Coal Shortage: इन सभी राज्यों में हो सकती है बत्ती गुल! पूरी लिस्ट यहां देखिए

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर: केंद्रीय बिजली मंत्री आरके सिंह लगातार भरोसा देते रहे हैं कि बिजली उत्पादन करने वाले प्लांट्स को कोयले की कमी हरगिज नहीं होने दी जाएगी। लेकिन, कुछ राज्य कोयला संकट को लेकर त्राहिमाम कर रहे हैं। उनका दावा है कि कोयले पर निर्भर उनके राज्यों के पॉवर प्लांट के पास पर्याप्त कोयले का स्टॉक नहीं बचा है, जिसके चलते उत्पादन बाधित हो रहा है और इसकी वजह से बिजली कटौती की नौबत आने लगी है। गौरतलब है कि कोरोना काल में कोयले का उत्पादन दुनियाभर में प्रभावित हुआ है और कई देश इस तरह का संकट झेल रहे हैं, जिसमें पड़ोसी मुल्क चीन भी शामिल है। आइए जानते हैं कि कोयले की किल्लत के चलते भारत के किन राज्यों पर बिजली की कटौती का संकट मंडरा रहा है।

बिजली की खपत बढ़ी, कोयले का स्टॉक कम

बिजली की खपत बढ़ी, कोयले का स्टॉक कम

वनइंडिया आपको लगातार आगाह कर चुका है कि अर्थव्यवस्था की गतिविधियों में तेजी आने और घरेलू मांग बढ़ने से बिजली की डिमांड पिछले कुछ महीनों में तेजी से बढ़ने लगी है। लेकिन, कोविड-19 की वजह से कोयले के उत्पादन में आई शिथिलता उस गति से नहीं बढ़ पा रही है, जिससे बिजली संकट पैदा होने की आशंका बढ़ गई है। चीन में कोयले के स्टॉक की कमी और उसके चलते बिजली के लिए हाहाकार की बात पहले से ही सामने आ चुकी है। भारत में भी सिर्फ बीते दो महीनों में ही बिजली का उपभोग पिछले साल इन्हीं महीनों के मुकाबले करीब 17% बढ़ चुका है। दूसरी तरफ इस साल हुई ज्यादा बारिश के चलते कोयले के उत्पादन और ढुलाई पर भी असर पड़ा है। जबकि, आयातित कोयले की कीमतें बढ़ने से उसपर आधारित पॉवर प्लांट में उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है।

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    Coal Crisis: Delhi, Punjab समेत इन राज्यों में Power Crisis, अब इतना बचा है कोयला | वनइंडिया हिंदी
    आधे से ज्यादा प्लांट में 2 दिन से भी कम का स्टॉक

    आधे से ज्यादा प्लांट में 2 दिन से भी कम का स्टॉक

    फिलहाल स्थिति यह बताई जा रही है कि कोयले के स्टॉक में कमी के चलते पूरे देश में बिजली प्लांट में उत्पादन नियंत्रित की जाने लगी है। आमतौर पर बिजली प्लांट में 15 से 30 दिनों के लिए कोयले का स्टॉक रखना आवश्यक माना जाता है, लेकिन ग्रीड ऑपरेटर के आंकड़ों के मुताबिक देश में कोयले पर आधारित 135 पॉवर प्लांट में से आधे के पास दो दिन से भी कम के कोयले का स्टॉक बचा हुआ है। जबकि, इनपर देश के कुल बिजली सप्लाई का करीब 70% निर्भर है।

     गुजरात के मुंद्रा प्लांट में उत्पादन बाधित

    गुजरात के मुंद्रा प्लांट में उत्पादन बाधित

    गुजरात के मुंद्रा में टाटा पॉवर का जो पॉवर प्लांट आयातित कोयले पर निर्भर है, वहां उत्पादन बंद कर देना पड़ा है। टाटा पॉवर ने विभिन्न राज्यों के साथ बिजली सप्लाई का करार कर रखा है। इनमें वह गुजरात को 1,850 मेगा वॉट, महाराष्ट्र को 760 मेगा वॉट,पंजाब को 475 मेगा वॉट, राजस्थान को 380 मेगा वॉट और हरियाणा को भी 380 मेगा वॉट बिजली सप्लाई करता है। दरअसल, दुनियाभर में कोयला उत्पादन में कमी होने के चलते इसकी कीमतें बढ़ रही हैं। चीन जैसा देश भी इसकी जबर्दस्त मार झेल रहा है।

    दिल्ली के सीएम ने पीएम को लिखी चिट्ठी

    दिल्ली के सीएम ने पीएम को लिखी चिट्ठी

    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंदर केजरीवाल राजधानी में संभावित बिजली संकट की आशंका को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिख चुके हैं। टाटा पॉवर डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड के सीईओ गणेश श्रीनिवासन ने शनिवार को कहा कि उसके पास जरूरत के हिसाब से सिर्फ 1 या 2 दिन का ही कोयला बचा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि बिजली कटौती निश्चित लग रही है। ये राजधानी के कुछ इलाकों में दिल्ली के डिस्कॉम्स को बिजली सप्लाई करती है।

    पंजाब में बिजली उत्पादन घटा

    पंजाब में बिजली उत्पादन घटा

    पंजाब के थर्मल पॉवर प्लांट्स में कोयले की भयंकर कमी की वजह से बिजली का उत्पादन कम करना पड़ा है और इसके चलते कई जगहों पर लोड शेडिंग की जा रही है। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार पर कोयले की अपर्याप्त सप्लाई का आरोप लगाया है। शनिवार को पंजाब स्टेट पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के एक अधिकारी ने बताया था कि कोयले की किल्लत के चलते कोयले से संचालित पॉवर प्लांट कम क्षमता पर चल रहे हैं।

    तमिलनाडु- चेन्नई के कुछ इलाकों पर असर

    तमिलनाडु- चेन्नई के कुछ इलाकों पर असर

    तमिलनाडु में वहां के तमिलनाडु जेनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन (टैंजेडको) ने कहा है कि राजधानी चेन्नई के कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति निलंबित रहेगी। हालांकि, इसके लिए उसने शहर में मेंटेंनेंस के कार्य का हवाला दिया है।

    आंध्र प्रदेश में भी असर पड़ने की आशंका

    आंध्र प्रदेश में भी असर पड़ने की आशंका

    आंध्र प्रदेश में अब बिजली की मांग करीब 185-190 मेगा यूनिट रोजाना तक पहुंच चुकी है। वहां की जरूरत की 45% मांग एपीजीईएनसीओ के बिजली उत्पादक स्टेशन पूरा करते हैं। इसके पास अब मात्र 1 या 2 दिनों का ही कोयला बच गया है, जिसका आगे और ज्यादा असर पड़ने की आशंका है।

    राजस्थान, बिहार और झारखंड भी प्रभावित

    राजस्थान, बिहार और झारखंड भी प्रभावित

    राजस्थान में डिमांड और सप्लाई की चेन बकरार रखने के लिए रोजाना 1 घंटे की बिजली कटौती का सहारा लिया जा रहा है। इनके अलावा झारखंड और बिहार भी कोयले की किल्लत से बहुत ज्यादा प्रभावित होने वाले राज्यों में शामिल है।

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