भारत से गए बंदर पर चीन ने किया Coronavirus के वैक्सीन का प्रयोग, सफलता का दावा

नई दिल्ली- दुनिया में कोरोना वायरस का प्रकोप चरम पर है। अब तो भारत में भी मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन, चीन में जहां से वायरस की शुरुआत हुई थी वहां मामले थम से गए हैं। वहां सिर्फ 17 केसों के साथ मामले कुल 82,886 तक पहुंचे हैं। इस दौरान चीन ने कोविड-19 से बचाव के लिए एक वैक्सीन बनाने को लेकर बड़ा दावा किया है। चीन की एक दवा बनाने वाली कंपनी ने कहा है कि उसने अपनी वैक्सीन का बंदरों पर बहुत ही सटीक प्रयोग किया है। बड़ी बात ये है कि चीन ने जिस प्रजाति के बंदर पर इसके सफल प्रयोग का दावा किया है वह भारत से ही चीन तक पहुंचा है।

चीन ने भारत से गए बंदरों पर किया कोरोना का टेस्ट

चीन ने भारत से गए बंदरों पर किया कोरोना का टेस्ट

बीजिंग स्थित साइनोवैक बायोटैक ने कोरोना वायरस की वैक्सीन पिकोवैक (PiCoVacc) तैयार की है और पहली बार ऐसा हुआ है कि जानवर पर इसका प्रयोग सफल रहा है। चीन ने इस वैक्सीन का प्रयोग रीसस मकाक नाम की बंदर की एक प्रजाति पर किया है, जो भारत से ही दुनिया भर में गई है। ये जानकारी 6 मई को एक साइंस मैगजीन में प्रकाशित हुई है। चीन का दावा है कि जानवरों पर किया गया नोवल कोरोना वायरस का पहला प्रयोग पूरी तरह से कामयाब रहा है। बता दें कि बंदर पर किए गए इस प्रयोग को दुनिया में क्लीनिकल ट्रायल के बाद पहला सफल प्रयोग माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक साइनोवैक बायोटैक के शोधकर्ताओं ने 11 मरीजों से 11 वायरस निकाल लिए। इन मरीजों में 5 चीन के, तीन इटली के और एक-एक स्वीटजरलैंड, यूके और स्पेन के मरीज शामिल हैं। इस परीक्षण के लिए वैज्ञानिकों ने वायरस को प्रयोग में इस्तेमाल होने वाले बंदरों के शरीर में डाला, ताकि उसका इम्यून सिस्टम खुद से एंटीबॉडी पैदा करे। ये एंटीबॉडी शरीर में मौजूद सामान्य वायरस को भी मार सकता है।

काम कर रही है वैक्सीन- साइनोवैक बायोटैक

काम कर रही है वैक्सीन- साइनोवैक बायोटैक

शोधकर्ताओं ने 8 रीसस मकाक बंदरों को वैक्सीन के दो अलग-अलग डोज दिए। तीन हफ्ते बाद उन्होंने बंदरों के फेफड़ों में नोवल कोरोना वायरस डाल दिया। लेकिन, जिन बंदरों के समूह को वैक्सीन दिया गया था उनमें बहुत ज्यादा इंफेक्शन नहीं दिखाई दिया, जिससे पता चल गया कि वैक्सीन काम कर गया है। जबकि, जिन बंदरों को पहले पिकोवैक वैक्सीन नहीं दी गई थी, उनपर वायरस असर कर गया और गंभीर रूप से न्यूमोनिया से पीड़ित हो गए। आगे की शोध में यह बात सामने आई कि इस वैक्सीन से जो एंटीबॉडी तैयार होता है वह 10 तरह के नोवल कोरोना वायरसों को रोक सकता है। इससे वैज्ञानिकों को उम्मीद जगी है कि यह उन सारे तरह के नोवल कोरोनावायरों को रोकने में सक्षम है जिन्होंने पूरी दुनिया में तबाही मचा रखी है।

दुनिया भर में चल रहे हैं क्लीनिकल ट्रायल

दुनिया भर में चल रहे हैं क्लीनिकल ट्रायल

यह रिपोर्ट इंस्टीट्यूट ऑफ लैबोरेटरी एनिमल साइंसेज, चाइनीज एकैडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज और पेकिंग यूनियन मेडिकल कॉलेज और साइनोवैक बायोटैक की ओर से साझा तौर पर तैयार की गई है। मौजूदा वक्त में सात देशों में कोविड-19 की वैक्सीन पर क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है। इमें चार चीन में, एक अमेरिका में, एक यूनाइटेड किंगडम मे और एक साझा रूप से अमेरिका और जर्मनी में। इसके अलावा इटली और इजरायल में भी वैक्सीन विकसित करने के दावे किए जा रहे हैं।

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