उत्तर प्रदेश में इनसे संभलकर रहे भाजपा और कांग्रेस

पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वाचल के आठ दलों के गठबंधन से बने एकता मंच ने लोकसभा चुनाव के लिए 36 उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। इस गठबंधन के सभी दलों के अध्यक्षों को चुनाव मैदान में उतारते हुए मंच ने सपा व बसपा को घेरने की खास रणनीति बनाई है। दिलचस्प बात यह कि पश्चिम के सूरमाओं को भी पूर्वाचल से मैदान में उतारा गया है। उम्मीदवार घोषित करने में मंच ने जातीय समीकरण का भी खूब ख्याल रखा है।
डी.पी. यादव को गाजीपुर व केशवदेव मौर्य को कुशीनगर और अफजाल अंसारी को बलिया लोकसभा सीट से उम्मीदवार घोषित किए जाने के पीछे एकता मंच की बड़ी रणनीति काम कर रही है। गाजीपुर में बसपा ने हालांकि अभी अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है लेकिन कैलाश नाथ यादव को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा है, जबकि सपा से बाबू सिंह कुशवाहा की पत्नी शिवकन्या हैं। अफजाल अंसारी और ओमप्रकाश राजभर की ताकत और डी.पी. के बाहुबल के सहारे ही एकता मंच ने इस सीट पर दोनों दलों को घेरने की मुहिम तेज कर दी है।
गाजीपुर की जनता अपराधियों को पसंद नहीं करती
गाजीपुर में भाजपा के जिलाध्यक्ष कृष्ण बिहारी राय का हालांकि साफतौर पर यह कहना है कि गाजीपुर की जनता अपराधियों को पसंद नहीं करती और ऐसी उम्मीद है कि आने वाले चुनाव में भी बाहर से आकर यहां लड़ने वाले उम्मीदवारों को जनता करारा जवाब देगी।
गाजीपुर के अलावा बलिया लोकसभा सीट पर भी अफजाल के उम्मीदवार बनाए जाने के बाद से ही समीकरण एक दम बदल गए हैं। अफजाल अंसारी यहां सपा के वर्तमान सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर के लिए भी कड़ी चुनौती पेश करेंगे। बसपा और भाजपा की तरफ से हालांकि अभी उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की गई है।
समाचार पत्रिका 'आउटलुक' के वरिष्ठ पत्रकार कुमार पंकज कहते हैं, "गाजीपुर लोकसभा सीट से डी.पी. यादव के आने के बाद समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं। यादवों और मुसलमानों का गठजोड़ हुआ तो डीपीवाई की दावेदारी बड़े दलों पर भारी पड़ सकती है।"
एकता मंच ने घोसी से मुख्तार अंसारी, वाराणसी से उनकी पत्नी अफशां अंसारी, चंदौली से शशिप्रताप सिंह, देवरिया से उमेश मणि त्रिपाठी, कैसरगंज से डॉ. संतोष पांडेय, महराजगंज से कविलास राजभर, डुमरियागंज से गंगाराम निषाद और राबर्ट्सगंज से नक्सली लालब्रत कोल को उम्मीदवार बनाया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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