Cockroach Janta Party, इसके फाउंडर अभिजीत पर पाकिस्तानी ISI एसेट होने का आरोप? क्या है पूरा सच?
Cockroach Janta Party (CJP) Abhijeet Dipke: भारत की डिजिटल राजनीति में पिछले कुछ दिनों में जिस नाम ने सबसे ज्यादा हलचल मचाई है, वह है 'कॉकरोच जनता पार्टी' यानी CJP। इस डिजिटल और व्यंग्यात्मक (satirical) पार्टी ने सिर्फ एक हफ्ते में सोशल मीडिया पर वो कर दिखाया, जो बड़ी-बड़ी राजनीतिक पार्टियां सालों में नहीं कर पातीं। CJP ने इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी (BJP) को भी पीछे छोड़ दिया और 2 करोड़ (20 मिलियन) से ज्यादा फॉलोअर्स बटोर लिए।
लेकिन जैसे ही इस 'कॉकरोच' का कद बढ़ा, इस पर सियासी हमले और विवाद भी शुरू हो गए हैं। अब इस पार्टी और इसके फाउंडर अभिजीत दिपके पर पाकिस्तान से कनेक्शन होने और यहाँ तक कि 'ISI एसेट' होने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि फिलहाल इन आरोपों को साबित करने वाला कोई आधिकारिक दस्तावेज या जांच एजेंसी की पुष्टि सामने नहीं आई है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर CJP और उसके संस्थापक को लेकर जबरदस्त राजनीतिक लड़ाई छिड़ चुकी है। आइए समझते हैं कि इस विवाद की असली जड़ क्या है।

🔷क्या सच में 'पाकिस्तान' के दम पर उड़ रही है कॉकरोच जनता पार्टी?
जैसे ही कॉकरोच जनता पार्टी के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स का आंकड़ा रॉकेट की तरह ऊपर गया, वैसे ही बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बीजेपी युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इस पार्टी को "पाकिस्तान जनता पार्टी" का नाम दे दिया।
बग्गा ने सोशल मीडिया पर एक डेटा शेयर करते हुए दावा किया कि CJP को सपोर्ट करने वाले सबसे ज्यादा लोग भारत के नहीं, बल्कि पाकिस्तान के हैं। उनके द्वारा शेयर किए गए आंकड़ों के मुताबिक:
- पाकिस्तान: 49% फॉलोअर्स
- अमेरिका: 14% फॉलोअर्स
- बांग्लादेश: 14% फॉलोअर्स
- भारत: सिर्फ 9% फॉलोअर्स
इस डेटा के सामने आते ही बीजेपी नेता प्रीति गांधी ने भी एक्स (X) पर हमला बोलते हुए लिखा कि जब आपका सबसे बड़ा फैनबेस सीमा पार यानी दुश्मन देश में बैठा हो, तो यह नाटक बंद कर देना चाहिए कि आप किसके हक की बात कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह भी चर्चा तेज हो गई कि इतने कम समय में करोड़ों फॉलोअर्स असली नहीं हो सकते, बल्कि ये विदेशों से खरीदे गए 'बोट्स' (नकली अकाउंट्स) या इनएक्टिव यूजर्स हो सकते हैं।
🔷फाउंडर अभिजीत दिपके ने 'अपना डेटा' दिखाकर किया पलटवार
इस पूरे विवाद पर CJP के फाउंडर अभिजीत दिपके ने चुप्पी तोड़ी है। पिछले 72 घंटों से बिना सोए लगातार सफाई दे रहे दिपके ने बग्गा के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट का 'ऑफिशियल इनसाइट डेटा' (Real Analytics) शेयर करते हुए लिखा:
"मुझे पता है कि आप लोग इस अकाउंट को हैक करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जब नाकाम रहे तो ये झूठा डेटा फैलाने लगे। ये रहा असली डेटा। आप भारत के 94% युवाओं को पाकिस्तानी क्यों कह रहे हैं?"
