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चुनाव आते ही अदालतों में बढ़ जाती है मुकदमेबाजी, CJI चंद्रचूड़ की इस गंभीर टिप्पणी के मायने?

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा है कि चुनावों से पहले अदालतें मुकदमेबाजी का केंद्र बन जाती हैं। उन्होंने दिल्ली के मुख्य सचिव की नियुक्त के मामले की चर्चा करते हुए बताया कि चुनावों से पहले इस तरह की राजनीति बढ़ जाती हैं।

गुरुवार को संविधान दिवस पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में सीजेआई चंद्रचूड़ दिल्ली के मुख्य सचिव वाले केस में दोनों पक्षों के वकीलों का हवाला देते हुए यह टिप्पणी की है।

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सीजेआई चंद्रचूड़ की राजनीतिक मुकदमेबाजी पर गंभीर टिप्पणी
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ''बुधवार को ही मुझे एक 'भयावह मामले' से निपटना पड़ा....।' जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा 'डॉ एएम सिंघवी एक ओर थे और भारत के सॉलिसिटर जनरल दूसरी तरफ। दलीलें पूरी होने के बाद मैंने अपने सगयोगियों (बेंच के) से कहा- आइए हम मौके पर ही फैसला सुनातें हैं, क्योंकि इससे कुछ हद तक पारदर्शिता आती है...।'

दोनों पक्षों के वकीलों के रवैए को लेकर की चर्चा
उन्होंने आगे बताया, 'जिस समय मैं फैसला सुना रहा था, मैंने एक दिलचस्प वाक्या देखा....एसजी डॉ सिंघवी के पास गए और दोनों ने जी भरकर बातें शुरू कर दीं। कुछ देर के लिए मुझे लगा कि वह मुझको लेकर मजाक कर रहे हैं। मैंने सोचा कि वे कह रहे हैं- क्यों सीजेआई इतना लंबा फैसला सुना रहे हैं।...'

उन्होंने आगे कहा, 'हो सकता है कि वे इस बारे में बात कर रहे हों कि उन्होंने दोपहर में क्या खाना खाया या जजों के बारे में मजाक कर रहे हों...हमारे पेशे का यही स्वभाव है।'

'हमने कलम और उर्दू शायरी के बारे में बातें कीं'
हालांकि,टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसके बारे में संपर्क करने पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, 'क्योंकि, बहस पूरी होने के बाद फैसला दिया जा रहा था, मैं सांसारिक जीवन की चीजों के बारे में बात करने के लिए सिंघवी के पास गया था, जिनका जजों, केस और न ही कोर्ट से कोई लेना-देना नहीं था। हमने कलम और उर्दू शायरी के बारे में बातें कीं।'

सॉलिसिटर जनरल मेहता कलम के शौकीन हैं और दुर्लभ कलम से उनका काफी लगाव है। इसके साथ ही वे अपने शायराना अंदाज के लिए भी जाने जाते हैं।

वैसे भारत के चीफ जस्टिस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अलावा दूसरी अदालतों को भी ऐसे मामलों को रोजाना के तौर पर निपटाना चाहिए। उन्होंने कहा,'जब चुनाव आते हैं तो ऐसे मुकदमो की संख्या अदालतों में बढ़ जाती हैं। हम जजों को यह पता है। चुनावों के बाद चीजें शांत हो जाती हैं।' (इनपुट-पीटीआई)

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