Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Climate Change: गर्मी हुई जानलेवा, देश में बढ़ी लू से होने वाली मौतें, वैज्ञानिक भी परेशान

नई दिल्ली, 17 मई। मौसम के उलटफेर से केवल आम इंसान ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक भी काफी परेशान है। इस साल मार्च महीने में लोगों को जून वाली गर्मी झेलनी पड़ी है तो वहीं इस बार मानसून वक्त से पहले केरल में दस्तक देने जा रहा है। यही नहीं दो दिन पहले राजधानी दिल्ली में पारा 49 डिग्री तक पहुंच गया था। उत्तर भारत के कई राज्य हीटवेव की चपेट में हैं तो वहीं असम इस वक्त बाढ़ की गिरफ्त में हैं। मौसम के इस उठपटक ने मौसम वैज्ञानिकों की पेशानी पर बल डाल दिया है।

हीटवेव से होने वाली मौतों में इजाफा हुआ

हीटवेव से होने वाली मौतों में इजाफा हुआ

आपको जानकर हैरत होगी कि पिछले कुछ सालों में हमारे देश में हीटवेव से होने वाली मौतों में इजाफा हुआ है, जो कि खतरे की घंटी है। कनाडा की संस्था इंटरनेशनल डेवलपमेंट रिसर्च सेंटर ने हीटवेव और उसके दुष्प्रभाव पर एक रिपोर्ट पेश की है, जिसमें कहा गया है कि इंडिया में साल 2006 के बाद से हीटवेक के कारण मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

2014 से 2017 के बीच इस ग्राफ में तेजी से इजाफा हुआ

2014 से 2017 के बीच इस ग्राफ में तेजी से इजाफा हुआ

साल 2014 से 2017 के बीच इस ग्राफ में तेजी से इजाफा हुआ है, इन तीन सालों के अंदर हीटवेव से होने वाली मौतों की संख्या 4000 से ज्यादा पहुंच गई है। जो कि सोचनीय विषय है। क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब की रिपोर्ट के मुताबिक चार दशकों में लू से मृत्यु दर प्रति 10 लाख से बढ़कर 62.2 फीसदी हो गई है। यही नहीं राज्यों में अब हीटवेव का औसत 7 से बढ़कर 32 पहुंच गया है, जो कि केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं कर रही है बल्कि ये उत्पादकता पर भी असर डाल रही है।

 डायरिया, डेंगू बुखार और मलेरिया का खतरा बढ़ गया

डायरिया, डेंगू बुखार और मलेरिया का खतरा बढ़ गया

जलवायु परिवर्तन की वजह से लोगों की सेहत सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। बढ़ता ताप एशिया में लोगों के अंदर अल्पपोषण, मानसिक विकारों, श्वसन, मधुमेह और संक्रामक रोगों के साथ-साथ शिशु मृत्यु दर में वृद्धि कर रहा है। मौसम के उलटफेर के कारण एशिया में डायरिया, डेंगू बुखार और मलेरिया का खतरा बढ़ गया है। लगातार गर्म दिन और तीव्र हीटवेव गर्मी से होने वाली मौतों में इजाफा कर रहे हैं। यही नहीं हीट वेव अर्थव्यवस्था पर भी असर डालती है।

क्लाइमेट चेंज 2022: इम्पैक्ट्स, एडाप्टेशन एंड वल्नरेबिलिटी'

मालूम हो कि इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) के वर्किंग ग्रुप II की रिपोर्ट 'क्लाइमेट चेंज 2022: इम्पैक्ट्स, एडाप्टेशन एंड वल्नरेबिलिटी' भी इसी साल के मार्च में जारी की गई थी, जिसमें साफ तौर पर कहा गया था कि एशिया अत्यधिक गर्मी के कारण उच्च मानव मृत्यु दर का सामना कर रहा है।

ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेस्क 2020 रिपोर्ट

ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेस्क 2020 रिपोर्ट

जबकि ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेस्क 2020 रिपोर्ट ने कहा है कि अब साउथ एशिया के देशों में और तेजी से गर्मी बढ़ेगी और अगर ये ही हाल रहा तो आने वाले दिनों में सर्दी वाले दिन कम हो जाएंगे जो कि सही नहीं है।

बीते 5 साल में मृत्युदर पर कैसा असर छोड़ा?

गांधीनगर के भारतीय लोकस्वास्थ्य संस्थान के निदेशक डॉक्टर दिलीप मावलंकर ने इस बारे में हिंदुस्तान टाइम्स से कहा कि 'अब प्रशासन को शहर में होने वाली मौतों के कारणों पर निगरानी रखनी चाहिए, जिससे ये पता चल पाए कि किन-किन कारणों से लोगों को एंबुलेंस बुलानी पड़ी या उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा. ताकि विशेषज्ञ पता लगा सकें कि असामान्य गर्मी ने बीते 5 साल में मृत्युदर पर कैसा असर छोड़ा है।'

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+