रिक की बैठक में हिस्सा लेने भारत पहुंचे चीन के विदेश मंत्री, NSG सदस्यता पर होगी चर्चा
डोकलाम गतिरोध के बाद किसी उच्चस्तरीय चीनी अधिकारी की ये पहली भारत यात्रा है।
नई दिल्ली। चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत पहुंच गए हैं। वो आज नई दिल्ली में होने जा रही रूस, भारत, चीन (रिक) के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। बैठक के दौरान तीनों विदेश मंत्री साझा चिंता के बड़े अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे तथा त्रिपक्षीय सहयोग को गहरा करेंगे। चीन सरकार की तरफ से कहा गया है कि 'हमारा मानना है कि तीनों पक्षों के संयुक्त प्रयासों के तहत बैठक के अपेक्षित परिणाम निकलेंगे'। वहीं चीन के विदेश मंत्री वांग यी शीर्ष भारतीय अधिकारियों के साथ वार्ता भी करेंगे।

डोकलाम गतिरोध के बाद पहली यात्रा
डोकलाम गतिरोध के बाद किसी उच्चस्तरीय चीनी अधिकारी की ये पहली भारत यात्रा है। डोकलाम गतिरोध 73 दिन तक चला था और यह चीनी सैनिकों द्वारा भारत के चिकन नेक कॉरिडोर के पास अपना निर्माण कार्य रोके जाने के बाद 28 अगस्त को खत्म हुआ था। भारत, रूस और चीन के विदेश मंत्रियों की बैठक में NSG में भारत की सदस्यता को लेकर चर्चा होने की संभावना है। पर चर्चा होने की पूरी संभावना है।आपको बता दें कि NSG में भारत की सदस्यता को लेकर चीन के रुख में अभी भी कोई बदलाव नहीं आया है। चीन के विदेश मंत्री गेंग शुआंग ने कहा था कि इस विषय में चीन का दृष्टिकोण जस-का-तस है। चीन इसके पक्ष में है कि इस मामले में सरकारों के बीच पारदर्शी और निष्पक्ष बातचीत के जरिए आम सहमति के सिद्धांत का पालन किया जाए।

भारत के NSG सदस्यता पर होगी चर्चा
न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) का सदस्य बनने के लिए चीन कई सालों से भारत के लिए अड़ंगा बना हुआ है। चीन हमेशा NSG का सदस्य बनने के लिए भारत का विरोध करते हुए आया है और इसको लेकर बीजिंग के रवैया में कोई बदलाव नहीं देखने को मिला है। NSG को लेकर रूस ने गुरुवार को स्पष्ट कर दिया था कि वो भारत का समर्थन करेगा। रूस के अनुसार पाकिस्तान की तुलना भारत से नहीं की जा सकती है। नई दिल्ली पहुंचे रूस के उप-विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने कहा कि परमाणु परीक्षण के मामले में भारत का परमाणु अप्रसार का शानदार रिकॉर्ड है, जबकि पाकिस्तान के बारे में ऐसा नहीं का जा सकता है।

चीन हमेशा लगाता है अड़ंगा
चीन का विरोध करने का कारण भारत का एनपीटी (Nuclear Non-Proliferation Treaty) पर हस्ताक्षर नहीं करना है। चीन का कहना है कि जब तक भारत एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं करेगा, तब तक विरोध जारी रहेगा। चीन के इस रवैये का कारण भारत और चीन के द्विपक्षीय रिश्तों पर भी कई बार विपरित असर पड़ा है। चीन की दलील है कि जो भी नॉन-एनपीटी देश इस ग्रुप का हिस्सा बनना चाहते हैं वो देश परमाणु हथियारों से मुक्त होना जरूरी है। चीन को लगता है कि एनएसजी में भारत को सदस्यता मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख बढ़ेगी। एनएसजी का सदस्य बनने के बाद भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के लिए भारत अपनी बात रखेगा।












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