India China tension: गलवान घाटी में चीन के सैंकड़ों सैनिक, भारी उपकरण भी तैनात
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच जब गलवान घाटी में तनाव कम करने पर चर्चा हो रही थी, उसी समय चीनी सेना धोखा देने की तैयारी कर रही थी। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने गलवान घाटी में सैंकड़ों सैनिकों को दाखिल कराया है। इसके साथ ही निर्माण से जुड़े भारी उपकरण भी गलवान घाटी में भेज दिए गए हैं। लेटेस्ट सैटेलाइट तस्वीरों और ग्राउंड से जो रिपोर्ट आ रही है, उससे भी इसी बात की पुष्टि होती है।

चीन ने तोड़े सारे नियम
बुधवार को भारत और चीन के बीच मेजर जनरल स्तर की वार्ता हुई है। इस वार्ता का मकसद तनाव को कम करना था लेकिन बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका है। इससे कहीं न कहीं यह इशारा है कि चीन किसी भी तरह से डिसइंगेजमेंट के लिए राजी नजर नहीं आता है। आने वाले दिनों में और दौर हो सकते हैं ताकि कोई हल निकाला जा सके। सूत्रों के हवाले से इकोनॉमिक टाइम्स ने लिखा है कि शुरुआत में जो वार्ता हुई थी उसमें यह फैसला लिया गया था कि दोनों पक्ष एक-एक किलोमीटर तक दूर हटेंगे और साथ ही घाटी में अस्थायी तौर पर 'नो मैन्स लैंड' होगा। चीनी पक्ष की तरफ से इसका उल्लंघन तो किया ही गया,साथ ही उसने भारत के क्षेत्र में पेट्रोलिंग प्वाइंट (पीपी) 14 पर अतिरिक्त जवानों को तैनात कर दिया। बताया जा रहा है कि इन्हीं अतिरिक्त जवानों ने सोमवार 15 जून को भारत की पेट्रोलिंग टीम पर हमला किया था जिसमें कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) समेत 20 जवान शहीद हो गए थे।
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मंगलवार को सामने आई नई तस्वीरें
मंगलवार को जो सैटेलाइट तस्वीरें आई हैं, उसमें साफ नजर आ रहा है कि भारी संख्या में वाहनों का लाव-लश्कर जवानों, भारी उपकरणों जो निर्माण कार्य से जुड़े हैं, उन्हें फॉरवर्ड इलाकों में तैनाती के लिए ले जाया जा रहा है। इसमें टेंट भी शामिल हैं। सैटेलाइट इमेज के एक्सपर्ट्स की मानें तो गलवान नदी के करीब चीन की एक कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड मौजूद है। पिछले कुछ दिनों में चीन की तरफ से जवानों की तैनाती में इजाफा हुआ है। चीनी सैनिकों ने गलवान इलाके में तीन किलोमीटर अंदर तक घुसपैठ कर ली है। साथ ही उन्होंने दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (डीएसडीबीओ) सड़क को भी खतरा पैदा कर दिया है। चीनी जवान ऊंचाई पर हैं और इस वजह से अब इस सड़क पर खतरा उत्पन्न हो गया है।

चीन ने किया गलवान घाटी पर दावा
भारत की तरफ से चीन के उस दावे को सिरे से नकार दिया गया है जिसमें गलवान घाटी पर उसने अपना हक जताया है। भारत की तरफ से देर रात चीन के इस दावे पर विदेश मंत्रालय की तरफ से बयान जारी किया गया है। 15 जून सोमवार को रात में गलवान घाटी में चीनी जवानों ने अचानक भारतीय सेना की पेट्रोलिंग टीम पर हमला बोल दिया था। गलवान घाटी और लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर कुछ हिस्सों को लेकर भारत और चीन के बीच काफी मतभेद हैं और इसी वजह से अक्सर दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ जाती हैं। बुधवार देर रात करीब एक बजे भारत की तरफ से चीन के दावे को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी गई। विदेश मंत्रालय ने चीन के गलवान घाटी पर किए गए दावे को 'अतिशयोक्तिपूर्ण और अपुष्ट' दावा करार दिया है।

पीएलए के कर्नल ने सबसे पहले दिया बयान
पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के प्रवक्ता कर्नल झांग शुइली पहले ऐसे मिलिट्री ऑफिसर हैं जिन्होंने गलवान घाटी पर अपना हक जताया। पीएलए की वेस्टर्न थियेटर कमांडर के प्रवक्ता कर्नल झांग ने ठीक उस समय गलवान घाटी पर दावा ठोंक दिया जब इंडियन आर्मी की तरफ से यहां पर हिंसक टकराव की पुष्टि की गई। चीन के विदेश मंत्रालय की तर्ज पर ही कर्नल झांग ने कहा भारतीय सेना के जवानों ने एलएसी को पार किया। वह साथ ही यह बात भी जोर देकर कहते रहे कि गलवान घाटी पर चीन का संप्रभु अधिकार है। बुधवार को चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि गलवान घाटी का इलाका चीन की संप्रभुता के तहत आता है। इसके साथ ही चीन ने भारत को चेतावनी दी है कि वह सही रास्ते पर आकर इस मसले को सुलझाए।












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