कश्मीर बनेगा गाजा... फारूख अब्दुल्ला का जहरीला सपना टूटेगा, PoK को देखकर क्यों रोएगा टुकड़े-टुकड़े गैंग?
PoK Protest: फारूक अब्दुल्ला कश्मीर पर राज करने का सपना देख रहे हैं। राज्य के लोगों को खुद के साथ जोड़ने के लिए वह चाहते हैं, कि दिल्ली की सरकार पाकिस्तान से बात करे। लेकिन, उन्हें इस बात का जरा भी एहसास नहीं है, कि भारत बदल गया है।
फारूक अब्दुल्ला को अहसास नहीं है, भारत पर अब राष्ट्रवादियों का शासन है और पीओके में पिछले एक हफ्ते से आने वाली तस्वीरें फारूक अब्दुल्ला जैसे नेताओं को रूलाने के लिए काफी हैं, क्योंकि पीओके में बगावत की आवाज उठने लगे हैं।

फारूक अब्दुल्ला की राजनीति क्या है?
यूरेशियन टाइम्स में एक्सपर्ट केएन पंडिता ने फारूख अब्दुल्ला के 'पाकिस्तान प्रेम को डिकोड किया है।'
फारूक अब्दुल्ला ने कहा था, कि "पाकिस्तान से बात नहीं करोगे तो कश्मीर गाजा बनेगा।" जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला का कश्मीर में नवीनतम युद्ध घोष है।
जैसे-जैसे संसदीय चुनाव पूरी ताकत से आगे बढ़ रहा है, कश्मीर को लेकर राजनीति तेज होती जा रही है। फारूख अब्दुल्ला एक विपक्षी नेता हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना करते नहीं थकते।
केएन पंडिता ने लिखा है, कि कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए पाकिस्तान से बात करना उनका मंत्र है। वह चेतावनी जारी करने में संकोच तक नहीं करते और कहते हैं, कि यदि आप ऐसा करने में नाकाम रहते हैं, तो गाजा जैसा हाल कश्मीर का हो जाएगा। लेकिन, पूर्व मुख्यमंत्री यह नहीं बताते, कि सरकार को किससे बात करनी चाहिए या क्या बात करनी चाहिए।
इसके अलावा, फारूख अब्दुल्ला की राजनीति में पीओके से आने वाली तस्वीरें फिट नहीं बैठती हैं, जहां के लोग सस्ती बिजली और बुनियादी जरूरतों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
कुछ साल पहले, उनकी पार्टी के एक पूर्व सांसद को पाकिस्तानी शीर्ष अधिकारियों के साथ गुप्त वार्ता करने के लिए बतौर प्रतिनिधि नियुक्त किया गया था। फारूक अब्दुल्ला के बेटे और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा किए गए खुलासे के मुताबिक, एक साल से ज्यादा समय तक, वह गुमनाम प्रतिनिधि श्रीनगर और इस्लामाबाद के बीच घूमता रहा।
ये गुप्त दौरे और बातचीत तब हुई थी, जब देश में कांग्रेस और सहयोगी दलों का शासन था। सीधे शब्दों में कहें, तो इसका मतलब है, कि पाकिस्तान का मिशन 'हाईकमान' की हरी झंडी के बिना शुरू नहीं किया जा सकता था।
हालांकि, उन वार्ताओं का नतीजा क्या निकला, वो अभी तक एक गुप्त रहस्य बना हुआ है जिसके बारे में केवल फारूक अब्दुल्ला और उनके साथियों को ही पता है। हालांकि, वास्तविक परिणाम को बहुत अधिक समय तक छिपाया नहीं जा सका, क्योंकि कश्मीर में जो जमीनी हालात बाद में बने, उससे उस गुप्त वार्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
वार्ता के परिणामस्वरूप 1986 में अनंतनाग जिले में कश्मीरी हिंदुओं पर हमला हुआ। इसके बाद 1986 से 1989-90 तक बमबारी और गोलीबारी हुई। 1986 में अनंतनाग जिले में हिंदू धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ किए गए अत्याचारों की कहानी को आश्चर्यजनक रूप से तेजी से दबा दिया गया था और किसी भी क्षेत्रीय, स्थानीय या राष्ट्रीय अखबार को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई।
अनंतनाग में हिंदुओं के खिलाफ हुए हिंसा के दो कारण थे। पहला, साजिश का सरगना, प्रदेश कांग्रेस प्रमुख, अनंतनाग जिले का एक लोकप्रिय नेता था, और दूसरा, अनंतनाग जिला परंपरागत रूप से जमात-ए-इस्लामी का गढ़ रहा है, जिसके कार्यकर्ताओं ने हिंदू संपत्तियों की लूट और आगजनी में प्रमुख भूमिका निभाई थी।
बाद में, "धर्मनिरपेक्ष" भारतीय राष्ट्र ने उसी व्यक्ति को अपना गृह मंत्री चुना। उन्होंने सेना और पुलिस बलों को अपनी बैरकों में ही कैद रहने का आदेश दिया, जब घाटी के हिंदुओं का नरसंहार हो रहा था। कुछ साल पहले शुरू हुए गुप्त मिशन का अंत कश्मीर से कश्मीरी हिंदुओं का नामोनिशान मिटाने के साथ हुआ।
पाकिस्तान स्थित सशस्त्र जिहादियों के समर्थन से, जिन्हें घाटी से भरपूर मदद दी गई, उन्होंने चुन-चुनकर हिंदुओं का सफाया किया, लिहाजा अब फारूख अब्दुल्ला से सवाल पूछे जा रहे हैं, कि आखिर वो पाकिस्तान से बातचीत क्यों करना चाहते हैं?
