कब्जे वाले अक्साई चिन में चीन बना रहा हेलीपोर्ट, अंडरग्राउंड कमांड सेंटर, सेटेलाइट इमेज से खुलासा

नई दिल्ली। चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी लगातार पूर्वी लद्दाख के कब्जे वाले इलाके में पिछले नौ महीने से अपना इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने में लगी हुई है। वहीं हाल में तिब्बत, शिनजियांग के भारतीय सीमा से सटे क्षेत्रों की सेटेलाइट तस्वीरों के अध्ययन से पता चला है कि चीनी सेना ने इन तीन महीनों में पूर्वी लद्दाख के इलाके में अपना सैन्य ढांचा सुदृढ़ करने में तेजी लाई है।

एलएसी के बेहद करीब है हेलीपोर्ट

एलएसी के बेहद करीब है हेलीपोर्ट

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक सेटेलाइट तस्वीरों से ये संकेत मिलता है कि चीन ने 2019 की शुरुआत में ही लद्दाख में प्रवेश की योजना बना ली थी। खबर के मुताबिक सेटेलाइट तस्वीरों से पीपल्स लिबरेशन आर्मी के सबसे ताजा निर्माण के बारे में पता चला है। पीएलए लद्दाख के कब्जे वाले इलाके में जिसे अक्साई चिन कहा जाता है, एक हेलीपोर्ट का निर्माण कर रहा है।

16,700 फीट की ऊंचाई पर बन रहा ये हेलीपोर्ट भारत के दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) एयरबेस के दूसरी तरफ है। चीन के इस हेलीपैड की खास बात यह है कि इसे वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के बेहद ही पास बनाया जा रहा है। साथ ही यह दरबुक-श्योक-डीबीओ रोड से 255 किमी की दूरी पर है। डीएस-डीबीओ रोड को ही इस साल मई में दोनों देशों के बीच शुरू हुई तनाव की मुख्य वजह बताया जाता है। ये रोड एलएसी के साथ ही चलते हुए लेह को दौलत बेग ओल्डी एयरबेस से जोड़ती है। यही वजह है इसका रणनीतिक महत्व बहुत हो जाता है। दरबुक-श्योक गांव से निकलकर दौलत बेग ओल्डी तक जाने के कारण ही इसे डीएस-डीबीओ रोड भी कहा जाता है।

अगस्त 2019 में ही हो चुकी थी तैयारी

अगस्त 2019 में ही हो चुकी थी तैयारी

दौलत बेग ओल्डी एयरबेस और यह नई रोड एलएसी के बेहद ही करीब है जिसके चलते भारत रणनीतिक बढ़त मिलती है। इसी बात से चीन चिढ़ा हुआ है।

हालिया सेटेलाइट तस्वीरें ये इशारा करती हैं कि पीएलए लड़ाई वाले क्षेत्र में हेलीपोर्ट को बना कर रहा है। हेलीपोर्ट एरिया को अगस्त 2019 में मार्क किया गया था और यहां पर अक्टूबर 2019 में हेलीपोर्ट बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई थी।

इंडिया टुडे के मुताबिक हेलीपोर्ट के लिए जगह का चुनाव और तैयारियां भले ही 2019 में ही कर ली गई थीं लेकिन सेटेलाइट तस्वीरें बताती हैं कि पहला निर्माण अप्रैल 2020 में ही शुरु हो पाया था। हेलीपोर्ट का निर्माण संयोग से उसी समय चल रहा था जब चीन का सैन्य निर्माण शुरु हुआ था। चीन का ये निर्माण केवल भारत के सड़क निर्माण के जवाब में की गई कोई कार्रवाई नहीं थी बल्कि चीन ने इसे भारत के खिलाफ एक पूरी तरह से रणनीतिक नजरिया रखते हुए मध्य अप्रैल में शुरू किया था। इसके लगभग तीन सप्ताह बाद ही दोनों देशों में संघर्ष हुआ था।

हेलीपोर्ट पर 1000 मीटर लंबा रनवे

हेलीपोर्ट पर 1000 मीटर लंबा रनवे

निर्माण कार्य में तेजी 2020 मई से आई जब इस इलाके में भारी बुल्डोजर्स ने जमीन को समतल करना शुरू किया और आस-पास के इलाकों का साफ करना शुरू किया। वहीं पिछले तीन महीनों में इसका निर्माण कार्य और तेज किया गया है जबकि सीमा पर तनाव कम करने के लिए दोनों देशों की सेनाओं के बीच बातचीत चल रही है।

सेटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि हेलीपोर्ट पर 1000 मीटर का रनवे बनाया जा रहा है। हालांकि अभी सर्दियों के चलते सिर्फ 700 मीटर का ही रनवे ही पूरा हो सका है। इस रनवे के साथ में 600 मीटर के एरिया में एक D आकार का टैक्सी मार्ग बनाया गया है। इस टैक्सीमार्ग के पास 8 एरिया चिह्नित किए गए हैं जिनमें जहाजों और एयरक्राफ्ट को रखने के लिए 24 हैंगर का निर्माण किया जाएगा। इसके पूर्वी क्षेत्र को बड़े ट्रांसपोर्ट हेलीकॉप्टर के लिए चिह्नित किया गया है। इसे एयरक्राफ्ट को रिपेयर करने के लिए भी विकसित किया जा सकता है।

अंडरग्राउंड कमांड और कंट्रोल सेंटर

अंडरग्राउंड कमांड और कंट्रोल सेंटर

चीन की योजना इस कब्जे वाले क्षेत्र में एक विकसित और मजबूत हेलीपोर्ट निर्माण की है। यही वजह है कि पीएलए यहां पर एक अंडरग्राउंड कमांड और कंट्रोल सेंटर बना रहा है। इसे मुख्य बिल्डिंग के ठीक बनाये जाने की योजना है। सेटेलाइट तस्वीरें बताती हैं कि अंडरग्राउंड कंस्ट्रक्शन इसी साल अगस्त में शुरू किया गया है। अंडरग्राउंड कंस्ट्रक्शन को काफी बड़ी बताया जा रहा है। इसके तहत जमीन के अंदर आधुनिक सुविधाओं से युक्त पूरा कॉम्प्लेक्स होगा।

चीन के साथ भारत के तनाव (India-China Conflict) के बीच पूर्वी लद्दाख इलाके में में भारत की सेना चीन को किसी भी स्थिति में जवाब देने के लिए इस कड़ाके की ठंड में डटी हुई है। चीन इस इलाके में कई बार एलएसी में बदलाव की कोशिश कर चुका है जिसका रक्षा बलों ने जोरदार जवाब दिया है।

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