Climate change: गंगा का प्रवाह हो रहा है प्रभावित, वैज्ञानिकों ने की बड़ी भविष्यवाणी- Study
नई दिल्ली, 18 नवंबर: जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों की वजह से हिमालय से निकलने वाली विभिन्न सहायक नदियों से मिलकर एक बनने वाली गंगा नदी के प्रवाह को लेकर एक बहुत बड़ा शोध किया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे इस क्षेत्र में हालात बदल रहे हैं, नदियों का आकार बदल रहा है, जिससे भविष्य में नदियों में पानी का प्रवाह और बढ़ सकता और बाढ़ जैसे हालात ज्यादा पैदा होने की भविष्यवाणी की गई है। यह शोध आईआईएससी और आईआईटी-कानपुर के शोधकर्ताओं ने मिलकर किए हैं।

गंगा का प्रवाह हो रहा है प्रभावित
भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान संस्थान (आईआईटी)-कानपुर ने एक शोध में बताया है मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन की वजह से गंगा बेसिन में जल का प्रवाह प्रभावित हो रहा है। जबकि मानवीय गतिविधियों की वजह से पहले से ही इसपर खतरनाक असर पड़ रहा है, जिसकी वजह से प्रदूषण तो बढ़ ही रहा है, इसकी धारा भी बदल रही है। यह स्टडी साइंटिफिक रिपोर्ट जर्नल में प्रकाशित हुई है, जिसमें बताया गया है कि क्लाइमेट चेंज और क्षेत्र में डैम के निर्माण जैसे मानवीय गतिविधियों की वजह से इस क्षेत्र पर असर पड़ रहा है। इस शोध में गंगा की दो महत्वपूर्ण सहायक नदियों भागिरथी और अलकनंदा पर फोकस किया गया है, जो कि देवप्रयाग में मिलकर गंगा का स्वरूप लेती हैं।

नदियों की आकृति में बदलाव हो रहा है-स्टडी
गंगा की पश्चिमी सहायक नदी भागिरथी गंगोत्री ग्लेशियर और पूर्वी सहायक नदी अलकनंदा सतोपंथ ग्लेशियर से निकलती है। शोधकर्ताओं ने अपर गंगा बेसिन में ऋषिकेश तक अध्ययन किया है। बता दें कि भागिरथी बेसिन में चार डैम 2010 से ही ऑपरेशनल हैं, जबकि अलकनंदा बेसिन वाले 2015 के बाद चालू हुए हैं। 1995 से 2005 के बीच अलकनंदा बेसिन में पानी का प्रवाह दोगुना हुआ, जिसे अत्यधिक प्रवाह का नाम दिया गया है। स्टडी के मुताबिक अलकनंदा क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और बांधों के निर्माण की वजह से पानी की गतिविधियों में अंतर आ गया है, क्योंकि डैम और जलाशयों ने नदियों के जरिए प्रवाहित होने वाले गाद को प्रभावित किया है। इसका असर ये हुए है कि गंगा बेसिन में नीचे की ओर सेडिमेंटेशन में कमी आई है, जिससे नदियों की आकृति बदल गई है। (ऊपर वाली तस्वीर सौजन्य- भारतीय विज्ञान संस्थान)

जलाशयों और बांधों से पानी का प्रवाह प्रभावित
भारत में हिमालय का क्षेत्र जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले इलाकों में शामिल है। ऊपर से बांधों और जलाशयों की संख्या बढ़ने से हिमालय के नदियों के बेसिन में ताजे पानी से जुड़ी पारिस्थितिक प्रक्रियाओं पर बहुत ही गंभीर असर पड़ा है। शोध के मुताबिक टिहरी बाध ऊपरी गंगा बेसिन के क्षेत्र में बहुत ही अहम भूमिका निभाता है। बड़े जलाशय और पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने वाले ढांचे की वजह से यह ऊपर से आ रहे गाद के प्रवाह को रोक देता है और नीचे की ओर जाने वाले पानी की मात्रा को भी नियंत्रित करता है।

वैज्ञानिकों ने की बड़ी भविष्यवाणी
शोधकर्ताओं ने आने वाले समय में पानी के इस अत्यधिक प्रवाह की गंभीरता में इजाफे और गंगा बेसिन में बाढ़ की घटनाएं बढ़ने की भविष्यवाणी की है। इस स्टडी के लीड ऑथर आईआईएससी के इंटरडिसिप्लिनरी सेंटर के पोस्टडॉक्टोरल फेलो सोमिल स्वर्णकार ने कहा है, 'हमने अलकनंदा बेसिन में भागीरथी बेसिन से अलग ज्यादा और सांख्यिकीय तौर पर बारिश का बढ़ता ट्रेंड देखा है। इनमें से ज्यादातर ट्रेंड अलकनंदा के निचले प्रवाह वाले इलाकों में देखे गए हैं। इसीलिए, हमने इन इलाकों में प्रवाह की अत्यधिक तीव्रता भी देखी है।' शोधकर्ताओं का कहना है कि वातावरण में क्या होगा, उसे तो नहीं नियंत्रित किया जा सकता। लेकिन, यह भी बताया है कि नदी के बदलते प्रवाहों के असर को कम करने के लिए टेक्नोलॉजी और नए तरह के हाइड्रोलिक मॉडल का उपयोग किया जा सकता है, जिससे पानी के प्रवाह का भी अनुमान लग सकता है। (तस्वीरें- फाइल)












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