दिपके द्वारा जारी किए गए डेटा के मुताबिक:
- भारत: 94% फॉलोअर्स
- अमेरिका: 1% फॉलोअर्स
- ब्रिटेन: 0.7% फॉलोअर्स
यहां समझने वाली बात यह है कि तजिंदर बग्गा या अभिजीत दिपके, किसी ने भी इस डेटा का कोई थर्ड-पार्टी ऑडिट सोर्स नहीं बताया। हालांकि अभिजीत खुद उस अकाउंट के एडमिन हैं, इसलिए इंस्टाग्राम के असली आंकड़े देखने का अधिकार सिर्फ उनके पास ही है। बीजेपी नेताओं ने जिस डेटा का इस्तेमाल किया, वो मुमकिन है कि किसी बाहरी अनवेरिफाइड ऐप या वेबसाइट से निकाला गया हो, जिसकी विश्वसनीयता पर हमेशा सवाल रहते हैं।
🔷खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट और भारत में अकाउंट ब्लॉक: 'कॉकरोच इज बैक' की पूरी कहानी
इस विवाद ने तब और गंभीर मोड़ ले लिया जब 21 मई को कॉकरोच जनता पार्टी का ऑफिशियल एक्स (X) हैंडल भारत में अचानक बंद (Withheld) कर दिया गया। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई केंद्र सरकार के निर्देश पर की गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने 'राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंताओं' का हवाला देते हुए इस अकाउंट को ब्लॉक करने का इनपुट दिया था।
ब्लॉक होने से पहले इस एक्स अकाउंट के 2 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे। भारत में भले ही यह अकाउंट न दिख रहा हो, लेकिन विदेशों में इसे अब भी देखा जा सकता है। सरकार के इस एक्शन के कुछ ही घंटों बाद अभिजीत ने हार नहीं मानी और 'Cockroach Is Back' नाम से एक नया हैंडल बना लिया।
देखते ही देखते इस नए हैंडल पर भी करीब 1.56 लाख फॉलोअर्स जुड़ गए। दिलचस्प बात यह है कि इस नए अकाउंट को देश के कई बड़े राजनेता, एक्टिविस्ट और नामी हस्तियां फॉलो कर रहे हैं, जिनमें सांसद महुआ मोइत्रा, सागरिका घोष, मशहूर अदाकारा गुल पनाग और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण शामिल हैं। इससे साफ है कि यह लड़ाई अब सिर्फ मीम्स तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें देश के बड़े चेहरे भी शामिल हो चुके हैं।
🔷ISI एसेट वाला आरोप कितना गंभीर है?
CJP विवाद अब सिर्फ सोशल मीडिया फॉलोअर्स तक सीमित नहीं रहा। अभिजीत दिपके पर "ISI-paid asset" होने तक के आरोप लगाए जाने लगे। तजिंदर बग्गा समेत कई यूजर्स ने साल 2019 की एक पुरानी पुलिस शिकायत की कॉपी दोबारा शेयर करना शुरू कर दी है। यह शिकायत लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी (LRO) नामक संस्था ने दर्ज कराई थी।
🔹मामला क्या था? साल 2019 में जब मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाया था, तब अभिजीत दिपके पर आरोप लगा था कि वे पाकिस्तान समर्थित नैरेटिव और "हुर्रियत जैसी अलगाववादी भाषा" को बढ़ावा दे रहे हैं। शिकायत में उनके खिलाफ यूएपीए लगाने की मांग तक की गई थी।
🔹 क्या कार्रवाई हुई? LRO ने पुणे पुलिस को दी शिकायत में दिपके को 'पुणे का AAP नेता' बताते हुए उन पर हुर्रियत जैसी अलगाववादी सोच को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था और उन पर सख्त आतंकवाद विरोधी कानून UAPA के तहत गिरफ्तारी की मांग की थी।

इस बात को समझना बेहद जरूरी है कि 2019 में सिर्फ एक शिकायत दर्ज कराई गई थी। पुणे पुलिस या देश की किसी भी आधिकारिक जांच एजेंसी (जैसे NIA या IB) ने आज तक अभिजीत दिपके को आधिकारिक तौर पर 'ISI एसेट' या देशद्रोही घोषित नहीं किया है। वह मामला महज एक आरोप बनकर रह गया, जिस पर आगे कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए उन्हें 'ISI एसेट' कहना कानूनी रूप से बिल्कुल गलत और निराधार है।
🔷CJI के एक बयान से कैसे पैदा हुई यह अनोखी पार्टी? 'बेरोजगारों और आलसियों' का नया ठिकाना
अब बात करते हैं कि आखिर इस 'कॉकरोच जनता पार्टी' की शुरुआत हुई कैसे? यह पूरी कहानी देश के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के एक कथित बयान से जुड़ी है।
15 मई को कोर्ट रूम में क्या हुआ था?
