आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर सीजेआई जस्टिस बोबडे ने कही बड़ी बात

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने इंफॉर्मेशन और टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल पर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से इंफॉर्मेशन व टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल समय के साथ लोगों के बीच बढ़ा है, उसके बाद हमे आईटी और इससे जुड़ी सुविधाओं का इस्तेमाल और सावधानी से करना चाहिए। आईटी और इससे जुड़ी सुविधाओं को और भी बेहतर व सस्ता बनाने की जरूरत है, साथ ही इसकी मदद से लोगों को न्याय देने में भी सहूलियत होगी।

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जस्टिस बोबडे ने कहा कि कानून में हमे कृतिम बुद्धिमत्ता के भविष्य पर और गंभीर अध्ययन की जरूरत है। हमे इस बात पर खास ध्यान देने की जरूरत है कि कैसे कृतिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल न्यायिक फैसले लेने में की जा सकती है, हालांकि यह बात भी ध्यान देने की जरूरत है कि कृतिम बुद्धिमंत्ता को विकल्प के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। बता दें कि जस्टिस शरद अरविंद बोबडे देश की सुप्रीम कोर्ट के 47वें मुख्य न्यायाधीश हैं। जस्टिस एसए बोबडे ने जस्टिस रंजन गोगोई की जगह ली और देश के 47वें मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी संभाली है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई थी। आपको बता दें कि जस्टिस रंजन गोगोई रविवार को सेवानिवृत्त हो गए थे।

आपको बता दें कि अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के जजों की बेंच में जस्टिस बोबडे शामिल थे। वो वकीलों के परिवार से आते हैं। उनके पिता महाराष्ट्र अरविंद श्रीनिवास बोबडे महाराष्ट्र के पूर्व महाधिवक्ता थे। वहीं उनके भाई वरिष्ठ वकील थे। उनका जन्म 24 अप्रैल 1956 को नागपुर में हुआ। उन्होंने नागपुर यूनिवर्सिटी से कला व कानून में स्नातक किया। 21 सालों तक वकालत करने के बाद साल 2000 में बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज के रूप में जिम्मेदारी संभाली। 16 अक्तूबर 2012 को वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने। फिर साल 2013 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर नियुक्ति मिली।

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