एशिया में पानी का गणित और चीन की बादशाहत
नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच जो मुलाकात नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में हुई, उसका एक एजेंडा वॉटर मैनेजमेंट भी था। भारत की ओर से चीन के रिवर मैनेजमेंट को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है।

चीन एशिया में पानी का बादशाह है और वह दुनिया में एक अनोखा देश है जिसके पास दुनिया की सबसे बड़ी नदियों का मालिकाना हक है।
मशहूर रणनीतिकार ब्रहृम चेलानी ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया प्रेस के लिए एक खास लेख लिखा है।
इस लेख में उन्होंने बताया है कि आखिर क्यों चीन, उसके पास मौजूद पानी को लेकर इतना इठलाता है और उसके पास मौजूद इस अपार धन को देखकर दुनिया के कई देशों को उससे जलन भी होती है।
एक दर्जन देशों की नदियां चीन में
ब्रहृम चेलानी ने अपने इस लेख में लिखा है कि एशिया का जो वॉटर मैप है उसे देखने पर साफ पता चलता है कि चीन एशिया में अजीब और फायदेमंद स्थिति में हैं।
चीन ने किसी भी दूसरे कांटिनेंट की तुलना में एशियाई क्षेत्र में अपनी एक अहमियत कायम कर डाली है। वर्ष 1951 में तिब्बत का एक बड़ा क्षेत्र अपने कब्जे में करने के बाद चीन का कब्जा कई बड़ी नदियों पर हो गया है। बीजिंग से सटा झिनझियांग में कई बड़ी नदियों जैसे इर्तिश और ली
नदियां स्थित हैं।
चीन करीब एक दर्जन देशों में बहने वाली नदियों का अहम स्त्रोत है। दुनिया का कोई भी देश इस समय इस कदर नदियों से नहीं घिरा हुआ है, जितना कि चीन। चीन की नदियों की वजह से वह एशिया कई देशों के लिए चीन के साथ बेहतर संबंध काफी महत्वपूर्ण हैं।
किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं
एक जो सबसे अहम बात है वह है कि चीन ने किसी भी तरह की वॉटर शेयरिंग अरेंजमेंट्स या फिर आपसी सहयोग के लिए कोई भी संधि नहीं साइन की है।
चीन ने वर्ष 1995 में मेकांग एग्रीमेंट साइन करने से इंकार कर दिया था और इसकी वजह से चीन अपने यहां की नदियों पर विशाल बांध बना रहा है।
साथ ही सीमा से सटे इलाकों में स्थित नदियों पर अपना कब्जा कर रहा है। ब्रहृम चेलानी के मुताबिक चीन कई बड़ी नदियों को बहाव मोड़ने की प्रक्रिया पर भी काम कर रहा है।
चीन ने कई बड़े बांध अपने यहां पर निर्मित कर डाले हैं और कहीं न कहीं इन बांधों की वजह से चीन की आर्थिक सूरत बदल गई है।
चीन के यह बांध कई तरह के कार्यों को करते हैं जैसे बिजली बनाना, मैन्यूफैक्चरिंग के लिए पानी की आपूर्ति, माइनिंग, सिचाईं और घर के कामों के लिए भी इनसे पानी की आपूर्ति की जाती है।
चीन ने कई देशों में भी बांध बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसकी वजह से भी कई देशों में विवाद की स्थिति पैदा हो गई है।
नदियों का गणित भी जानें
एशियन कांटिनेंटल में रीवर बेसिन हैं, वह संधियों के तहत काम करते हैं। जो एग्रीमेंट्स हुए हैं वह कुछ इस तरह से हैं-
लेबनान-सीरिया: अल असी/ ओरोंटेस, अल-काबेर
इरान-रूस: आराकास/ अतरेक
इराक-सीरिया: इयूफेरातेस
भारत-नेपाल: गंडक
भारत-बांग्लादेश- गंगा
भारत-पाकिस्तान: इंडस
इजरायल-जॉर्डन: जॉर्डन
भारत-नेपाल: महाकाली
इसके अलावा कुछ नदियों जैसे गंडक, जॉर्डन और महाकाली के बेसिन के साथ पानी बांटने जैसी कोई भी व्यवस्था नहीं है।
लेकिन दो पक्षों के बीच कभी कभी किसी खास नदी के पानी को लेने के लिए, उस पर अधिकार या फिर उसके प्रयोग के लिए हक जताया जाता रहता है।












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