Civil Services Day: कौन थे देश के पहले IAS सत्येंद्रनाथ टैगोर, अंग्रेजों का गुरुर तोड़ पास की CSE
National Civil Services Day 2023: सिविल सेवा परीक्षा अंग्रेजों के जमाने से ही शुरू हो गई थी। पहले यह परीक्षा भारत की बजाय लंदन में आयोजित होती है। पहली बार इसे बतौर भारतीय सत्येंद्र नाथ टैगोर ने लंदन जाकर पास किया था।

First IAS Satyendra Nath Biography in Hindi: आज 21 अप्रैल को देश में सिविल सेवा सर्विस डे मनाया जा रहा है। क्या आप जानते हो कि भारत में संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा की शुरुआत कब हुई और किस भारतीय को पहला आईएएस अधिकारी बनने का गौरव हासिल हुआ।
सत्येंद्रनाथ टैगोर ने 1864 में पास की सिविल सेवा परीक्षा
भारत में पहले आईएएस अधिकारी सत्येंद्रनाथ टैगौर बने। इन्होंने 1863 में लंदन में जाकर सिविल सेवा परीक्षा पास की थी। इंग्लैंड में ही इन्हें प्रशिक्षण दिया गया। 1864 में भारत लौटने के बाद सत्येंद्रनाथ टैगोर को बॉम्बे प्रेसीडेंसी में तैनात किया गया था। फिर इनकी पोस्टिंग अहमदाबाद शहर में हुई। सत्येंद्रनाथ टैगोर, रवींद्रनाथ टैगोर के बड़े भाई थे।
अंग्रेजों ने 1854 में शुरू की सिविल सेवा परीक्षा
यूपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट के अनुसार ईस्ट इंडिया कंपनी के सिविल सेवकों को निदेशकों द्वारा नामित किया जाता था। उन्हें लंदन में हैलेबरी कॉलेज में प्रशिक्षण देकर पोस्टिंग के लिए भारत भेजा जाता था। अंग्रेजों ने भारत में 1854 को सिविल सेवा परीक्षा की शुरुआत की। 18 से 23 वर्ष के अभ्यर्थियों के लिए भारतीय सिविल सेवा परीक्षाएं सिर्फ लंदन में होती थी। यूरोप की संस्कृति परीक्षा में अंकों का मुख्य आधार रहती थी, जिससे ज्यादातर भारतीय इस परीक्षा से दूर ही रहते थे। अंग्रेज ही इस परीक्षा में हिस्सा लेते थे।
सत्येंद्रनाथ टैगोर की जीवनी
- 1 जून 1842 को देवेन्द्रनाथ टैगोर और शारदा देवी के जन्मे सत्येंद्रनाथ टैगौर ने महज 21-22 साल की उम्र में सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली थी।
- सत्येंद्रनाथ टैगौर मूलरूप से पश्चिम बंगाल के कोलकाता के रहने वाले थे। इन्होंने हिंदू स्कूल, प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की।
- सत्येंद्रनाथ टैगौर की शादी ज्ञानदानंदिनी देवी के साथ 1859 में हुई थी। इनके बच्चों के नाम सुरेंद्र नाथ टैगौर व इंदिरा थे।
भारत में कब शुरू हुई सिविल सेवा परीक्षा?
भारत में संघ लोक सेवा आयोग की ओर से साल 1922 में पहली बार सिविल सेवा परीक्षा आयोजित की गई। हालांकि तब इसका नाम इंडियन इंपेरियल सर्विसेज था। कुछ साल बाद बदलकर सिविल सेवा परीक्षा किया गया। बाद में इसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय वन सेवा और भारतीय विदेश सेवा जैसे कई सर्विस कैडर बने।
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