टॉप नक्सली कमांडर देवजी ने किया सरेंडर, 1 करोड़ के इनामी तिरूपति ने तेलंगाना पुलिस के सामने क्यों डाले हथियार
Devji Naxal Surrender: छत्तीसगढ़ के शीर्ष माओवादी कमांडर और प्रमुख रणनीतिकार थिप्पिरी तिरूपति उर्फ देवजी ने रविवार को तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। मओवाइी कमांडर को मल्लव राजू रेड्डी, मुरली और संग्राम नामों से भी जाना जाता है।
छत्तीसगढ़ के बड़ा नकस्सली नेता देवजी तेलंगाना के जगतियाल जिले के निवासी हैं। इस पर ₹1 करोड़ का इनाम घोषित था। एक शीर्ष अधिकारी के हवाले से आई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार देवजी के साथ कई अन्य नक्सलियों ने भी आत्मसमर्पण किया है,

क्यों सरेंडर के लिए मजबूर हुआ 1 करोड़ का इनामी नक्सली?
यह आत्मसमर्पण केंद्र सरकार की मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने की समय सीमा से कुछ दिन पहले हुआ है। जानकारी के अनुसार, देवजी ने ही पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) का गठन किया था।
कौन हैं कमांडर देवजी, कैसे बना नक्सलियों का कमांडर?
मई 2025 में नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू की मौत के बाद उसकी जगह देवजी ने संगठन में अहम जिम्मेदारी संभाली थी। देवजी 1982 में जगतियाल के कोरुतला में इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान रेडिकल स्टूडेंट यूनियन (RSU) से प्रभावित हुआ। करीमनगर में RSU और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बीच झड़पों में आरोपी बनने के बाद वह 1983 में भूमिगत हो गया।
- 1983-84 में गढ़चिरौली दलम में सक्रिय रहा।
- 1985 में एरिया कमेटी सदस्य बना।
- 2001 में सेंट्रल कमेटी सदस्य बना।
- 2016 में CMC इंचार्ज बना।
देवजी पार्टी के पोलित ब्यूरो का भी हिस्सा रहा और छत्तीसगढ़ के माड इलाके से गतिविधियां संचालित करता था।
बड़ा ऑपरेशन 'केजीएच 2'
देवजी के आत्मसमर्पण से पहले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने 17 फरवरी को छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर 'केजीएच 2' ऑपरेशन शुरू किया। कर्रेगुट्टा हिल्स (नांबी और कोरगोटालू पहाड़ियां) में करीब 300 नक्सलियों की तलाश की जा रही थी। इनमें देवजी, मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर, रामन्ना और राजी रेड्डी जैसे शीर्ष नेता शामिल थे।
सुरक्षा बलों की चेतावनी
सुरक्षा बलों ने मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले आत्मसमर्पण या मुठभेड़ में खत्म होने की चेतावनी दी थी। 15 फरवरी को तेलंगाना के डीजीपी बी. शिवधर रेड्डी ने नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की। उन्होंने राज्य की पुनर्वास योजना के तहत हर संभव मदद और लाभ का आश्वासन दिया।
कमांडर देवजी ने तेलंगाना में क्यों किया सरेंडर?
देवजी ने बढ़ते ऑपरेशनल दबाव, कानूनी मामलों और पारिवारिक अपील के बीच उन्होंने तेलंगाना में आत्मसमर्पण का रास्ता चुना। मूल रूप से करीमनगर जिले के कोरुटला क्षेत्र से जुड़े देवजी के खिलाफ कई राज्यों में केस दर्ज हैं, ऐसे में नियंत्रित कानूनी प्रक्रिया और सुरक्षा आश्वासन उनके फैसले में अहम रहे। छत्तीसगढ़ में तेज़ अभियानों और बरामद आईईडी के बीच यह कदम सामरिक माना जा रहा है, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि आत्मसमर्पण केवल आर्थिक पैकेज नहीं बल्कि विश्वास, बातचीत और व्यक्तिगत परिस्थितियों का भी परिणाम होता है।
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