रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद कोयले की किल्लत का सामना क्यों कर रहा है देश?
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर: देश भर के थर्मल पावर प्लांट में कोयले की कमी से जुड़ी रिपोर्ट सामने आ रही हैं। जिसके चलते कई राज्यों में बिजली संकट खड़ा हो गया है और बिजली कटौती देखने को मिल रही है। राज्य सरकारें केंद्र से जल्दी से जल्दी इस मसले का हल निकालने को कह रही हैं तो वहीं केंद्र ने राज्यों पर इस पूरे संकट का ठीकरा फोड़ दिया है। इस सबमें गौर करने वाली बात ये है कि देश में कोयले का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है तो फिर कोयले की कमी का सामना क्यों करना पड़ रहा है।

इस साल हुआ है रिकॉर्ड उत्पादन
भले इस समय बड़ा कोयला संकट है लेकिन एक तथ्य ये भी है कि देश के सबसे बड़े कोयला आपूर्तिकर्ता कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने वर्ष की पहली छमाही में कोयले का रिकॉर्ड उत्पादन किया है। अप्रैल और सितंबर 2021 के बीच सीआईएल ने 249.8 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में लगभग 13.8 मिलियन टन ज्यादा है।
सप्लाई की बात करें तो अप्रैल और सितंबर 2021 के दौरान कुल आपूर्ति 307.7 मिलियन टन से अधिक रही है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान आपूर्ति की गई 55.2 मिलियन टन से अधिक है। मौजूदा संकट को लेकर सीआईएल और कोयला मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि मांग में तेजी से बढ़ोतरी के चलते ये स्थिति पैदा हुई है।

इस संकट के पीछे ये वजह भी
अधिकारियों का मानना है कि इस वृद्धि की वजह के कई कारण हैं। कोल इंडिया लिमिटेड आमतौर पर अप्रैल-मई के दौरान अपने स्वयं के भंडार और बिजली संयंत्रों का स्टॉक करता है। दूसरी कोविड लहर के कारण इसमें देरी हुई। इसके बाद मानसून के चलते भी आयात और परिवहन में देरी हुई।
इसके अलावा ऐसे बिजली संयंत्र हैं जो विशेष रूप से आयातित कोयले पर निर्भर थे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में दरों में वृद्धि के चलते अपनी आपूर्ति की जरूरतों को पूरा करने के लिए सीआईएल की तरफ शिफ्ट हो गए, जिससे कि सीआईएल पर भार बढ़ा। इसके अलावा बिजली की मांग में अचानक वृद्धि भी इस स्थिति के लिए एक हद तक जिम्मेदार है। हालांकि कोयला मंत्रालय से जुड़े लोगों का कहना है कि अब स्थिति ठीक होने की ओर चल रही है।

कोयले के स्टॉक की कमी के चलते संकट
ये पूरा मामला कोयले के स्टॉक से जुड़ा है। आमतौर पर बिजली कंपनियों के पास पहले 17 दिन का कोयला स्टॉक में रहता था, जो फिलहाल 4 दिन के करीब आ गया है। कोयले के स्टॉक में कमी को लेकर राज्य सरकारें लगातार केंद्र से हल निकालने को कह रही हैं। बता दें भारत में बिजली उत्पादन में करीब 70 फीसदी कोयला-आधारित थर्मल पॉवर प्लांट के ही भरोसे है। ऐसे में कोयला की कमी को लेकर सिर्फ विपक्षी दल ही नहीं इस क्षेत्र के विशेषज्ञ भी चिंता जता चुके हैं। कई लोगों ने इसको लेकर कहा है कि ये संकट ना सुलझा तो बिजली से चलने वाली इंडस्ट्री को मुश्किल हो सकती है।












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