एक मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कथित तौर पर वकीलों की डिग्री और कुछ युवाओं के रवैये पर टिप्पणी की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने कहा था, "कुछ युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जिन्हें कोई रोजगार नहीं मिलता या प्रोफेशन में जगह नहीं मिलती। उनमें से कुछ मीडिया बन जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया, RTI एक्टिविस्ट या अन्य एक्टिविस्ट बनकर हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।"
हालांकि, अगले ही दिन चीफ जस्टिस ने इस पर गहरा दुख जताते हुए साफ किया कि मीडिया ने उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया (Misquoted)। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी सिर्फ उन लोगों के लिए थी जो फर्जी और बोगस डिग्रियों के सहारे वकालत में आ रहे हैं।
🔷CJI की सफाई से पहले ही इंटरनेट पर आ गया 'भूचाल'
भले ही चीफ जस्टिस ने सफाई दे दी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इंटरनेट की 'मीम आर्मी' ने इसे हाथों-हाथ ले लिया। पुणे के रहने वाले और इस समय अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस (PR) में मास्टर्स कर रहे 30 वर्षीय अभिजीत दिपके ने 16 मई को 'कॉकरोच जनता पार्टी' की नींव रख दी।
दिपके इससे पहले 2020 से 2023 तक आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया टीम से जुड़े रहे थे और उन्होंने 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में मीम-बेस्ड कैंपेनिंग में अहम भूमिका निभाई थी। अपनी इसी कला का इस्तेमाल उन्होंने यहाँ भी किया।
🔷पार्टी की वेबसाइट पर मजेदार शर्तें: 'प्रोफेशनल तरीके से बड़बड़ाना' आना जरूरी
कॉकरोच जनता पार्टी ने युवाओं को लुभाने के लिए बेहद ही अनोखा और मजाकिया तरीका अपनाया है। इसकी वेबसाइट पर जो नियम लिखे हैं, वे आज के 'जेन-जी' (Gen-Z) यानी युवा वर्ग को काफी पसंद आ रहे हैं।
पार्टी में शामिल होने की शर्तें:
- आवेदक का बेरोजगार और आलसी होना जरूरी है।
- वह 'क्रॉनिकली ऑनलाइन' होना चाहिए (यानी हर वक्त इंटरनेट पर रहने वाला)।
- उसके पास 'प्रोफेशनल तरीके से रेंट (भड़ास) निकालने' की क्षमता होनी चाहिए।
🔷मजाक से शुरू हुआ आंदोलन
भले ही यह सब एक मजाक और सैटायर (व्यंग्य) के रूप में शुरू हुआ हो, लेकिन CJP ने अपने पोस्ट्स के जरिए देश के गंभीर मुद्दों को उठाना शुरू कर दिया है। यह पार्टी अब ग्राफिक्स, एनिमेशन और अपने खुद के 'मैनिफेस्टो' (घोषणापत्र) के जरिए युवाओं की असली समस्याओं जैसे-बेरोजगारी, पेपर लीक और महंगी शिक्षा पर सरकार को घेर रही है। यही वजह है कि इसे 'आलसियों और बेरोजगारों की आवाज' कहा जा रहा है और देश का युवा इससे तेजी से कनेक्ट हो रहा है।
🔷सैटायर, डिजिटल पॉलिटिक्स और राष्ट्रवाद के बीच फंसी CJP
कुल मिलाकर, कॉकरोच जनता पार्टी का उदय यह दिखाता है कि आज के दौर में इंटरनेट और मीम्स की ताकत कितनी बड़ी हो चुकी है। जो चीज एक अदालती टिप्पणी के विरोध में सिर्फ मनोरंजन और व्यंग्य के लिए शुरू हुई थी, उसने देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी को हिलाकर रख दिया है।
जहां एक तरफ बीजेपी इसे देश की सुरक्षा के लिए खतरा और पाकिस्तानी बोट्स के दम पर खड़ा किया गया प्रोपेगैंडा मान रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के नेता और देश के युवा इसे अभिव्यक्ति की आजादी और बेरोजगारी के खिलाफ एक अनोखा डिजिटल आंदोलन कह रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद शांत होता है या कोई नया मोड़ लेता है, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी।














Click it and Unblock the Notifications