शाहकोट उपचुनाव: 26 साल बाद अकाली दल के गढ़ पर कांग्रेस का कब्जा
चंडीगढ़। शाहकोट उपचुनाव में शिरोमणी अकाली दल का किला ध्वस्त करते हुये कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। लाडी शेरोवालिया ने शिरोमणी अकाली दल के प्रत्याशी नायब सिंह कोहाड़ को हराया। यह भी एक संयोग ही है कि पिछला चुनाव पांच हजार से कम मतों से हारने वाले लाडी शेरोवालिया ने 38 हजार 802 मतों से जीत दर्ज की है। शाहकोट में कांग्रेस की जीत के साथ ही पंजाब की राजनीति में एक बार फिर कैप्टन अमरेन्दर सिंह का दबदबा देखने को मिला है। 1992 के बाद कांग्रेस ने 26 साल बाद इस सीट को अपने कब्जे में किया है। नतीजे आने के बाद कांग्रेसियों में खुशी की लहर देखने को मिल रही है।

शाहकोट में पिछले 26 सालों से अकाली दल का एक छत्र राज रहा है
हैरानी की बात है कि कांग्रेस की लहर के आगे न तो यहां आम आदमी पार्टी टिक पाई न ही अकाली दल अपने गढ़ को बचा पाया। शाहकोट में पिछले 26 सालों से अकाली दल का एक छत्र राज रहा है। शाहकोट अकाली दल की परंपरागत सीट मानी जाती रही है। पिछले चुनावों में भी यहां से अकाली दल के प्रत्याशी अजित सिंह कोहाड़ चुनाव जीते थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी हरदेव सिंह लाडी शेरेवालिया को हराया था। लेकिन चार फरवरी को कोहाड़ को दिल का दौरा पड़ा व उनका निधन हो गया। सीट खाली होने की वजह से यहां उपचुनाव हुआ।

चुनाव से पहले विवादों में फंस गए थे हरदेव सिंह
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्दर सिंह की प्रतिष्ठा का सवाल बनी शाहकोट सीट पर कांग्रेस पार्टी ने कैप्टन की पंसद के प्रत्याशी हरदेव सिंह लाडी शेरेवालिया को ही दोबारा चुनाव मैदान में उतारा। लेकिन कांग्रेस पार्टी प्रत्याशी अपना नामांकन भरने से पहले ही नये झमेले में फंस गये। उन पर थाना महिलापुर में अवैध खनन,खान एवं खनन अधिनियम 1957 की धारा 379 के तहत मामला दर्ज हो गया था।

विवादों के बीच हरदेव की शानदार जीत
दरअसल चुनावों से कुछ दिन पहले सोशल मीडिया में एक विडियो वायरल हुआ था, जिसमें हरदेव सिंह लाडी शेरेवालिया एक सरपंच से रेत खनन मामले में बातचीत कर रहे थे। हालांकि उन्होंने इसे विरोधियों की बदनाम करने की चाल बताया था। मामला जब गरमाया तो शाहकोट के मेहतपुर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर परमिंदर पाल सिंह बाजवा ने भठ्ठा मजदूर यूनियन के प्रधान मोहन सिंह के बयान के आधार पर शेरेवालिया के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। उसके बाद मामला इस कदर गरमाया कि राज्य सरकार व पुलिस प्रशासन के दवाब के चलते थाना प्रभारी बाजवा ने अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। उसके बाद उन्हें जेल जाना पड़ा। दिलचस्प बात रही कि चुनावों में लाडी शेरोवालिया पर तमाम विवादों का कोई असर नहीं पड़ा और उन्होंने शानदार जीत दर्ज की।












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