Mahavir Chakra: 'बहा दिया खून लेकिन झुकने ना दिया तिरंगा', पढ़ें गलवान के हीरो संतोष बाबू की शौर्य गाथा
नई दिल्ली, 23 नवंबर। 'खुद फना हो गए लेकिन गिरने ना दिया तिरंगा, बहा दिया खून लेकिन झुकने ना दिया तिरंगा' जीहां, यहां बात हो रही है भारत मां के वीर सपूत कर्नल संतोष बाबू की, जिन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज उनकी मां और पत्नी को पुरस्कार दिया। आंखों में गौरव भरे आंसू को लेकर जब संतोष बाबू की मां-पत्नी ने ये पुरस्कार ग्रहण किया तो हर किसी की आंखें नम हो गईं।
Recommended Video

कर्नल संतोष बाबू महावीर चक्र से सम्मानित
गलवान घाटी के हीरो रहे कर्नल संतोष बाबू ने चीनी सैनिकों के घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करने के लिए अपनी जान को न्यौछावर कर दिया। मालूम हो कि कर्नल संतोष 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर थे। देश अपने इस वीर सपूत को कभी भूल नहीं पाएगा। उनके करीबी उनके बारे में बताते हैं कि बेहद ही जिंदादिल इंसान संतोष बाबू तो रोते हुए व्यक्ति को भी अपनी मोहक बातों और मुस्कान से हंसा देते थे। घरों से लाखों किमी दूर बैठे सिपाहियों के वो हमदर्द थे और हमेशा कहा करते थे कि ये शरीर अगर भारत मां की सेवा करने के काम आ जाए तो इससे ज्यादा मुझे जीवन में कुछ नहीं चाहिए और हुआ भी वो ही।

क्या हुआ था गलवान घाटी में
साल 2020 के मई महीने में इंडिया औैर चाइना के बीच विवादित इलाके को लेकर हाईलेवल बैठक हुई थी, जिसमें ये तय हुआ था कि चीन विवादित इलाके से पीछे हट जाएगा। लेकिन हमेशा की तरह इस बार भी चीन अपने वादे से मुकर गया और उसने 15-16 जून की रात भारत में घुसपैठ करने की कोशिश की।
भारत मां के 20 जवान शहीद
लेकिन भारतीय सेना को इस बात की भनक लग गई। जिसके बाद तुरंत 16 बिहार रेजिमेंट के जवानों के साथ कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू खुद वहां पर पहुंचे और चीनी सैनिकों को रोकने की कोशिश की, इस दौरान भारतीय जवानों ने 40 से ज्यादा चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार डाला और बाकियों को खदेड़ दिया , हालांकि चीन ने आज तक अपने मारे गए सैनिकों की संख्या के बारे में नहीं बताया है लेकिन इस बीच भारत मां के 20 जवान भी शहीद हो गए थे, जिनकी शहादत को ये देश कभी भी भूल नहीं पाएगा।

'दुखी हूं लेकिन अपने बेटे की कुर्बानी पर गर्व है'
आपको बता दें कि कर्नल संतोष 18 महीने से लद्दाख में भारतीय सीमा की सुरक्षा में तैनात थे। वो मूल रूप से तेलंगाना के रहने वाले थे।उन्होंने हैदराबाद के सैनिक स्कूल में पढ़ाई की, फिर वे एनडीए के लिए चुने गए थे। उनके पिता टीचर हैं। शुरू से देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा रखने वाले कर्नल संतोष अपने पीछे अपने मां-पापा,पत्नी और दो बच्चे छोड़ गए हैं। उनकी शहीद होने की सूचना जब उनके मां-पापा को मिली थीं तो अपना इकलौता बेटा खोने वाली उनकी मां ने कहा था कि 'दुखी हूं लेकिन अपने बेटे की कुर्बानी पर गर्व है।'

'महावीर चक्र' भारत का दूसरा सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार
कर्नल संतोष बाबू की शहादत के बाद तेलंगाना सरकार ने उनकी पत्नी को जुलाई 2020 में डिप्टी कलेक्टर बनाया था और उनके परिवार को पांच करोड़ की सहायता राशि और हैदराबाद में एक आवसीय जमीन दी है। बताते चलें कि 'महावीर चक्र' भारत का दूसरा सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार है जो कि वरीयता क्रम में यह 'परमवीर चक्र' के बाद आता है।












Click it and Unblock the Notifications