फारूख अब्दुल्ला की नीयत पर शक क्यों?
केएन पंडिता के मुताबिक, 1974 में फारूख अब्दुल्ला एक विशाल बैठक को संबोधित करने के लिए लंदन से उड़ान भरकर मीरपुर (पाक-नियंत्रित कश्मीर) में उतरे थे। मंच पर उन्होंने बंदूक उठाई और घोषणा की, कि अगर कश्मीर को आजादी नहीं दी गई, तो कश्मीरी बंदूक उठा लेंगे। बंदूक थामे इस करिश्मा की तस्वीरें तब वायरल हो गई थीं। फारूक अब्दुल्ला 1974 में हमेशा से कश्मीर को गाजा जैसा देखना चाहते थे और उनका वो जहरीला सपना अब भी कायम है।
केएन पंडिता ने लिखा है, कि फारूक अब्दुल्ला के नेशनल कांन्फ्रेंस के गुंडों ने 1986 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली की, जमाती इस्लामी-प्रायोजित मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट (एमयूएफ) के उम्मीदवारों के साथ मारपीट और लूटपाट की, और इस तरह घाटी में एक मजबूत पाकिस्तान समर्थक निर्वाचन क्षेत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें से जिहादी संगठन बाहर हो गए। जैसे केएलएफ, जेकेएलएफ, एचयूएम और अन्य बाद में तेजी से उभरे।
पाकिस्तान से क्यों बात करना चाहते अब्दुल्ला?
आखिर फारूक अब्दुल्ला क्यों चाहते हैं, कि एनडीए सरकार पाकिस्तान से बात करे। उन्हें अच्छी तरह से समझ में आ गया है, कि राष्ट्रवादी भारत ने छद्म धर्मनिरपेक्षता का वह मुखौटा उतार दिया है, जो कांग्रेस के दिग्गजों ने उन्हें छह दशकों तक पहनाया था।
अब्दुल्ला की गहरी निराशा यह है कि सत्ता की दुल्हन उनसे दूर होती जा रही है और हर गुजरते दिन के साथ दूरियां बढ़ती जा रही हैं। चूंकि देश में आम तौर पर और विशेष रूप से कश्मीर में चुनाव अपने चरम पर है, फारूक अब्दुल्ला ने अपना मोदी-विरोधी हमला तेज़ कर दिया है।
दूसरी तरफ, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में 'आजादी' के नारे जोर-शोर से गूंज रहे हैं, और पीओके की गलियों में भारत के साथ विलय की मांग वाले पोस्टर लगे हुए हैं। बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बाद कम से कम एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। भारी विरोध प्रदर्शन और हिंसा के कारण पीओके के मुजफ्फराबाद और रावलकोट में कारोबार बंद रहने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।
यानि, जो सपना फारूख अब्दुल्ला कश्मीर के लिए देख रहे थे, वो सपना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सच होता दिख रहा है।
-
Delhi NCR Weather Today: दिल्ली-NCR में होगी झमाझम बारिश, दिन में छाएगा अंधेरा, गिरेगा तापमान -
युद्ध के बीच ईरान ने ट्रंप को भेजा ‘बेशकीमती तोहफा’, आखिर क्या है यह रहस्यमयी गिफ्ट -
Gold Silver Price: सोना 13% डाउन, चांदी 20% लुढ़की, मार्केट का हाल देख निवेशक परेशान -
Ram Navami Kya Band-Khula: UP में दो दिन की छुट्टी-4 दिन का लंबा वीकेंड? स्कूल-बैंक समेत क्या बंद-क्या खुला? -
इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा पंचतत्व में विलीन, पिता का भावुक संदेश और आखिरी Video देख नहीं रुकेंगे आंसू -
'मुझे 10 बार गलत जगह पर टच किया', Monalisa ने सनोज मिश्रा का खोला कच्चा-चिट्ठा, बोलीं-वो मेरी मौत चाहता है -
Petrol-Diesel Shortage: क्या भारत में पेट्रोल-डीजल समेत ईंधन की कमी है? IndianOil ने बताया चौंकाने वाला सच -
कौन हैं ये असम की नेता? जिनके नाम पर हैं 37 बैंक अकाउंट, 32 गाड़ियां, कुल संपत्ति की कीमत कर देगी हैरान -
Iran Vs America: ईरान ने ठुकराया पाकिस्तान का ऑफर, भारत का नाम लेकर दिखाया ऐसा आईना, शहबाज की हुई फजीहत -
LPG Crisis: एलपीजी संकट के बीच सरकार का सख्त फैसला, होटल-रेस्टोरेंट पर नया नियम लागू -
Trump Florida defeat: ईरान से जंग ट्रंप को पड़ी भारी, जिस सीट पर खुद वोट डाला, वहीं मिली सबसे करारी हार -
Who is Aryaman Birla Wife: RCB के नए चेयरमैन आर्यमन बिड़ला की पत्नी कौन है? Virat Kohli की टीम के बने बॉस












Click it and Unblock the Notifications