपा की हो। उन्होंने मीडियाकर्मियों से नौ दिसंबर को उपचुनाव के नतीजों तक इंतजार करने को कहा था। आपको बता दें पिछली बार भी मुख्यमंत्री की कुर्सी के लोभ में भाजपा का सहयोग करने के बजाय कांग्रेस का हाथ थाम कर सरकार बनायी ली थी। जबकि चुनाव के दौरान वह कांग्रेस और जेडीएस दोनों पार्टियां एक दूसरे को फूंटी आंख नही सुहाती थी।

उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह जेडीएस पार्टी के एक विधायक जीटी देवगौड़ा ने कहा था कि बीजेपी सरकार को जेडीएस के कुछ विधायक अपना समर्थन दे रहे हैं। हालांकि देवगौड़ा के इस दावे पर कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने ट्वीट किया कि हमारी पार्टी के कुछ विधायकों द्वारा बीजेपी की नई सरकार को समर्थन देने की बात इन दिनों चर्चाओं में हैं। मैं आश्वस्त कर देना चाहता हूं कि इस तरह की कोई भी बात पूरी तरह से आधारहीन है। हम कर्नाटक की जनता के लिए अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं और यह आगे भी जारी रहेगी।

वहीं उपचुनाव के बाद कांग्रेस और जेडीएस के हाथ मिलाने के संकेतों को सिरे से खारिज करते हुए येदियुरप्पा ने कहा कि इस तरह की बातचीत का कोई महत्व नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी 15 निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा के उम्मीदवारों की जीत होगी। लोग उन्हें जवाब देंगे। नतीजे आने के बाद, कांग्रेस और जेडीएस को समझ आएगा कि लोग हमारे (भाजपा) साथ हैं। येदियुरप्पा ने कहा कि कांग्रेस और उसके नेता सिद्धरमैया सत्ता में आने और मुख्यमंत्री बनने के दिन में सपने देख रहे हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन जो कि महाराष्ट्र के लिए कांग्रेस के प्रभारी महासचिव भी हैं। उन्होंने कहा हैं कि लोकतंत्र की रक्षा और धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के साथ सामाजिक न्याय प्रदान करने के लिए जब स्थिति पैदा होगी, ऐसे मामलों पर हम अपने सहयोगियों और संप्रग भागीदारों के साथ चर्चा के बाद जरूरी कदम उठाएंगे। फिलहाल हमारा ध्यान कर्नाटक में 15 सीटों को जीतने पर हैं। हम नौ दिसंबर को सही तस्वीर बताएंगे। हम आपको अच्छी खबर देंगे। गौरतलब हैं कि भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी-कांग्रेस के साथ गठबंधन करके सरकार बनाई है। मल्किार्जुन ने कहा कि पार्टी ने महाराष्ट्र राज्य में ऐसा फैसला लोकतंत्र की रक्षा के लिए किया।

पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जी परमेश्वर ने भी कहा कि अगर हालात पैदा होते हैं तो कांग्रेस और जेडीएस के साथ आने की संभावना है। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि इस पर आखिरी निर्णय पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी का होगा। उपचुनाव में नौ दिसंबर को उपचुनाव परिणाम में कांग्रेस को अधिक सीटें मिलती है तो हमारे पास सरकार नहीं बनाने और जेडीएस के साथ गठबंधन बनाने दोनों ही विकल्प मौजूद रहेगा।

गौरतलब हैं कि पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 222 सीटों में से 104 सीटों पर कब्जा जमाया था। सबसे बड़ी पार्टी बनते ही बीजेपी की ओर से शपथ ग्रहण की घोषणा कर दी गई। बीएस येदियुरप्पा बीजेपी विधायक दल के नेता चुने गए। 16 मई 2018 को बीजेपी ने कहा था कि 17 मई की सुबह साढ़े नौ बजे मुख्यमंत्री के रूप में बीएस येदियुरप्पा शपथ लेंगे। हालांकि कांग्रेस और जेडीएस शपथ ग्रहण को रोकने की अर्जी के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, लेकिन कोर्ट ने शपथ ग्रहण रोकने से इनकार कर दिया। इसके बाद येदियुरप्पा ने सीएम पद की शपथ ली। इसके बाद 19 मई को फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले ही येदियुरप्पा ने इस्तीफा दे दिया था।

इसके बाद कांग्रेस के 78 विधायकों की मदद से महज 38 सीटें जीतने वाली जनता दल सेक्युलर ने सरकार बनायी थी। इस गठबंधन के बाद दोनों ने मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा था। कांग्रेस और जेडीएस की यह गठबंधन सरकार महज 14 महीने तक ही चली। 17 विधायकों की बगावत के बाद पिछली जुलाई में एच डी कुमारस्वामी सरकार गिरने के पश्चात दोनों पार्टियां अलग हो गई थीं। इसके बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा एक बार फिर राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
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