बंगाल और पंजाब में मिले झटके का कांग्रेस इस राज्य में 'इंडिया' की सहयोगी से ले सकती है बदला

विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक और उसमें भी कांग्रेस के लिए बुधवार का दिन राजनीतिक तौर पर बहुत ही खराब रहा। पश्चिम बंगाल और पंजाब दोनों राज्यों में विपक्षी गठबंधन की पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की सपना चकनाचूर हुआ है और इसका सबसे बड़ा खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ सकता है।

लेकिन, हरियाणा में स्थिति अलग है और फिलहाल सीटों के बंटवारे पर कांग्रेस ड्राइविंग सीट पर नजर आ रही है। राज्य में लोकसभा की 10 सीटें हैं, जिनमें से सब पर बीजेपी का कब्जा है, लेकिन कांग्रेस आज भी मुख्य विपक्षी पार्टी है।

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हरियाणा में कांग्रेस से 3 सीटें मांग रही है AAP
ताजा जानकारी मिलने तक हरियाणा की 10 सीटों में से आम आदमी पार्टी कांग्रेस से 3 सीटों की मांग कर रही है। ये सीटें हैं अंबाला, कुरुक्षेत्र और सिरसा। इनमें से दो सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं।

आम आदमी पार्टी का दावा है कि पंजाब से सटे होने की वजह से उसके चुनाव लड़ने पर इंडिया ब्लॉक को फायदा मिल सकता है। लेकिन, कांग्रेस की प्रदेश इकाई इसके लिए कतई तैयार नहीं दिख रही है।

कांग्रेस के नेता AAP के दबाव में झुकने को नहीं तैयार
कांग्रेस की कमजोरी ये है कि 2014 में वह हरियाणा की एक मात्र सीट रोहतक जीती भी थी, लेकिन 2019 में वह पूरी तरह से साफ हो गई। लेकिन, फिर भी कांग्रेस पार्टी के नेता आम आदमी पार्टी के दबाव में झुकने के लिए तैयार नहीं हैं।

AAP के नेताओं को कांग्रेस करवा रही है ज्वाइन
यहां तक कि कांग्रेस पार्टी के राज्य के दिग्गज नेताओं ने आम आदमी पार्टी से नेताओं को अपने खेमे में लाने के लिए भी अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय सह-संयोजक निर्मल सिंह और उनकी बेटी और प्रदेश में पार्टी की उपाध्यक्ष चित्रा सरवारा कांग्रेस का हाथ पकड़ भी चुके हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस नेता आगे भी यह अभियान जारी रखने वाले हैं।

ईटी ने हरियाणा के एक दिग्गज कांग्रेसी नेता के हवाले से बताया है कि 'यह साफ है कि हरियाणा में कांग्रेस ही मुख्य विपक्षी पार्टी है। पार्टी हाई कमान के लिए भी यह संकेत है कि उसे नई-नवेली पार्टियों को गैर-जरूरी महत्त्व नहीं देना चाहिए।'

भाजपा-कांग्रेस के वोट शेयर में 30% का फासला
हालांकि, कांग्रेस की चिंता ये है कि पिछली बार बीजेपी और उसके बीच करीब 30% वोट शेयर का फासला था। इसलिए वह इंडिया ब्लॉक के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा भी कर रही है। क्योंकि, अपने दम पर इस अंतर का पाटना उसके लिए बहुत ही मुश्किल लग रहा है।

लेकिन, आम आदमी पार्टी के सामने कांग्रेस का सरेंडर करने का मतलब है कि विधानसभा चुनाव से पहले ही हथियार डाल देना। हरियाणा में विधानसभा चुनाव भी लोकसभा चुनाव के कुछ ही महीने बाद होना है।

ऐसे में जिस तरह से पंजाब में आम आदमी पार्टी ने सभी 13 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही है, कांग्रेस हरियाणा में झुकने के लिए तैयार होगी इसकी संभावना नहीं है। जबकि, पंजाब में कांग्रेस पिछली बार 8 सीटें जीती थी और आम आदमी पार्टी सिर्फ एक। अभी भी कांग्रेस के पंजाब से 7 सांसद हैं।

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