विध्वंस, मनमानी गिरफ्तारी' और न्यायपालिका की भूमिका पर CJI की अहम टिप्पणी, बोले- हम आपके साथ हैं
भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में न्यायपालिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती के बारे में बीत की। उन्होंने कहा कि न्याय तक पहुंच में आने वाली बाधाओं को खत्म करना ही बड़ी चुनौती है। कहा कि यह सुनिश्चित करना है कि न्यायपालिका समावेशी हो और पंक्ति में अंतिम व्यक्ति के लिए भी सुलभ हो।
सीजेआई ने कहा कि एक ऐसी न्यायिक प्रणाली बनाना है जो लोगों के लिए अधिक सुलभ और लागत प्रभावी हो। न्याय में प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए प्रौद्योगिकी की पूरी क्षमता का उपयोग किया जाना चाहिए।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, सीजेआई ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति में आत्मविश्वास और सांत्वना की भावना होनी चाहिए। अगर मनमाने ढंग से गिरफ्तारी, विध्वंस की धमकी, संपत्तियों को अवैध रूप से कुर्क किया जाता है तो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश वहां मौजूद रहेंगे।
उन्होंने कहा कि जैसा कि मैं भविष्य की ओर देखता हूं, मेरा मानना है कि भारतीय न्यायपालिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती न्याय तक पहुंचने में आने वाली बाधाओं को खत्म करना है। हमें उन बाधाओं को दूर करके प्रक्रियात्मक रूप से न्याय तक पहुंच बढ़ानी होगी, जो नागरिकों को अदालतों में जाने से रोकती हैं। न्याय देने की अदालतों की क्षमता में विश्वास पैदा करना होगा।
उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों और वकीलों को इस तरह से आचरण करना चाहिए जिससे कानूनी प्रक्रिया की स्वतंत्रता और अखंडता के बारे में विश्वास पैदा हो। मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि हर शिकायत, मुझे भेजा गया हर पत्र और यहां तक कि मेरे बजाय सोशल मीडिया को संबोधित किया गया, मेरे द्वारा ही निपटाया जाता है। लेकिन मैं वकीलों से अनुरोध करता हूं कि अगर आपको कोई शिकायत है तो अदालत के बाहर न भागें, आपके परिवार का मुखिया इसे संबोधित करने के लिए यहां बैठा है।
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