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शर्मनाक: छेड़छाड़ की शिकार हुई 13 साल की लड़की, शुद्धिकरण के नाम पर पंचायत ने मुंडवाया सिर

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में एक ऐसी वारदात सामने आई है जिसने पूरे देश को शर्मसार कर दिया है। यहां छेड़खानी की शिकार हुई 13 साल की एक नाबालिग लड़की के बालों को समुदाय विशेष की भरी पंचायत के बीच इसलिए मुंडवा दिया गया ताकि उसका शुद्धिकरण किया जा सके। मामला इसलिए भी बड़ा है क्‍योंकि कर्वधा मुख्‍यमंत्री रमन सिंह का गृह जनपद है। मामला अब पुलिस के पास पहुंचा है तो छेड़खानी करने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। अब समुदाय के उन लोगों की तलाश की जा रही है जिन्‍होंने इस शुद्धिकरण का आदेश दिया था। पुलिस से प्राप्‍त जानकारी के मुताबिक बाल मुंडवाने की घटना 5 फरवरी को कुकदुर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले गांव में हुई। यह गांव जिला मुख्यालय से 75 किलोमीटर दूरी पर है।

जान लीजिए पूरा मामला

जान लीजिए पूरा मामला

बीते 21 जनवरी को लड़की के साथ 22 साल के अर्जुन यादव ने उस समय छेड़खानी की जब वह निर्माण स्थल पर काम करने के लिए गई थी। अर्जुन शराब के नशे में था। इसकी जानकारी लड़की ने अपने माता-पिता को दी। उसके बाद 22 जनवरी को पंचायत बुलाई गई। पंचायत में अर्जुन पर 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाकर मामले को रफा-दफा कर दिया गया।

बैगा समुदाय ने पीडि़ता के परिवार का बहिष्‍कार कर दिया

बैगा समुदाय ने पीडि़ता के परिवार का बहिष्‍कार कर दिया

इसके बाद 4 फरवरी को बैगा आदिवासी समुदाय (जिससे कि लड़की ताल्लुक रखती है) ने एक बैठक की और उसके परिवार का बहिष्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि छेड़खानी के बाद लड़की अशुद्ध हो चुकी है , इसके बाद समुदाय के सदस्यों ने लड़की के बालों को मुंडवाने का आदेश दिया ताकि उसका शुद्धिकरण किया जा सके। अगले ही दिन लड़की का सिर मुड़ दिया गया। उसके परिवार को समुदाय के लोगों के लिए भोज करवाने के लिए भी कहा गया।

सामाजिक दबाव में नतमस्तक होना पड़ा

सामाजिक दबाव में नतमस्तक होना पड़ा

बता दें कि पीड़िता कक्षा सातवीं की छात्रा बैगा समुदाय की है। बैगा समुदाय में महिलाओं के या लड़कियों के बाल काटना या मुंडन करना सख्त मना है। बावजूद गांव के ही कुछ लोगों ने इस करतूत को अंजाम दिया। पीड़ित लड़की की मां ने बताया कि एक शराबी की करस्तानी की सजा उसकी बेटी को भुगतनी पड़ी है। पीड़िता की मां ने बताया कि वह समाज के इस फैसले के पक्ष में नहीं थी। फिर भी सामाजिक दबाव में उसे व परिवार वालों को नतमस्तक होना पड़ा।

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