'मुझे कभी कोई डरा नहीं पाया', चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने लगाई सीनियर वकील को फटकार

CJI Chandrachud: चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने सीनियर वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि मुझे कभी कोई डरा नहीं पाया है। अपने करियर के आखिरी दो सालों में मैं ऐसा होने भी नहीं दूंगा।

CJI DY Chandrachud

CJI Chandrachud: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी वाई चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष और सीनियर अधिवक्ता विकास सिंह को कड़ी फटकार लगाते हुए कोर्ट से बाहर निकल जाने के लिए कहा दिया। इतना ही नहीं चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने सख्त लहजे में कहा कि मुझे कभी कोई डरा नहीं पाया है।

जमीन आवंटन के मामले की सुनवाई

दरअसल, विकास सिंह सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के जमीन आवंटन मामले को लेकर कोर्ट में पेश हुए थे। उन्होंने आवंटित हुई 1.33 एकड़ जमीन को वकीलों के लिए चैंबर्स ब्लॉक में तब्दील किए जाने के मामले को लिस्ट किए जाने के लिए जिस लहजे में कोर्ट में पैरवी की, वो चीफ जस्टिस को पसंद नहीं आया और वकील को फटकार लगाई।

तुरंत अदालत छोड़ने का दिया आदेश

बार एंड बेंच के मुताबिक आवंटित भूमि मामले को लेकर वकील विकास सिंह ने कहा कि केस पिछली छह बार में लिस्ट नहीं हो पाया है। जिस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि इसे सामान्य प्रक्रिया में सूचीबद्ध किया जाएगा। इस पर वकील ने कहा कि तब मुझे इस मामले को आगे बढ़ाना होगा और आपके घर आना पड़ेगा। इससे चीफ जस्टिस काफी नाराज हो गए और उन्होंने कहा कि सिंह को तुरंत अदालत छोड़ने का आदेश दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्हें डराया नहीं जाएगा और सिंह के साथ अन्य वादी की तरह ही व्यवहार किया जाएगा।

'आखिरी दो सालों में मैं ऐसा होने भी नहीं दूंगा'

विकास सिंह से बोले आप एकदम चुप रहिए और बैठ जाइए। चीफ जस्टिस ने विकास सिंह से यह भी कहा कि आप मेरी कोर्ट से तुरंत बाहर निकल जाएं। उन्होंने जोर देकर कहा मैं दबाव में नहीं आऊंगा और आपके साथ साधारण वादी की तरह ही व्यवहार होगा। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'यह ना सोचें कि बेंच को झुका देंगे। मुझे कभी कोई डरा नहीं पाया है और अपने करियर के आखिरी दो सालों में मैं ऐसा होने भी नहीं दूंगा। आप अपने राजनीतिक एजेंडे को कोर्ट हॉल के बाहर आगे बढ़ा सकते हैं।"

उन्होंने सिंह को यह भी याद दिलाया कि वह एससीबीए के अध्यक्ष थे और सुप्रीम कोर्ट को आवंटित भूमि को अनुच्छेद 32 के तहत वकीलों को देने के लिए कह रहे थे। उन्होंने तब घोषणा की कि मामला 17 मार्च को सूचीबद्ध किया जाएगा, लेकिन एक केस के रूप में नहीं। इसके तुरंत बाद वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और एनके कौल ने बार की ओर से इस घटना के लिए सीजेआई से माफी मांगी।

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