Padmavati विवाद: कांग्रेस के दो बड़े नेता आए आमने-सामने, पढ़िए पूरा मामला

नई दिल्ली। संजय लीला भंसाली की निर्देशित फिल्म पद्मावती सिर्फ वर्ग विशेष नहीं बल्कि अब राजनीति के दोस्तों में भी खटास पैदा करने का काम कर रही है। गौरतलब है कि यह फिल्म 700 सौ साल पुराने एक इतिहास पर बनाई है। फिल्म में में रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के रिश्ते को दिखाया गया है। कहा जा रहा है फिल्म खिलजी के एकतरफा प्यार की कहानी कहती है, फिल्म में खिलजी और रानी पद्मावती का एक ड्रीम सिक्वेंस हैं। फिल्म में रानी पद्मावती बनी दीपिका पादुकोण जो घूमर कर रही हैं, उस पर भी करणी सेना ने कहा है कि वो गलत है, महिलाएं कभी भी मर्दो के सामने घूमर नहीं करती हैं। पहले इस फिल्म का विरोध करणी सेना ने किया था, धीरे-धीरे इस विवाद में राजनेता कूद पड़े हैं जिसके बाद अब इस फिल्म की रिलीज पर संकट के बादल छा गए हैं।

थरूर ने कहा था...

थरूर ने कहा था...

गौरतलब है कि शशि थरूर ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि हकीकत यह है कि इन तथाकथित महाराजाओं में से हर एक जो आज मुंबई के एक फिल्मकार के पीछे पड़े हुए हैं, उस वक्त उन्हें अपने मान सम्मान की कोई चिंता नहीं थी जब ब्रिटिश इनके मान-सम्मान को रौंद रहे थे। वो खुद को बचाने के लिए भाग गए थे। तो इस सच्चाई का सामना करें।

थरूर और स्मृति में ठनी

थरूर और स्मृति में ठनी

इसके बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने थरूर के बयान पर जुड़ी खबर को ट्वीट कर लिखा था कि 'क्या सभी महाराजाओं ने ब्रिटिश के सामने घुटने टेके थे??? शशि थरूर की इस टिप्पणी पर क्या कहेंगे ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्गी राजा और अमरिंदर सिंह?' इसके बाद थरूर ने फिर जवाब दिया था। थरूर ने फिर ट्वीट कर कहा कि- 'कुछ भाजपाई अंधभक्तों द्वारा साज़िशन झूठा प्रचार किया जा रहा है कि मैंने राजपूत समाज के सम्मान के ख़िलाफ़ टिप्पणी की हैI मैंने राष्ट्र हित में अंग्रेज़ हकूमत के कार्यकाल का विरोध करते हुए ऊन राजाओं की चर्चा की थी जो स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेज़ के साथ थे।'

 राजपूतों की बहादुरी हमारे इतिहास का हिस्सा

राजपूतों की बहादुरी हमारे इतिहास का हिस्सा

थरूर ने लिखा था कि 'मैं यह भी निर्भीक होकर कहूँगा की भारत की विविधता व समरस्ता के मध्यनज़र राजपूत समाज की भावनाओ का आदर किया जाना सबका कर्तव्य है। राजपूतों की बहादुरी हमारे इतिहास का हिस्सा है व इस पर कोई प्रश्न नहीं उठा सकता। भाजपा व उसके सेन्सर बोर्ड को ईन भावनाओ का सम्मान करना चाहिए।'

सिंधिया ने दिया जवाब

सिंधिया ने दिया जवाब

इन सबके बीच कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने थरूर की टिप्पणी पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि उन्हें इतिहास पढ़ना चाहिए। मैं ज्योतिरादित्य सिंधिया हूं और मुझे मेरा भूतकाल पता है।

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