Chunavi किस्सा: 1984 का चुनाव में हारे, फिर 12 साल के भीतर में बने देश के PM, जानें कौन थे वो 3 दिग्गज नेता
Lok Sabha Election Chunavi Kisse: लोकसभा चुनाव 2024 में जहां एक बार फिर भाजपा केंद्र में सरकार बनाने के लिए '400 पार' के नारे के साथ पूरी ताकत से प्रचार में जुटी है तो दूसरी तरफ विपक्ष का इंडिया गठबंधन भी भाजपा को टक्कर देने के लिए मैदान में है।
हालांकि चुनावों में ऐसा भी संभव होता है, जब दिग्गज नेताओं को भी हार का मुंह देखना पड़ता है। ऐसा ही एक चुनावी किस्सा 1984 के लोकसभा चुनाव का है, जब इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस ने सत्ता में प्रचंड जीत के साथ वापसी की थी। तब देश के तीन दिग्गज नेताओं को इस चुनाव में हार झेलनी पड़ी थी।

चुनावी किस्से में आज बात होगी। लोकसभा चुनाव के ऐसे संयोग की, जिसमें देश के तीन राष्ट्रीय नेता चंद्रशेखर, अटल बिहारी वाजपेयी और पीवी नरसिंह राव हार गए थे। लेकिन यहां दिलचस्प बात यह है कि ये तीनों नेता इलेक्शन में हार झेलने के 12 सालों के अंदर देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर काबिज हुए।
बलिया से हारे थे चंद्रशेखर
1984 के आम चुनाव में जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चंद्रशेखर अपनी परंपरागत सीट बलिया से चुनावी मैदान में थे, लेकिन उनको हार झेलनी पड़ी। उनको कांग्रेस के जगन्नाथ चौधरी ने 53,940 वोटों के अंतर से हराया था। हालांकि बाद में वो 1990 में देश के प्रधानमंत्री बने।
पीवी नरसिंह राव को भी हारे
इस लिस्ट में कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व गृह मंत्री पीवी नरसिंह राव का नाम भी शामिल है। 1984 में संयुक्त आंध्र प्रदेश की हनमकोंडा सीट पर पीवी नरसिम्हा राव को भाजपा उम्मीदवार चंदूपातला जंगा रेड्डी ने 54,198 मतों के अंतर से हराया था। इसके बाद में 1991 में नरसिंह राव देश के प्रधानमंत्री बने।
अटल बिहारी वाजपेयी की हुई थी हार
इस कड़ी में भाजपा के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी भी चुनाव में हार के शिकार हुए थे। उन्होंने ग्वालियर से चुनाव लड़ा था। जिनको कांग्रेस के माधवराव सिंधिया ने बड़े अंतर से चुनाव में शिकस्त दी। बता दें कि इसके बाद 1996 में अटल बिहारी बाजपेयी प्रधानमंत्री बने।












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