गाजा में मारे गए कर्नल काले का पठानकोट से था गहरा रिश्ता, आतंकी हमले को रोकने में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका
Gaza: गाजा में मारे गए एक भारतीय जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा एवं संरक्षा विभाग (UN department of safety and security) के पर्यवेक्षक के रूप में काम कर रहे थे, को लेकर एक नई जानकारी निकलकर सामने आई है। महाराष्ट्र के रहने वाले वैभव अनिल काले ने 2016 के पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
वैभव अनिल काले के एक दोस्त जो उस दौरान पठानकोट एयरबेस पर तैनात थे, ने इस बारे में जानकारी दी। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार 2016 में पठानकोट अटैक के दौरान वैभव भारतीय सेना की 11 जम्मू-कश्मीर राइफल्स बटालियन की कमान संभाल रहे थे। उनके साथी, लेफ्टिनेंट कर्नल हंगे एसडी (सेवानिवृत्त) उस दौरान पठानकोट एयरबेस हमले के दौरान एक टैंक परिवहन इकाई की कमान संभाल रहे थे।
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हांगे ने वैभव अनिल काले के बारे में बात करते हुए बताया, "पुणे में एनडीए के पूर्व छात्र काले, जब पठानकोट हमला हुआ था तब वह भारतीय सेना की 11 जम्मू-कश्मीर राइफल्स बटालियन की कमान संभाल रहे थे। उन्होंने और उनकी यूनिट ने उस ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।" हांगे ने आगे बताया, "वह एक जिंदादिल इंसान थे। उनका निधन मेरे और मेरे परिवार के लिए एक बड़ी क्षति है। हम मुंबई में एक ही इमारत में रहते थे।"
टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी ने बतया, "काले अकादमी में 97वें कोर्स के 'नवंबर' स्क्वाड्रन से थे और 1999 में एनडीए से पासआउट हुए थे। आईएमए से पासआउट होने के बाद उन्हें 2000 में भारतीय सेना में नियुक्त किया गया था।"
काले के मित्र, जो एक सेवारत अधिकारी भी है ने कहा, "काले ने जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में बड़े पैमाने पर सेवा की थी। आतंकवाद विरोधी अभियानों में एक विशेषज्ञ, उन्होंने कई अभियानों में भाग लिया। जब पठानकोट हमला हुआ, वह पश्चिमी सेक्टर में एक बटालियन की कमान संभाल रहे थे।"
काले के चचेरे भाई ने बताया,"भारतीय एजेंसियां शव को भारत लाने के तौर-तरीकों पर काम कर रही हैं। इस समय, हमारे पास विशेष विवरण नहीं है। लेकिन हम विदेश मंत्रालय, जो इस मामले में अपने संयुक्त राष्ट्र समकक्षों के साथ समन्वय कर रहा है, के संपर्क में हैं।"
गाजा में कर्नल वैभव अनिल काले (रिटायर्ड) के साथ क्या हुआ?
संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा और सुरक्षा विभाग (यूएनडीएसएस) में पर्यवेक्षक के रूप में कार्यरत सेवानिवृत्त भारतीय सेना के कर्नल वैभव अनिल काले सोमवार को युद्धग्रस्त गाजा में मारे गए। 46 साल के काले, अपनी पत्नी और दो किशोर बच्चों के साथ पुणे में रहते थे। करीब एक महीने पहले वो संयुक्त राष्ट्र का सुरक्षा एवं संरक्षा विभाग (यूएनडीएसएस) में बतौर पर्यवेक्षक शामिल हुए थे।
गाजा के राफा में यूरोपीय अस्पताल की ओर जाने के दौरान खान यूनिस में उनके वाहन में आग लग गई। इस हादसे में उनकी मृत्यु हो गयी। 7 अक्टूबर, 2023 को नवीनतम इजराइल-हमास संघर्ष शुरू होने के बाद से गाजा में वैभव अनिल काले वैश्विक संगठन के पहले विदेशी/अंतर्राष्ट्रीय नागरिक हैं जिनकी यहां जान गई।
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