भारतीय बच्चों के मोटापे में सालाना 9% से अधिक वृद्धि की आशंका, World Obesity Day से पहले आई रिपोर्ट
भारतीय बच्चों और किशोरों में मोटापा खतरनाक ढंग से बढ़ रहा है। व्यस्कों की स्थिति भी खराब हो रही है। विश्व मोटापा दिवस से पहले यह रिपोर्ट आई है, जिसके मुताबिक इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान है।

भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में मोटापा एक बहुत गंभीर समस्या बनकर उभरा है। हर साल 4 मार्च को 'विश्व मोटापा दिवस' मनाया जाता है। उससे पहले एक शोध की रिपोर्ट आई है, जो हर उम्र के लोगों के लिए चिंताजनक है। इसमें भारतीय बच्चों में बढ़ रहे मोटापे को लेकर पूरा खाका दिया गया है। साथ ही आगाह किया गया है कि अगर अभी से बचाव के उपाय नहीं अपनाए गए तो भविष्य चौपट हो सकता है। इस रिपोर्ट में भारत समेत पूरी दुनिया के व्यस्कों में भी बढ़ रहे मोटापे का पूरा ब्योरा दिया गया है और यह भी कहा गया है कि इससे रक्षा के लिए क्या किए जा सकते हैं।

भारतीय बच्चों में खतरनाक ढंग से बढ़ रहा है मोटापा-रिपोर्ट
अगर रोकथाम नहीं की गई और हालात बेहतर करने की कोशिशें नहीं हुईं तो 2035 तक भारतीय बच्चों में मोटापा सालाना 9.1% की दर से बढ़ सकता है। विश्व मोटापा दिवस से ठीक पहले यह एक ग्लोबल स्टडी जारी की गई है। हर साल 4 मार्च को विश्व मोटापा दिवस मनाया जाता है, जिसका मकसद लोगों को सेहतमंद जीवन लायक वजन नियंत्रित रखने के लिए प्रेरित करना है। क्योंकि, मोटापा एक वैश्विक संकट है। विश्व मोटापा संघ का अनुमान है कि अगर ज्यादा वजन को नियंत्रित करने के उपाय नहीं किए गए तो 12 साल के अंदर दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी का वजन मानक से ज्यादा हो जाएगा।

ये सारे लोग भी हो जाएं सावधान!
इसके अनुसार 2035 तक भारत में करीब 11 फीसदी लोग मोटे हो चुके होंगे, क्योंकि इसमें 2020 से 2035 के बीच में व्यस्कों के मोटापे में सालाना 5.2 की बढ़ोतरी का अनुमान जताया गया है। 'वर्ल्ड ओबीसिटी एटलस 2023' के अनुसार 2020 में भारतीय लड़कों में मोटापे का खतरा 3 फीसदी था। लेकिन, 2035 तक यह बढ़कर 12 फीसदी हो सकता है। इसी तरह लड़कियों के मामले में 2020 में यह खतरा सिर्फ 2 फीसदी था। लेकिन, अगले 12 साल में यह 7 फीसदी तक पहुंच सकता है। इसी रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय महिलाओं को 2020 में मोटे होने का जोखिम 7 फीसदी था, जो कि 2035 तक बढ़कर 13 फीसदी तक हो सकता है। वहीं पुरुषों का यह जोखिम इसी अवधि में 4 फीसदी से बढ़कर 8 फीसदी तक होने का खतरा है।

भारत में मोटापा बढ़ने के कारण
इस रिपोर्ट के मुताबिक अगर मोटापे की रोकथाम नहीं हुई, इसका उपचार नहीं किया गया तो यह अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करेगा। 2035 तक इसकी वजह से भारत की जीडीपी 1.8 फीसदी प्रभावित हो सकती है, वहीं वैश्विक जीडीपी के लिए यह अनुमान 4.32 ट्रिलियन डॉलर का है। कम आय वाले देशों में मोटापा बढ़ने के कारणों में प्रोसेस्ड फूड का इस्तेमाल बढ़ने, लाइफस्टाइल से सबंधित बदलाव, फूड सप्लाई और फूड मार्केटिंग को नियंत्रित करने की कमजोर नीतियां और वेट मैनेजमेंट को लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव और साथ ही साथ स्वास्थ्य शिक्षा की कमी बताया गया है।

'बच्चों और किशोरों में मोटापा बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है'
विश्व मोटापा संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर लुइस बउर ने कहा है, 'इस साल का एटलस एक स्पष्ट चेतावनी है कि आज अगर मोटापा पर गौर नहीं करेंगे, तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। खासकर ये बड़ी चिंता की बात ये है कि बच्चों और किशोरों में मोटापा बहुत ही तेजी से बढ़ता जा रहा है।' उन्होंने कहा, 'दुनियाभर में सरकारों और नीति नियंता युवा पीढ़ियों को स्वास्थ्य से संबंधित, सामाजिक और आर्थिक बोझ पड़ने से बचाने के लिए जो भी कर सकते हैं, करें।' उन्होंने सलाह दी है कि मोटापा कम करने के लिए युवाओं को सक्रियता के साथ समाधाम में शामिल करें और इसकी जड़ों तक तत्काल पहुंचें। उनके मुताबिक, 'अगर हम एक साथ अभी सक्रिय होंगे तो हमारे पास भविष्य में अरबों लोगों को मदद करने का अवसर है।'
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मोटापे से बचाव में कहां खड़े हैं हम ?
इस रिपोर्ट में तैयारियों को लेकर एक रैंकिंग तय की गई है। इसमें कम आय वाले देशों में औसत तैयारी रैंकिंग ज्यादा आय वाले देशों की 29/183 की तुलना में सिर्फ 154/183 है। रिपोर्ट के मुताबिक इस रैंकिंग में भारत 98/183 पर है, जिसे कि 'औसत' में रखा गया है। सबसे अधिक तैयार सारे सर्वश्रेष्ठ 10 देश यूरोप में हैं, जबकि सबसे फिसड्डी 10 देश अफ्रीकी हैं। (इनपुट-पीटीआई) (तस्वीरें- सांकेतिक)












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