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छत्तीसगढ़: 'सीडी पॉलिटिक्स' में बीजेपी या कांग्रेस में से किसे हुआ ज्यादा नुकसान?

रायपुर। चुनाव के नजदीक आते ही मंत्री राजेश मूणत की फर्जी अश्लील सीडी का जिन्न फिर से सामने आ गया है, जिसने छत्तीसगढ़ की सियासत में उथल-पुथल मचा दी है। एक हफ्ते के भीतर हुई तीन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति के समीकरण पूरी तरह से बदलकर रख दिए हैं, सारी पार्टियां अपनी रणनीतियों में फेरबदल करने में लगी हुई हैं, बिलासपुर कांड, जोगी-बसपा गठबंधन के बाद भूपेश बघेल की गिरफ्तारी इन मामलों ने फिलहाल चुनाव की दिशा ही बदल दी है। इनमें से सीबीआई द्वारा भूपेश बघेल पर कसे शिकंजे ने जहां कांग्रेस को गेम चेंजर प्लान दे दिया है, वहीं भाजपा मामले में आक्रामक तो नजर आ रही है लेकिन हकीकत में उनके नेताओं के माथे पर सिलवटें साफ तौर पर नजर आ रही हैं।

chhattisgarh SEX CD congress consider itself a game changer and BJP in tension

आपको बता दें 26 अक्टूबर 2017 को जैसे ही कांग्रेस ने अश्लील सीडी के मामले का खुलासा किया है, तभी से भाजपा ने कांग्रेस के इस दांव को धोबी पछाड़ देते हुए न सिर्फ सीबीआई जांच की घोषणा की थी अपितु समय-समय पर भूपेश पर आक्रामक प्रहार भी कर रही थी। सीएम डॉ रमन सिंह भी कई सभाओं में कांग्रेस को इस घृणित राजनीति के लिए जिम्मेदार बताते हुए जनता के बीच कांग्रेस के चाल चरित्र और चेहरे को काला बताने में एक तरह से कामयाब भी रहे थे। भूपेश से भी पार्टी के कई बड़े नेता इस मामले में कन्नी काट रहे थे लेकिन विनोद वर्मा की गिरफ्तारी और भूपेश पर एफआईआर ने कांग्रेस को एकजुटता का पहला मौका दिया।

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इसके बाद मामले में आरोपी बनाए गए रिंकू खनूजा की सीबीआई की प्रताड़ना से मौत के आरोप ने कांग्रेस को दूसरा ऐसा मौका दिया जिससे भाजपा को बैकफुट पर लाया जा सके। कांग्रेस ने इसे जमकर भुनाया इसके लिए जांच समिति बनाई गई, सोशल मीडिया रमन सिंह मौन करके कैंपेन भी किया। यहीं से भाजपा ने जो कांग्रेस को उसी के दांव में उलझाया था। वो खुद ही उलझती नजर आई, इसके बाद भाजपा नेता कैलाश मुरारका की मामले में संलिप्तता ने भाजपा को मुश्किल में डाल दिया।

इस घटनाक्रम में जैसे ही कांग्रेसियों को भूपेश सीबीआई के समन की जानकारी मिली उन्होंने तुरंत रणनीति बदली और यह एक रात पहले ही तय कर लिया कि यदि गिरफ्तारी का आदेश होता है तो वे बेल नहीं लेंगे सीधे जेल जाएंगे औऱ सत्याग्रह करेंगे। दूसरी तरफ बाकि सारे कांग्रेसी जेल भरो आंदोलन करके प्रदेश में भाजपा की लोकतंत्र की हत्या करने वाली सरकार की तरह जनता के सामने रखेगी। कांग्रेस अपने इस प्लान में एक तरह से कामयाब भी रही। जनता के बीच ये संदेश गया कि भूपेश ने नरेन्द्र मोदी को काले झंडे दिखाए थे इसलिए उन्हें जेल भेजा गया है, यदि जानकारों की माने तो भूपेश ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं, एक तो सीडी कांड के कलंक को भाजपा के बदले की तरह पेश कर इसे धो दिया है, दूसरी तरफ ये दिखाने में कामयाब हुए हैं कि गरीब, शोषितों की आवाज उठाने के कारण उन्हें सरकार ने फंसाया है।

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यदि बात भाजपा की करें तो भाजपा मामले में आक्रामक तो है खुद सीएम ने बयान देकर कहा कि कांग्रेस ने ही सीबीआई जांच की मांग की थी। अब सीबीआई कार्रवाई कर रही है तो कांग्रेसी इसे सरकार की साजिश बता रहे हैं, इस घृणित कृत्य ने छत्तीगढ़ महतारी को शर्मसार किया है, भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष ने राहुल गांधी से भूपेश को इस आपराधिक कृत्य के लिए हटाने की मांग की है, हालांकि भूपेश की गिरफ्तारी से भाजपा ज्यादा खुश नहीं है क्योंकि ये बात तो भाजपा के रणनीतिकार मान रहे हैं, एंटीइंकबेसी के साथ ही घटना ने कांग्रेस को मुद्दा दे दिया है। भाजपा इसे भूपेश के पॉलिटिकल स्टंट का नाम दे रही है लेकिन आम जनता में भाजपा सरकार की तानाशाही का मैसेज ही जा रहा है।

आने वाले दो महीनों में प्रदेश में विधानसभा चुनाव है, अन्य भाजपा शासित तीन राज्यों में छत्तीसगढ़ को भाजपा आलाकमान सुरक्षित मानकर चल रहे हैं क्योंकि यहां कांग्रेस के पास बहुत अधिक मुद्दे हैं न ही कोई करिश्माई नेतृत्व है ऐसे में भाजपा चौथी बार सरकार बनते हुए दिख रही है लेकिन सात दिनों के अंदर घटे घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में बहुत कुछ बदला है, जहां खत्म हो रही जोगी कांग्रेस को बसपा ने ऑक्सीजन दिया है तो बिलासपुर लाठीचार्ज व भूपेश की गिरफ्तारी ने निष्क्रिय पड़े कांग्रेस की कार्यकर्ताओं की बैटरी को फिर से रिचार्ज कर दिया है तो भाजपा संगठन में चिंता की लकीरें उबर रही हैं, ऐसे में लगता ही की तीनों ही अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। खैर जनता को कौन कितना समझा पाता है इसका जवाब चुनाव के नतीजों से साफ हो जाएगा।

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