छत्तीसगढ़: कृषि क्षेत्र में सुधार की दिशा में अगुवा बना कृषि उत्पाद संगठन, किसानों को मिल रही बेहतर सुविधाएं
छत्तीसगढ़ भारत का एक प्रमुख कृषि प्रदेश है, जहाँ 70 प्रतिशत आबादी कृषि या उससे संबंधित कामों में लगी है। राज्य में लगभग 37.46 लाख किसानों में से 80 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसान हैं। छत्तीसगढ़ के निवासियों की आमदनी का मुख्य स्रोत खेती के अलावा हॉर्टीकल्चर, पशुपालन, और वन उत्पाद भी है। आदिवासी लोग जंगली उत्पादों जैसे कि तेंदु पत्ता आदि को बेचकर अपनी आजीविका कमाते हैं।
छत्तीसगढ़ के किसान मुख्य रूप से चावल, गेंहू, बाजरा, दालहन और तिलहन उगाते हैं। केंद्र सरकार के निर्देशानुसार, राज्य सरकार गांवों में किसानों को खेती संबंधित रसायन, खाद, और उर्वरक आसानी से उपलब्ध करवाती है।

केंद्र सरकार ने किसान उत्पादक संगठन (FPO) की शुरूआत की है, जो छोटे किसानों को कृषि से संबंधित जानकारी और सहायता प्रदान करते हैं। इन संगठनों के माध्यम से किसानों को तकनीकी सेवाएं, खाद्य-प्रसंस्करण, प्रचार-प्रसार, उत्पादों की बिक्री की जानकारी और अन्य प्रकार की सहायता मिलती है। इसके अलावा, FPO की मदद से किसानों को सस्ते दामों पर कृषि संबंधी रसायन, बीज और उपकरण भी मिल जाते हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सभी राज्यों और किसानों को भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति को अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने किसानों को जैविक खेती को बढ़ावा देने की भी सलाह दी है।
केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदम और किसान उत्पादक संगठन के शुरू होने से किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण विकास हुआ है। इन FPO द्वारा किसानों को आवश्यक सहायता दी जाती है, जिससे उन्हें उनके कृषि उत्पादों के लिए सुगम बाज़ार और अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करने में मदद मिलती है।












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