IndiaToday Axis poll: चिराग ने 7 फीसदी वोट खाकर तय किया नीतीश के राजनीतिक जीवन में अंधेरा

नई दिल्ली। बिहार विधानसभा के तीनों चरणों का मतदान खत्म होने के साथ ही न्यूज चैनलों और सर्वे एजेंसियों के एग्जिट पोल के नतीजे आने लगे हैं। ज्यादातर सर्वे में तेजस्वी यादव की लहर चली है जबकि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के नेतृत्व वाले एनडीए काफी पीछे है। नीतीश की अंतिम मार्मिक अपील के बावजूद उन्होंने उनका अंत भला नहीं होने दिया। EXiT Poll से ऐसा लगता है।

Nitish Chirag

इंडिया टुडे एक्सिस माय के एग्जिट पोल के नतीजों में महागठबंधन को 139 से 161 सीटें मिलती दिखाई गई हैं। वहीं नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए 69 से 91 सीटों के बीच सिमटता नजर आ रहा है। एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ी चिराग पासवान की लोजपा को एग्जिट पोल में 3 से 5 सीटें मिली हैं तो उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व वाले GDSF को भी 3 से 5 सीटें ही मिलती नजर आ रही हैं।

चिराग का बाहर जाना पड़ा भारी
एग्जिट पोल के नतीजों पर नजर डालें तो साफ नजर आ रहा है कि चिराग पासवान को बाहर रखने की एनडीए को भारी कीमत चुकानी पड़ी है। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) हालांकि खुद तो केवल 3 से 5 सीट के बीच ही सिमटती नजर आ रही हैं लेकिन उसे मिले वोटों ने नीतीश कुमार की फिर से सीएम बनने की उम्मीदों को अंधेरे में धकेल दिया है।

एग्जिट पोल के मुताबिक 139-161 सीट पाने वाले महागठबंधन को 44 प्रतिशत वोट मिले हैं जबकि 39 प्रतिशत वोट के साथ एनडीए को 69-91 सीटें मिलती नजर आ रही हैं। वहीं चिराग पासवान की लोजपा को 7 प्रतिशत वोट मिले हैं। अगर लोजपा का वोट शेयर (7%) अगर एनडीए (39%) के साथ जुड़ता तो ये बढ़कर 46 प्रतिशत होता जो कि महागठबंधन (44%) से दो प्रतिशत अधिक होता। चुनाव के पहले लोजपा एनडीए से अलग न हुई होती तो शायद आज स्थिति कुछ बदली हुई होती। एग्जिट पोल से मिलते जुलते नतीजे ही अगर 10 नवम्बर को आते हैं तो नीतीश कुमार शायद चिराग पासवान से बात न करने को इस चुनाव की सबसे बड़ी गलती मानेंगे। फिलहाल तो एग्जिट पोल के नतीजों ने तो एनडीए की खुशियों पर विराम तो लगा ही दिया है।

बीजेपी के बागी लड़े लोजपा के टिकट पर
इस चुनाव में चिराग पासवान की लोजपा सिर्फ अलग ही नहीं लड़ी बल्कि उसकी रणनीति ने बीजेपी के वोटरों में बड़ा ही कन्फ्यूजन भी पैदा किया। चिराग ने अधिकांश उन्हीं सीटों पर उम्मीदवार उतारे जो सीटें जेडीयू के हिस्से में गईं। इसके साथ ही बड़ी संख्या में बीजेपी के नाराज नेता लोजपा में शामिल हो गए और जेडीयू के हिस्से वाली सीटों पर लोजपा के टिकट से चुनाव में उतरे। इनमें भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह और रामेश्वर चौरसिया जैसे बड़े नेता भी रहे। इसके चलते बीजेपी के वोटरों में भारी कन्फ्यूजन की स्थिति रही।

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