CJI रमना ने नौकरशाही, पुलिस अफसरों के व्यवहार पर जताई आपत्ति, बोले- जांच करवाना चाहता था
नई दिल्ली, 2 अक्टूबर। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने देश में नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के व्यवहार और रवैये के बारे में गहरी आपत्ति जाहिर की है। चीफ जस्टिस ने कहा कि उन्होंने नौकरशाहों के "अत्याचारों" और उनके खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए एक स्थायी समिति गठित करने की योजना बनाई थी, लेकिन इसे बाद के लिए सुरक्षित रख लिया था।
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मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने यह टिप्पणी निलंबित चल रहे छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक गुरजिंदर पाल सिंह की एक याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के दौरान की। सिंह ने याचिका में उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग की थी। गुरजिंदर पाल सिंह पर अवैध संपत्ति, जबरन वसूली और देशद्रोह समेत विभिन्न गंभीर अपराधों का आरोप लगाया गया है।
जांच करवाना चाहते थे सीजेआई
उन्होंने कहा "मुझे इस देश में नौकरशाही को नौकरशाही को लेकर बहुत सारी आपत्तियां हैं, खासतौर पर पुलिस अधिकारी जिस तरह से व्यवहार कर रहे हैं। मैं एक समय में नौकरशाहों, विशेष रूप से पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अत्याचार और शिकायतों की जांच करने के लिए हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्थायी समिति बनाने के बारे में सोच रहा था। मैं इसे सुरक्षित रखना चाहता हूं, अभी नहीं करना चाहता।"
वहीं सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गुरजिंदर सिंह को दो मामलों में आठ सप्ताह के लिए अंतरिम राहत देते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगा दी है। हालांकि एक अन्य मामले में जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया कि मामला हाई कोर्ट में चल रहा है।
इससे पहले भी सर्वोच्च अदालत ने सत्ताधारी राजनेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच सांठगांठ का मुद्दा उठाया था और पूछा था कि अदालतों को अधिकारियों को आपराधिक मामलों में शासन बदलने के बाद क्यों बचाना चाहिए।












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