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'हां, मैं नेपो किड हूं, इस सच से मुंह नहीं मोड़ सकता', नेता का बेटा होने पर छलका चिराग पासवान का दर्द

Union minister Chirag Paswan News: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने 'भाई-भतीजावाद' यानी नेपोटिज्म पर अपना पक्ष रखा है। चिराग पासवान ने कहा है कि लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान बेटा होने पर उन्हें गर्व है लेकिन एक दिग्गज राजनेता बेटा होना, उनके लिए दोधारी तलवार पर चलने जैसा है।

चिराग पासवान ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा है कि वह एक प्रभावशाली राजनेता के बेटे हैं, लेकिन इसके साथ ही कई चुनौतियां भी हैं। चिराग पासवान ने एक 'नेपो किड' होने की खामियों पर बात की है।

Union minister Chirag Paswan News

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चिराग पासवान ने बताया दिग्गज नेता का बेटा होना 'दोधारी तलवार' पर चलने जैसा

चिराग पासवान ने कहा,

''मैंने माना कि मैं, एक नेपो किड्स हूं। मैं इसको स्वीकार में झिझकता नहीं हूं। मैं इसे कैसे झूठला सकता हूं। मैं इस सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ सकता। मुझे तो मुझे गर्व है कि मैं रामविलास पासवान का बेटा हूं। मेरे लिए यह गर्व की बात है। अब मैं जिस प्रोफेशन में हूं...इसमें नेपो किड कहलाया जाता हूं। लेकिन मैं क्या करूं, मैं तो दूसरी करियर भी चुना था लेकिन उसमें कुछ नहीं हुआ। अब नेपो किड्स को कुछ और आता ही नहीं...क्योंकि आप घर पर यही सारी चीजें देखकर बड़े हुए हैं। लेकिन हम लोग ऐसी दोधारी तलवार पर चलते हैं ना, एक नेपो किड होने के नाते, अगर आप अच्छा काम करते हैं, तो लोग कहते हैं कि यह आपके माता-पिता की वजह से है। इसलिए इसका श्रेय आपको नहीं जाता। लेकिन, अगर आपने मां-बाप जैसा काम नहीं किया तो आपको गालियां सुनने को मिलती हैं कि, देखो, अपने माता-पिता की बनाई इज्जत खराब कर दी। इसलिए आप हमेशा दोधारी तलवार पर होते हैं।''

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चिराग पासवान ने कहा- मुझे कदम-कदम पर खुद को साबित करना पड़ा है

चिराग पासवान अब मोदी 3.0 कैबिनेट में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हैं। चिराग पासवान ने कहा कि, ''पार्टी के नेता के रूप में उनका उदय आसान या डिफॉल्ट नहीं था। उन्हें अपने पिता द्वारा स्थापित अविभाजित पार्टी में विभाजन के बाद शीर्ष पर पहुंचने और खुद को साबित करने के लिए संघर्ष करना पड़ा। मुझे कदम-कदम पर खुद को साबित करना पड़ा है।''

बता दें कि चिराग के चाचा और रामविलास पासवान के भाई पशुपति पारस पार्टी विभाजन के पीछे व्यक्ति थे, जिन्होंने चिराग की राजनीतिक यात्रा को खत्म करने की धमकी दी थी। 2020 में रामविलास पासवान के निधन के बाद पशुपति पारस ने लोजपा की कमान संभाली।

चिराग पासवान ने कहा- मैं सबकुछ खो दिया था

चिराग पासवान ने कहा, "मैंने सबकुछ खो दिया था, पार्टी, चुनाव चिह्न, संगठन और वह घर जिसमें हम तीन दशकों तक रह रहे थे, मेरे पास कुछ भी नहीं था। इसलिए मुझसे सबकुछ छीन लिया गया। मुझे बिल्कुल नए सिरे से शुरुआत करनी पड़ी, मुझे यह भी नहीं पता था कि नई पार्टी कैसे बनाई जाती है।''

चिराग ने कहा कि यह उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी चुनौती थी क्योंकि कई लोगों ने उन्हें खारिज कर दिया और उन्हें दरकिनार कर दिया। लेकिन, उन्होंने दृढ़ निश्चय किया और 2021 में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का गठन किया। पार्टी ने अब 2024 के लोकसभा चुनावों में एनडीए सहयोगी के रूप में लड़ी गई सभी पांच सीटों पर जीत हासिल कर ली है।

चिराग अब केंद्रीय मंत्रिमंडल में वही विभाग संभाल रहे हैं जो उनके पिता के पास था और उन्होंने खुद को "मोदी का हनुमान" कहा है।

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