कपिल सिब्बल से पहले कांग्रेस के वे 5 बड़े नाम, जो पिछले पांच महीने में छोड़ गए पार्टी

नई दिल्ली, 25 मई: कांग्रेस ने हाल ही में राजस्थान में चिंतन शिविर आयोजित करके पार्टी के डूबते जहाज को बचाने के लिए काफी मंथन किया है। लेकिन, कांग्रेस के जर्जर हो चुके विशाल जहाज के डूबने के डर से इसके नेताओं में भरोसा बहाल नहीं हो पा रहा है। लिस्ट में बुधवार को नया नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल का जुड़ा है, जो पिछले करीब ढाई वर्षों से नेतृत्व की नीतियों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठा रहे थे। लेकिन, सिब्बल इस लिस्ट में सिर्फ नए नाम हैं, उनसे पहले पार्टी के कई जनाधार वाले नेता भी इसी तरह से छोड़कर जा चुके हैं और कांग्रेस नेतृत्व की ओर से उनकी नाराजगी दूर करने की कोई गंभीर कोशिश भी कभी दिखाई नहीं पड़ी है।

5 महीने में कांग्रेस छोड़ने वाले कपिल सिब्बल छठे नेता

5 महीने में कांग्रेस छोड़ने वाले कपिल सिब्बल छठे नेता

वरिष्ठ वकील और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल कांग्रेस के नाराज नेताओं के समूह जी-23 के सबसे मुखर सदस्य थे और पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाने के लिए यह अपने आवास पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का टमाटर अटैक भी झेल चुके थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद सिब्बल कई बार कांग्रेस की संस्कृति के विपरीत आला कमान पर इस तरह के सवाल उठा चुके थे, जिससे यह तय लग रहा था कि उन्होंने पार्टी से बोरिया-बिस्तर समेटने की ठान रखी है। इसलिए, उनका राज्यसभा में जाने के लिए कांग्रेस का हाथ छोड़कर समाजवादी पार्टी की साइकिल पर बैठना कोई चौंकाने वाली बात नहीं है। लेकिन, हर नेता के साथ ऐसी बात नहीं है।

हार्दिक पटेल

हार्दिक पटेल

बहुत ही कम उम्र में पाटीदार आंदोलन की वजह सुर्खियों में आए हार्दिक पटेल को कांग्रेस ने गुजरात में काफी उम्मीदों से साथ लिया था। 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में इनकी वजह से पार्टी को काफी फायदा भी हुआ था और वह सत्ताधारी बीजेपी को कड़ा मुकाबला दे पाई थी। लेकिन, जब इसी साल अंत में चुनाव होने हैं तो हार्दिक ने खुद को उपेक्षित रखने का आरोप लगाया था। उन्होंने राहुल गांधी पर भी सीधा निशाना साधा था कि उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया है, लेकिन जिम्मेदारी बताने के लिए उनके पास समय ही नहीं है। गुजरात कांग्रेस के नेताओं पर उनका चिकन सैंडविच वाला तंज भी खूब चर्चित हुआ है। हार्दिक ने काफी इंतजार किया कि कभी न कभी तो राहुल-प्रियंका वाड्रा को उनकी बात सुनने का समय मिलेगा। लेकिन, आखिरकार उनका भी कांग्रेस, खासकर गांधी परिवार के नेताओं से मोहभंग हुआ और उन्होंने भी अपना करियर कांग्रेस के बाहर तलाशने का विकल्प चुना है। हाल में जितने भी नेता कांग्रेस छोड़कर गए हैं, उनमें हार्दिक काफी विशाल जनाधार वाले नेता माने जा सकते हैं।

सुनील जाखड़

सुनील जाखड़

सिब्बल से पहले इसी महीने पंजाब में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी कांग्रेस छोड़ दी थी और बीजेपी में शामिल हो गए थे। उनका परिवार कई दशकों से पार्टी से जुड़ा रहा है। उन्हें पार्टी नेतृत्व ने पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी की आलोचना करने के लिए कारण बताओ नोटिस दिया था। पार्टी से निकलने की वजह बताते हुए उन्होंने कहा था कि गांधी परिवार का साथ छोड़ने का उनका फैसला निजी कारणों से नहीं, बल्कि पंजाब की स्थिरता और राज्य की सुरक्षा के लिए है। इससे पहले पार्टी ने उन्हें दो वर्षों के लिए सभी पदों से हटा दिया था, क्योंकि उनके खिलाफ कांग्रेस की अनुशासन समिति ने सिफारिश की थी।

अश्विनी कुमार

अश्विनी कुमार

इसी साल फरवरी महीने में एक और दिग्गज कांग्रेसी और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार ने भी कांग्रेस पार्टी को अलविदा कह दिया था। उन्होंने कहा था कि, 'पार्टी के दायरे के बाहर रहकर बड़े राष्ट्रीय मसलों के लिए ज्यादा अच्छे से काम कर सकते हैं।' उन्होंने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजे इस्तीफे में कहा था, यह कदम 'मेरी गरिमा के अनुरूप' है।

आरपीएन सिंह

आरपीएन सिंह

यूपी विधानसभा चुनावों से कुछ समय पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह ने भी कांग्रेस को अलविदा कह दिया था। एक समय वह ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद की तरह ही राहुल गांधी के बहुत ही करीबी माने जाते थे। वैसे वह झारखंड में पार्टी-प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, लेकिन जानकारी के मुताबिक वह पार्टी में कुछ समय से उपेक्षित महसूस कर रहे थे। उन्होंने मीडिया से कहा था कि वह 32 साल से कांग्रेस में थे, लेकिन 'पार्टी अब वह नहीं रही, जो हुआ करती थी।'

कैप्टन अमरिंदर सिंह

कैप्टन अमरिंदर सिंह

पंजाब विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले से तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस नेतृत्व से दूरियां बनने लगी थी। राहुल और प्रियंका ने नवजोत सिंह सिद्धू को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया, जिन्होंने कैप्टन को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा। आखिरकार अमरिंदर सिंह ने पार्टी छोड़ दी और पंजाब लोक कांग्रेस के नाम से नई पार्टी बना ली। पंजाब में कांग्रेस के पास कैप्टन से बड़ा कोई चेहरा और जनाधार वाला नेता नहीं था। लिहाजा, विधानसभा चुनावों में उसकी मिट्टी पलीद हो गई।

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