डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर पाकिस्तान स्थित पैतृक गांव गाह में शोक, पत्नी व बेटियों को गांव आने का दिया न्योता
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के बाद पाकिस्तान के गाह गांव में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सिंह का 26 दिसंबर 2024 को दिल्ली के एम्स में 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। गाह गांव डॉ. मनमोहन सिंह का पैतृक स्थान है। गांव वालों ने उनकी स्मृति में यह कार्यक्रम आयोजित किया। गांव के निवासियों ने सिंह की साधारण पृष्ठभूमि से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेतृत्व करने की उनकी प्रेरणादायक यात्रा पर गर्व व्यक्त किया।
गांव के लोगों ने व्यक्त की गर्व और संवेदनाएं
गांव के एक निवासी ने सिंह को अपने पिता के सहपाठी के रूप में याद करते हुए कहा कि मेरे लिए गर्व की बात है कि मनमोहन सिंह मेरे पिता के सहपाठी थे। जब भी मैं स्कूल में उनका नाम देखता था तो मुझे लगता था कि हमारे छोटे से गांव का लड़का इतने बड़े देश का प्रधानमंत्री बना। अन्य ग्रामीणों ने भी सिंह के प्रति अपने जुड़ाव को व्यक्त किया और उनकी पत्नी व बेटियों को गांव आने का निमंत्रण दिया।

गांव के एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि अगर उनकी पत्नी और बेटियां यहां आएंगी तो उन्हें आज भी अपना घर मिलेगा। हम उनका ऐसा स्वागत करेंगे। जो इतिहास में दर्ज हो जाए।
गाह गांव में श्रद्धांजलि ने रेखांकित किया सीमाओं से परे संबंध
भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद गाह गांव के निवासियों ने इस कठिन समय में एकजुट होकर डॉ. सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस कार्यक्रम ने यह दिखाया कि राजनीतिक तनावों से परे साझा इतिहास और सांस्कृतिक बंधन कैसे दोनों देशों के लोगों को जोड़ सकते हैं।
गांव के निवासियों ने सिंह को दोनों देशों के बीच एक सेतु का प्रतीक बताया। यह सामूहिक स्मरण उनके योगदान के प्रति गहरी श्रद्धा और दोनों देशों के बीच शांति और सुलह की आकांक्षा को रेखांकित करता है।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार 28 दिसंबर को दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित निगमबोध घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। इस दौरान उनके परिवार, सहकर्मियों और सरकारी अधिकारियों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
डॉ. सिंह ने 1991-1996 तक भारत के वित्त मंत्री और 2004-2014 तक प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा की। उनके कार्यकाल को भारत की आर्थिक संरचना में सुधार लाने और वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए याद किया जाएगा।
गाह गांव से प्रेरणादायक शुरुआत से प्रधानमंत्री बनने तक
डॉ. मनमोहन सिंह की कहानी उनकी साधारण पृष्ठभूमि से लेकर भारत के प्रधानमंत्री बनने तक की एक प्रेरणादायक यात्रा है। गाह गांव के लोगों ने इस यात्रा पर गर्व व्यक्त किया और उनकी विरासत को एक प्रेरणा के रूप में देखा।
सीमाओं के परे उनकी विरासत
डॉ. सिंह की विरासत न केवल भारत में बल्कि उनके पैतृक गांव गाह और पाकिस्तान में भी गहरी छाप छोड़ती है। गाह के ग्रामीणों द्वारा दी गई श्रद्धांजलि ने यह साबित किया कि भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद सीमाओं से परे भावनात्मक और सांस्कृतिक संबंध बने रहते हैं।
यह भावपूर्ण घटना भारत और पाकिस्तान के आम लोगों के बीच साझा इतिहास और शांति की आकांक्षा का प्रतीक है। डॉ. सिंह की स्मृति और योगदान दक्षिण एशियाई क्षेत्र में शांति और सहयोग के लिए एक प्रेरणा बने रहेंगे।












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